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अगस्त, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

माज़िद हैदरी कान खोलकर सुन ले भारतवर्ष में औरंगजेब सबसे पहला तालिबानी आतंकी था

एक राष्ट्रीय चैनल पर  तथाकथित कश्मीरी पत्रकार माज़िद हैदरी ने एक डिबेट शो के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि - *" बाबर ने देश को ताकतवर बनाया और औरंगजेब ने देश को एकता प्रदान की। "*  माज़िद हैदरी जैसे मुगलों की यह नाजायज़ टेस्ट ट्यूब बेबीज शायद इस बात से अंजान हैं कि 362 वर्ष पहले सत्ता के लालची और कट्टरपंथी औरंगजेब ने अपने बड़े भाई दाराशिकोह का सर कलम करवा दिया था। आज हम तालिबान की जिस अमानवीयता और हैवानियत का नंगा नाच अफगानिस्तान में देख रहे हैं, अबसे 362 वर्ष पहले वही क्रूरता और पाशविकता का सबसे बड़ा और पहला उदाहरण औरंगजेब ने अपने बड़े भाई दाराशिकोह का सर कलम करवाकर दिया था।  भारत के इतिहास में एक योद्धा और एक कवि के तौर पर दाराशिकोह का अपना महत्व है। भारत के इतिहास में दाराशिकोह को एक आदर्श मुसलमान माना जाता है। संस्कृत और फारसी के विद्वान दाराशिकोह ने गीता और 52 उपनिषदों का पहली बार संस्कृत से फारसी में अनुवाद किया था। इसके बाद ही पूरी दुनिया भारतीय सनातन संस्कृति  के महत्व को समझ पाई थी। लेकिन कट्टरपंथी तालिबानी आतंकियों और लुटेरों के आदर्श औरंगजेब ने दा...

आज़म साहब का यह बयान क्या तालिबानी मानसिकता का परिचायक नहीं था

28 दिसम्बर 2018 को छपे "आज तक" समाचार चैनल की एक ख़बर के अनुसार यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री और सपा नेता आजम खान ने संसद में तीन तलाक पर बहस के दौरान कहा था कि- *“जो मुसलमान हैं, जो कुरान को मानते हैं, वे जानते हैं कि तलाक का पूरा प्रोसीजर कुरान में दिया गया है। हमारे लिए उस प्रोसीजर के अलावा कोई कानून मान्य नहीं है। सिर्फ कुरान का कानून ही मुसलमानों के लिए मान्य है।”* अब ज़रा तालिबानी विचारधारा को समझिये। तालिबान कहता है कि अफगानिस्तान को इस्लामिक कानूनों (शरिया) के अनुसार ही चलाया जाएगा। अर्थात केवल कुरान का कानून ही तालिबान का संविधान है। अब ज़रा इन दोनों बातों पर गम्भीरता से विचार कीजिये तो आपको मालूम होगा कि समाजवादी पार्टी के कद्दावर और संस्थापक नेताओं में से एक जनाब आज़म खान साहब ने जो कुछ 2018 में कहा था, बिल्कुल वही आज अफगानिस्तान में तालिबानियों ने दोहराया है। आज़म साहब के उपरोक्त बयान से स्पष्ट है कि भारत के मुसलमानों के लिए कुरान के कानून से ज़्यादा कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। मतलब भारत का संविधान मज़हबी कानूनों से ऊपर नहीं है।  आज़म खान साहब की तरह ही शफीकुर्र...

तालिबानियों को यह समझ लेना चाहिए कि कुत्तों के भौंकने से हाथी नहीं डरा करते

हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर से जुड़े कई विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए तालिबान का जिक्र किए बिना कहा था कि "आतंक की सत्ता स्थायी नहीं रहती"। प्रधानमंत्री श्री मोदी का यह कथन ठीक ऐसे समय में आया है जबकि तालिबानी आतंकियों ने क्रूरता और आतंक की समस्त सीमाओं को लांघते हुए अफगानिस्तान पर अपना कब्ज़ा जमा लिया है और अपनी ही सरकार बनाने की घोषणा भी कर दी है। मोदी जी ने आगे कहा कि- *"भगवान सोमनाथ का मंदिर आज भारत ही नहीं, पूरे विश्व के लिए एक विश्वास है। जो तोड़ने वाली शक्तियां है... जो आतंक के बलबूते सामर्थ्य खड़ा करने वाली सोच है... वह किसी कालखंड में कुछ समय के लिए भले ही हावी हो जाए लेकिन उसका अस्तित्व कभी स्थाई नहीं होता। वह ज्यादा दिनों तक मानवता को दबाकर नहीं रख सकतीं।"* मोदी जी का यह सच तालिबान को कड़वा लग गया है। तालिबान के प्रमुख नेता शहाबुद्दीन दिलावर ने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए दावा किया है कि उसका संगठन सफल रहेगा। पीएम मोदी की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलावर ने कहा कि भारत जल्द देखेगा कि तालिबान द...

आदरणीय मोदी जी यह आपकी राजनीति हो सकती है, राष्ट्रनीति नहीं

परम आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी सादर प्रणाम महोदय, यद्यपि आपकी राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र के प्रति आपकी निष्ठा पर संदेह करना ठीक ऐसा ही है जैसे कोई प्रभु श्री हनुमान की श्रीरामभक्ति और निष्ठा पर संदेह करने का दुस्साहस करे। *परन्तु हम बहुत विनम्रता किंतु पूर्ण दृढ़ता से आपसे जानना चाहते हैं कि अफगानी नागरिकों को भारतवर्ष में शरण देने के प्रति कौन सा राष्ट्रवाद अथवा राष्ट्रहित छुपा हुआ है। यह तो ठीक वैसी ही नीति है जैसी कि स्व. मोहनदास करमचंद गांधी ने भारत-पाक विभाजन के समय शरण देकर की थी और भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी ने   बांग्लादेशियों को शरण देकर की थी। आज आप भी बिल्कुल वही सब दोहरा रहे हैं। यह राजनीति तो हो सकती है परन्तु इसे किसी भी दशा में राष्ट्रनीति नहीं माना जा सकता है।*  आप शायद भूल रहे हैं कि राजा परीक्षित को जिस तक्षक नाग ने डसा था वह एक छोटे से फल में सूक्ष्म रूप में राजा परीक्षित के महल में पहुंचा था। परन्तु वहां पहुंचते ही उसने अपना वास्तविक रूप धारण कर लिया और उसी विराट रूप में आकर उसने राजा परीक्षित को डस लिया था।...

जब ब्राह्मणों पर कथित अत्याचार हो रहे थे, तो क्या सतीश मिश्र बांसुरी बजा रहे थे

कन्नौज आए बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद सतीश मिश्र ने कहा कि *बसपा की सरकार बनी तो बिकरू कांड की फिर से जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह अविश्वसनीय है। उन्होंने भाजपा पर धर्म के नाम पर झूठ बोलने व ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगाया है। बिकरू कांड का हवाला देते हुए कहा कि उसके बाद से ब्राह्मण समाज का उत्पीड़न लगातार बढ़ा है।* बहुजन समाज पार्टी को बहुत जल्दी ब्राह्मणों और हिन्दू धर्म की चिंता सताने लगी है। अगर सतीश मिश्र जी को ब्राह्मणों की इतनी चिंता है तो वह बताएं कि 2022 विधानसभा चुनाव में वह उत्तरप्रदेश में ब्राह्मणों को कितने टिकट बांट रहे हैं? ब्राह्मणों के नाम पर अरबों-खरबों की संपत्ति बनाने वाले कथित ब्राह्मण नेता यह भी बताएं कि इस बार हाथी पर कितने ब्राह्मणों को बैठाया जायेगा? एक बड़ा सवाल यह है कि इस बार कौन-कौन से ब्राह्मण नेता बिना चप्पलें उतारे बहन कुमारी मायावती जी के दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त कर पाएंगे??  सतीश चंद्र मिश्र जी विकास दुबे को "ब्राह्मणत्व का चेहरा" बनाने पर तुले हुए हैं, लेकिन वह यह भी बताने का कष्ट करे...

उद्धव जी ने तो पूरे संत समाज और सम्पूर्ण उत्तरप्रदेश का अपमान किया था

भाजपा के केंद्रीय मंत्री राणे ने रायगढ़ जिले में जन-आशीर्वाद यात्रा के दौरान कथित तौर पर कहा, *‘यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि आजादी को कितने साल हो गए हैं। भाषण के दौरान वह पीछे मुड़कर इस बारे में पूछते नजर आए थे। अगर मैं वहां होता तो उन्हें एक जोरदार थप्पड़ मारता।’* राणे ने दावा किया कि 15 अगस्त को जनता को संबोधित करते समय ठाकरे यह भूल गए थे कि आजादी को कितने साल पूरे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि भाषण के बीच में वह अपने सहयोगियों से पूछ रहे थे कि स्वतंत्रता दिवस को कितने साल हुए हैं। इस बयान को लेकर महाराष्ट्र में बड़ा बवाल मचा हुआ है। और *"ठाकरे सेना" का यह मानना है कि राणे ने केवल मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र का अपमान किया है।* अब ज़रा तस्वीर का दूसरा रुख़ देखिये महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ने मई 2018 में पालघर में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ पर कमेंट करते हुए कहा था कि- *"उन्होंने (योगी आदित्यनाथ ने) चप्पल पहनकर शिवाजी की प्रतिमा को माला पहनाई। मेरा मन किया कि उन्हें उन्हीं की चप्पल से...

भाईचारा शब्द की कीमत वो क्या समझेंगे साहब, जिन्होंने आपको केवल चारा समझ रखा है

" अगर भारत से पुलिस को हटा लिया जाये तो 15 मिनट के अंदर यहां के 25 करोड़ मुसलमान 100 करोड़ हिंदुओं का खात्‍मा कर सकते हैं।" * यह बयान किसी तालिबान से नहीं आया था और न ही किसी हाफ़िज़ सईद ने दिया था। बल्कि इस बयान को देने वाला एक अहंकारी, कपटी, धूर्त और मक्कार हैदराबादी "भाईजान" था। जिसके बड़े भाईसाहब हमेशा "संविधान" और "भाईचारा" शब्दों को च्युंगम की तरह चबाते घूमते हैं। " भाईचारा" शब्द इन जैसे "भाईजानों" के लिए "शब्दों का मायाजाल" है, जिसमें उलझाकर यह अपने ही भाइयों को "चारा" बना डालते हैं । जिसकी ताज़ी और बेहतरीन मिसाल अफगानिस्तान में हो रहे जुल्मों-सितम हैं।  आज हम अपनी आंखों से देख रहे हैं, सुन भी रहे हैं और शायद प्रतिक्रिया में बोल भी रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि ऐसे मंजर इतिहास में कोई पहली दफ़ा हो रहे हैं। इससे पहले यह सब इसी भारत में हो चुका है, जिसका सबसे लेटेस्ट उदाहरण कश्मीर है। जहां कश्मीरी हिंदुओं के साथ ठीक वही सुलूक किया गया था जो अफगानिस्तान में यह लोग अपने ही "बिरादरों" के ...

चचा शिवपाल की घर वापसी भतीजे के लिए दूर का नुकसान साबित हो सकती है

उत्तरप्रदेश में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया श्रीमान शिवपाल यादव और पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के बीच गठबंधन की बातचीत चल रही है। ऐसा  लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चा से सुनने में आ रहा है। दरअसल, चचा-भतीजे के बीच मसला कुछ यूं है कि एक को कोई ठौर नहीं, दूसरे को कोई और नहीं है। सच पूछिए तो श्री शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के मुहं में ठीक ऐसे ही हैं जैसे सांप के मुहं में छछुंदर, जिसे न उगले ही बनता है और न ही निगले बन पा रहा है। श्रीमान शिवपाल यादव जानते हैं कि अभी तक उनकी पार्टी का कोई जनाधार नहीं है। वह यह भी जानते हैं कि समाजवादी पार्टी में भी उनका अपना कोई अस्तित्व नहीं बचा है और भतीजे अखिलेश के रहते उनका भविष्य भी अंधकारमय ही है। उधर बसपा और भाजपा दोनों को ही चचा शिवपाल की कोई आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस का अपना कोई वजूद नहीं है, तो अगर वह शिवपाल जी से हाथ मिला भी ले तो वही स्थिति होगी जैसे किसी अंधे को कोई लंगड़ा कंधे पर बैठाकर नदी पार करने निकल पड़े। श्री अखिलेश यादव जानते हैं कि चचा शिवपाल को कोई ठौर नहीं है, वह यह भी जानते हैं कि भले ही चचा...

सोनिया गांधी के इस बयान में उनकी सत्ता के प्रति छटपटाहट स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है

मीडिया सूत्रों के हवाले से ख़बर मिली है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष के 19 दलों के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा है कि *"देश की जनता मोदी शासन से मुक्ति चाहती है। इसलिए विपक्षी दलों को एकजुट होकर 2024 के लोकसभा चुनाव पर फोकस करना है।"* श्रीमती गांधी ने विपक्ष के प्रमुख नेताओं और मुख्यमंत्रियों को वर्चुअल बैठक के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि *विपक्षी दलों को 2024 के लोकसभा चुनाव की योजना पर व्यवस्थित रूप से और एकमात्र एजेंडे के तौर पर काम करना है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की अपनी कुछ बाध्यताएँ हो सकती हैं लेकिन चुनौती लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना की है और इस चुनौती से निपटने के लिए सब को एकजुट होकर के काम करना है तथा मिलकर मोदी सरकार से देश की जनता को मुक्ति दिलाना है।* श्रीमती गांधी ने कहा कि *विपक्षी दलों को एकजुटता से बहुत बड़ा राजनीतिक युद्ध लड़ना है।*  यहां गौरतलब है कि श्रीमती गांधी को आज समझ में आया कि देश की जनता क्या चाहती है। काश अगर यह बात श्रीमती गांधी और उनके होनहार विद्वान सुपुत्र श्रीमान राहुल गांधी की समझ में पहले ही आ जाती तो शा...

महृषि वाल्मीकि का अपमान केवल दलित समाज का नहीं, अपितु सम्पूर्ण भारत का अपमान है

लिब्रांडू गैंग के दरबारी शायर मुनव्वर राना ने एक चैनल से बात करते हुए कहा कि, *‘ वाल्मीकि रामायण लिखने के बाद भगवान बन गए, इससे पहले वह एक डकैत थे, व्यक्ति का चरित्र बदल सकता है. इसी तरह तालिबान अभी आतंकवादी हैं, लेकिन लोग और चरित्र बदलते हैं. ’* राना ने कहा, *‘ जब आप वाल्मीकि के बारे में बात करते हैं, तो आपको उनके अतीत के बारे में भी बात करनी होगी. अपने धर्म में आप किसी को भी भगवान बना सकते हैं, लेकिन वह एक लेखक थे और उन्होंने रामायण लिखी. लेकिन हम यहां प्रतिस्पर्धा में नहीं हैं .’* इस बयान के बाद राना के खिलाफ धारा 153 ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 295ए (किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जान-बूझकर किया गया दुर्भावनापूर्ण कृत्य), 505 (1) (बी) (सामान्य जन या जनता के किसी वर्ग के बीच भय पैदा करना) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। मुनव्वर राना के विरुद्ध देशद्रोह की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत होना चाहिए। लेकिन यहाँ मुनव्वर राना से भी ज़्यादा बड़...

तालिबानी हैवानियत के नंगे नाच को "भाजपा की राजनीति" बताकर अपनी बेशर्मी की चादर से ढकने का असफ़ल प्रयास कर रहे

सोशल मीडिया पर एक बड़ी मुहिम चल रही है जिसमें कांगी, वामी, जिहादी और जयचन्दों ने पूरी ताक़त झोंक रखी है। यह पूरी जमात यह साबित करने पर तुली है कि अफगानिस्तान में हो रहे सम्पूर्ण घटनाक्रम को ढाल बनाकर सत्तापक्ष अपनी तथाकथित नाकामियों को छुपाना चाहता है। साथ ही इस मुहिम के माध्यम से यह भी साबित करने का असफल प्रयास किया जा रहा है कि अफगानिस्तान में ऐसा कुछ भी नहीं है बल्कि वहां तो "तालिबानी क्रांतिकारियों" ने विदेशी शासन को उखाड़ फेंका है और इस्लाम की शांति और सौहार्दपूर्ण सत्ता को स्थापित किया गया है।  दूसरे शब्दों में कहें तो "तालिबान क्रांतिकारियों" ने अपने अधिकारों को वापस ले लिया है।  इस मुहिम को चलाने वाले लोगों में लुटियन पत्रकार, दरबारी शायर और लिब्राण्डू गैंग जैसे तमाम तथाकथित बुद्धिजीवी शामिल हैं। यहां ग़ौरतलब है कि यह वही लोग हैं जो कल तक फलीस्तीन में हमास आतंकियों की "हगास" निकालने वाले इजरायल और उसके राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू को पानी पी-पीकर कोस रहे थे। जब हमास के दावों की हवा निकाली जा रही थी तब इनके पेट में मरोड़ उठ रही थीं। उस समय ...

स्वरा भास्कर जैसे लोगों को तस्वीर के दोनों रुख़ देखने चाहिए

भारत में टुकड़े-टुकड़े गैंग और "बौद्धिक आतंकवाद" की सदस्या स्वरा भास्कर ने ट्वीट करते हुए लिखा,"हम हिंदुत्व के आतंक के साथ ठीक नहीं हो सकते और हम तालिबान के आतंकी हमले से टूट गए हैं और पूरी तरह से सदमें में हैं। हम तालिबान के आतंक से शांत नहीं हो सकते और हम सभी हिंदुत्व के आतंक के बारे में नाराज होते हैं। हमारे मानवीय और नैतिक मूल्य पीड़िता या उत्पीड़क की पहचान पर आधारित नहीं होने चाहिए।" दूसरी तरफ़ पाकिस्तान में टिकटॉक पर वीडियो बनाने वाली एक महिला ने आरोप लगाया है कि यहां स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त) के मौके पर उसके कपड़े फाड़ दिए गए और उसे लोगों ने हवा में उछाला. इसके साथ ही, लोगों ने महिला के साथ जमकर मारपीट भी की. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक महिला अपने छह साथियों के साथ 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर मीनार-ए-पाकिस्तान के पास एक वीडियो बना रही थी, तभी करीब 300 से 400 लोगों ने उन पर हमला कर दिया. इसको लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो ख़ूब वायरल हो रहा है जिसमें साफ़ देखा जा सकता है कि मज़हबी उन्माद से भरे हुए कुछ जाहिल और गुंडे किस्म के लोग किस प्रकार से हैवानियत और ...

क्या भारत में यह एक नए तालिबान की सुगबुगाहट है

कोई भी व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह अथवा संगठन कभी ताक़तवर नहीं होता, ताक़तवर होती है उस व्यक्ति या संगठन की सोच, उसकी मानसिकता या उसकी विचारधारा। व्यक्ति मिट जाता है, समाप्त हो जाता है परन्तु उसकी सोच, उसकी विचारधारा सदैव जीवित रहती है। इसलिए व्यक्ति को मारने से बेहतर है कि उसकी सोच, उसकी विचारधारा को मार दो। सांप घातक नहीं होता बल्कि उसका वह दांत घातक होता है जिसमें ज़हर होता है। इसलिए सांप को मारने से कहीं अधिक बेहतर है कि उसके उन दांतों को तोड़ दो जिनमें ज़हर भरा है।  नाथूराम गोड्से ने मोहनदास करमचंद गांधी को मारा था, गांधीवाद को नहीं। कांग्रेस ने उसी गांधीवाद को पुष्पित-पल्लवित किया और उस गांधीवाद को ढाल बनाकर इस देश पर 70 सालों तक हुक़ूमत की।  तालिबान एक ऐसी ही विचारधारा है। अफगानिस्तान से रूसी सैनिकों की वापसी के बाद 1990 के दशक की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में तालिबान का उभार हुआ था. *पश्तो भाषा में तालिबान का मतलब होता है "छात्र", खासकर ऐसे छात्र जो कट्टर इस्लामी धार्मिक शिक्षा से प्रेरित हों. माना जाता है कि कट्टर सुन्नी इस्लामिक विद्वानों ने धार्मिक संस्थाओं...

क्या BJP अर्थात बैकवर्ड जन पार्टी बन रही है

भाजपा पहले हिन्दू, हिंदुत्व और हिन्दू राष्ट्र की बात करती थी, तब वह हिंदुओं की पार्टी कहलाती थी। उसके बाद 2019 में भाजपा ने अपना चोला बदला और राष्ट्रीयता और राष्ट्रवाद की दुहाई देनी आरम्भ कर दी, तब वह राष्ट्रवादी पार्टी कहलाने लगी। अब उत्तरप्रदेश में चुनाव होने का बिगुल बजते ही भाजपा ने जिस प्रकार से बैकवर्ड कार्ड खेलना आरम्भ किया है, उससे लग रहा है कि कुछ समय पश्चात BJP का नया नामकरण "बैकवर्ड जन पार्टी" के नाम से होगा। मतलब हिंदुवादी और राष्ट्रवादी पार्टी अब धीरे-धीरे "पिछड़ावादी पार्टी" बनती जा रही है। अभी तक जितनी सरकारी योजनाएं और कार्यक्रम आए हैं उनका अधिकांश लाभ पिछड़ा वर्ग को ही मिलता नज़र आ रहा है। और तो और सवर्ण वर्ग की कई जातियों को अब पिछड़ा वर्ग में शामिल कर लिया गया है, जिसमें सबसे प्रमुख हिन्दू कायस्थ हैं, जिन्हें पूर्वान्चल में "लाला" कहा जाता है। मजे की बात यह है कि यह अभी भी हमारी समझ से परे है कि इसे कायस्थ जाति का प्रमोशन कहा जाए या फिर डिमोशन? फिलहाल तो सभी अगड़े अपने को पिछड़ा कहलवाने में गौरवांवित अनुभव कर ही रहे हैं। उत्तरप्रदे...

क्या शफीकुर्रहमान बर्क़ जैसे लोग भारत में तालिबानी विचारधारा को पुष्पित-पल्लवित कर रहे हैं

उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी का "मुगल आक्रांताओं से प्रेम" किसी से छुपा नहीं है। लेकिन सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क़ साहब ने जिस प्रकार से तालिबानी आतंकियों को "क्रांतिकारी" बताया है वह न केवल बेहद शर्मनाक है बल्कि सच पूछिए तो वह कहीं न कहीं समाजवादी पार्टी के कुछ कट्टरपंथी नेताओं की "तालिबानी" विचारधारा को भी प्रदर्शित करता है। शफीकुर्रहमान बर्क़ साहब जैसे लोग भारत में एक लंबे समय से कट्टरपंथी विचारधारा को पुष्पित-पल्लवित करने में लगे हुए हैं, लेकिन जिस प्रकार से पिछले कुछ समय से इन नेताओं ने अपनी कट्टरपंथी मानसिकता को उजागर किया है उससे उन तमाम लोगों को सबक़ लेना होगा जो लगातार गंगा-जमुनी तहज़ीब, भाईचारा और धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देते रहे हैं। जिन्हें लगता है कि "मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना" उन तमाम लोगों को शफीकुर्रहमान बर्क़ साहब और उन जैसे तमाम "कट्टरपंथी बुद्धिजीवियों" के तालिबानी समर्थक विचारों को गम्भीरता से लेना होगा।  सम्पूर्ण विश्व जानता है कि तालिबानी आतंकियों द्वारा अफ़ग़ान पर कब्ज़ा कराने में सबसे बड़ा हाथ पाकि...

अखिलेश जी इन्हें पार्टी के गुणगान के साथ-साथ राष्ट्रगान भी सिखाईये

एक वीडियो सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हो रहा है। दरअसल वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद तालियां बजाते हुए राष्ट्रीय गान जन–गण–मन की शुरुआत करते हैं। बीच में ही वह राष्ट्रगान भूल जाते हैं और एक दूसरे का चेहरा देखने लगते हैं। हालांकि हम इस वीडियो की कोई पुष्टि नहीं करते परन्तु इतना अवश्य कहेंगे कि जो लोग इस वीडियो को देखकर समाजवादी पार्टी को ट्रोल कर रहे हैं, उन्हें यह जानना और समझना चाहिए कि जिस पार्टी के नेताओं ने सदैव मुगल आक्रांताओं के शौर्यगीत गाये हों, मुगल आक्रमणकारियों के स्मारक बनाये हों, उनसे सही राष्ट्रगान गाने की अपेक्षा करना भी व्यर्थ है। सच पूछिये तो जिन लोगों का यह वीडियो है उन्होंने शायद जिंदगी में पहली बार झंडा फहराया है और राष्ट्रगान भी पहली बार ही गाया है।  दरअसल सपा कार्यकता केवल "मुलायम परिवार" और "मुगल आक्रांताओं" के ही "गुनगान" करते रहे हैं इसलिये इससे अधिक उन्हें कुछ और याद रखना भी नहीं चाहिए। यह कुछ ऐसा ही है जैसे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को "शाही परिवार...

भगवा को बदनाम करने का यह अच्छा रास्ता ढूंढा है इस "योगी महाराज" ने

गाँधीवाद कहता है कि "आंख के बदले आंख का सिद्धांत पूरी दुनिया को अंधा बना देगा"। लेकिन लगता है कि उत्तरप्रदेश की समाजवादी पार्टी के नेताओं को मोहनदास करमचंद गांधी की यह बात फूटी आंख नहीं सुहाई। इसलिए उन्होंने कहा कि "जब तक आप जानवर के साथ जानवर नहीं बनोगे तब तक यह घटनाएं होती रहेंगी।" कानपुर में एक मुस्लिम रिक्शाचालक के साथ एक हिंदुवादी संगठन के नेताओं द्वारा कथित मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद उस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, सुरेश ठाकुर "योद्धा" नामक समाजवादी पार्टी के एक छुटभैया नेताजी ने मीडिया के हवाले से यह बयान दिया है। उनका यह बयान "बुलन्द भारत" नामक एक यूट्यूब चैनल के माध्यम से सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हो रहा है। सुरेश ठाकुर योद्धा नामक समाजवादी पार्टी के यह नेताजी 2011 में सुश्री मायावती के शासनकाल में बनवाये गए पार्क और स्मारक में पम्प ऑपरेटर के सरकारी पद पर नियुक्त हुए थे लेकिन दिसम्बर 2017 में उन्हें इस पद से बर्खास्त कर दिया गया। अपनी नौकरी वापस पाने के लिए सुरेश ठाकुर ने बहुत हाथपैर मारे लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। तब ...

दिशाहीन और नेतृत्व विहीन विपक्ष का अमर्यादित आचरण

विरोध दो प्रकार का होता है- एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्मक। सकारात्मक विरोध करना स्वस्थ लोकतंत्र, सभ्यता और सुसंस्कार की पहचान है। क्योंकि सकारात्मक विरोध हमेशा मर्यादित आचरण और सभ्यता की सीमाओं में किया जाता है। इसलिए सकारात्मक विरोध हमेशा सकारात्मक ऊर्जा उत्सर्जित करता है। जबकि इसके विपरीत नकारात्मक विरोध अमर्यादित आचरण और असभ्यता को जन्म देता है जिससे वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा फैलती है। जो लोग निराशा और हताशा की गर्त में डूबे होते हैं वह हमेशा नकारात्मक विरोध करते हैं। अभी हाल ही में संसद के दोनों सदनों में जिस प्रकार से विपक्ष ने आचरण किया वह पूर्णतया अमर्यादित था, और उनका विरोध पूरी तरह नकारात्मक ऊर्जा को फैलाता चला गया। दरअसल वर्तमान में विपक्ष पूरी तरह से निराशा और हताशा के गर्त में डूबा हुआ है। उसके पास कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जिसपर वह सरकार से सकारात्मक और सार्थक चर्चा कर सके। विपक्ष विशेषकर कांग्रेस स्वयं भी जानती है कि जनता का उसपर से पूरी तरह से विश्वास उठ चुका है। आज भारत धीरे-धीरे कांग्रेस मुक्त होता जा रहा है। और जनता के सामने कांग्रेस के राज में हुए तमाम भ...

डासना को डसने वालों पर इतना सन्नाटा क्यों है भाई

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उत्तरप्रदेश के गाज़ियाबाद जिले के डासना क्षेत्र में स्थित माता के मंदिर में अज्ञात हमलावरों ने मंदिर परिसर में सो रहे महंत यति नरसिंघा नन्द सरस्वती के शिष्य स्वामी नरेशानन्द सरस्वती पर प्राणघातक हमला कर दिया। इस लेख के लिखे जाने तक घायल साधु महाराज की हालत काफी गम्भीर बताई जा रही है। इससे पहले भी डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहा नन्द सरस्वती की भी हत्या का प्रयास किया गया था और इसीलिए मंदिर की सुरक्षा के लिए वहां हर समय पुलिस का कड़ा पहरा लगा रहता है। परन्तु इतने कड़े पहरे के बावजूद हमलावरों का अपने काम को अंजाम देकर भाग जाना पुलिस सुरक्षा पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि हिन्दू समाज के एक धर्मगुरू पर इतनी बड़ी विपदा आई है उसके बावजूद भी "बड़े हिन्दू" क्यों चुप्पी साधकर बैठे हैं। बड़ी घटना पर तो "बड़े हिंदुओं" का बोलना बनता है भाई। उधर सत्तात्रेय गोत्र के जेएनयूधारी पोंगापण्डित भी ट्विटर पर दही जमाये बैठे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल साहब ने भी सहानुभूति और सांत्वना के दो शब्द नहीं ...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी तुष्टिकरण किया जा रहा है क्या?

इस देश में तुष्टीकरण की राजनीति की एक बहुत पुरानी परम्परा रही है। "तुष्टिकरण की राजनीति के गॉड फादर" मोहनदास करमचंद गांधी के रोपे गए तुष्टिकरण के पौधे को कांग्रेस और वामपंथ ने ख़ूब पुष्पित-पल्लवित किया। परन्तु अजीब विडम्बना यह है कि जिन लोगों ने गांधीवाद और वामपंथी विचारधारा का पुरज़ोर विरोध कर राजगद्दी प्राप्त की, वही कथित हिंदुवादी सरकारें हिन्दू और हिंदुत्व का गला घोंटने में लगी हैं, उनकी आवाज़ को दबाने का हरसम्भव प्रयास किया जा रहा है। मज़े की बात यह है कि बड़ी चतुराई से सारा ठीकरा कभी ओवैसी पर, कभी केजरीवाल,कभी शिवसेना पर, कभी ममता पर तो कभी कांग्रेस पर फोड़ दिया जाता है। दिल्ली में जंतर-मंतर पर तथाकथित भड़काऊ नारों के आरोप में श्रीमान अश्वनी उपाध्याय सहित कई हिन्दू संगठनों के नेताओं को गिरफ़्तार किया गया है। कांवड़ यात्रा पर स्वतः संज्ञान लेने वाले माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी इन नेताओं की हिरासत को वैध माना है। मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार असदुद्दीन ओवैसी साहब की घोर आपत्ति के पश्चात ही दिल्ली पुलिस-प्रशासन ने हिन्दू नेताओं के विरुद्ध कार्यवाही की है। ...

अजय कुमार लल्लू साहब कभी बताएं कि मस्जिद और मदरसों में क्या सिखाया जाता है

बीते सोमवार को नगर क्षेत्र के दशहरा बाग मैदान से कलेक्ट्रेट तक आयोजित 'बीजेपी गद्दी छोड़ो मार्च' कार्यक्रम में बाराबंकी पहुंचे अजय कुमार लल्लू ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के पिता को "अब्बा" कहे जाने वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि "मठ और मंदिर में उन्होंने इसी तरह की भाषा को सीखा होगा।"  अजय कुमार लल्लू साहब की इसमें कोई गलती नहीं है, उनके आका श्रीमान "पप्पू साहब" भी कहा करते हैं कि लोग मंदिरों में लड़कियां छेड़ने जाते हैं। मज़े की बात यह है कि इस बयान के बाद से ही "पप्पू साहब" देश के मंदिरों में माथा टेकते हुए घूमते रहे हैं। अब "लल्लू साहब" के बयान से यह ज़ाहिर है कि उनका यह कहना है कि श्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिरों और मठों से "ऐसी भाषा" सीखी है। अर्थात दूसरे शब्दों में मंदिरों और मठों में "अभद्र भाषा" सिखाई जाती है।  मंदिरों और मठों पर अनर्गल और बेहूदे आरोप लगाना गांधीवादियों, वामपंथियों और सेक्युलर गैंग की तुष्टिकरण की राजनीति और हिन्दू विरोधी मानसिकता...

उत्तर प्रदेश का ब्राह्मण सब्जियों में आलू की तरह है

उत्तरप्रदेश के ब्राह्मण समाज का हाल ठीक वैसा ही है जैसा कि सब्जियों में आलू का होता है। आलू हर सब्जी में पड़ता है लेकिन उसका ख़ुद का कोई नाम नहीं होता। उदाहरण के तौर पर सेम के साथ आलू पड़ता है लेकिन सब्जी सेम की होती है, ऐसे ही गोभी में आलू भी पड़ता है लेकिन सब्जी गोभी की ही कहलाती है। ठीक ऐसे ही सपा, बसपा, भाजपा, कांग्रेस और आप लगभग सभी पार्टियों में ब्राह्मण है, लेकिन उसके बावजूद इनमें से कोई भी पार्टी ब्राह्मणों की नहीं कहलाती है। उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि ब्राह्मण समाज कभी किसी के पीछे चलना पसंद नहीं करता, खुद ब्राह्मण ही ब्राह्मण के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करता। और जो लोग ब्राह्मणों के नेता बने घूमते हैं, वह भी अपने को ब्राह्मणों का नेता नहीं बताते।  बड़े भैया श्री सतीश चंद्र मिश्रा आजकल ब्राह्मणों के एक बड़े हितैषी के रूप में प्रदेश भर में भ्रमण कर रहे हैं लेकिन बड़े भैया श्री सतीश चंद्र मिश्रा में जरा भी हिम्मत है तो वह "बसपा" का नाम "बहुजन समाज पार्टी" से बदलकर "ब्राह्मण समाज पार्टी" रख दें। ऐसे ही समाजवादी पार्टी में जो लोग ब्राह्मणों के ने...

अखिलेश जी आप तो "बड़े वाले" हैं साहब हम ठहरे "छोटे वाले हिन्दू"

मीडिया सूत्रों से मिली खबरों के अनुसार उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव ने कहा- ''पहले तो मैं जवाब दे दूं, बीजेपी वालों से बड़े हिंदू हम हैं। उनकी जो परिभाषा है हिंदू वाली, वह हमें नहीं चाहिए, जो नफरत फैलाती हो, लड़ाती हो समाज को बांटती हो़, हम उनसे बड़े हिंदू हैं। जहां तक भगवान की पूजा की बात है, आप सैफई का दिखाइए, हमारा जन्म तो अभी हुआ, हमारे यहां मंदिर तो हमारे जन्म से पहले के हैं। नेताजी (मुलायम सिंह यादव) हनुमान जी की पूजा ना जाने कब से करते आए हैं, तो हम हैं ही नहीं हिंदू, केवल भारतीय जनता पार्टी हिंदू है? जो पाप करे वह हिंदू है?'' माननीय अखिलेश यादव ने हिंदुओं की एक नई परिभाषा को जन्म दिया है - "जो पाप करे वह हिन्दू है।" सही है, इसके अलावा उनसे कोई और उम्मीद रखनी भी नहीं चाहिए। अखिलेश जी के परम मित्र श्री राहुल गांधी "हिंदुओं को आतंकी" मानते हैं और अब अखिलेश जी ने अप्रत्यक्ष रूप से "हिंदुओं को पापी" बना दिया है। श्री अखिलेश यादव कहते हैं कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) हनुमान जी की पूजा एक लंबे...

असदुद्दीन ओवैसी साहब गलती आपकी नहीं है, हम ही अपनी नस्लों को...

अभी बीते शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान एक एंकर ने AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी से श्रीराम मंदिर पर जब सवाल पूछा तो ओवैसी ने जवाब देते हुए कहा- "जब तक हम जिंदा रहेंगे, अपनी नस्लों को बताते रहेंगे कि आजाद भारत में सुप्रीम कोर्ट को धोखा देकर भाजपा ने मस्जिद को शहीद किया था। वो मेरी मस्जिद थी, है और रहेगी।" ओवैसी साहब ने बिल्कुल सही कहा। एक "सेक्युलर भाईजान" से इसके अतिरिक्त आप कोई और उम्मीद कर भी क्या सकते हैं। गलती तो हमारी है ओवैसी साहब कि हम अपनी पीढ़ियों को यह समझाने में नाकामयाब रहे कि टीपू सुल्तान और बहादुर शाह ज़फ़र जैसे लोगों की अंग्रेजों से लड़ाई भारत की आज़ादी की लड़ाई नहीं थी, बल्कि दो आक्रांताओं द्वारा भारत में अपना वर्चस्व  स्थापित करने का युद्ध था। इरफान हबीब और रोमिला थापर सरीखे वामपंथी, जिहादी और छद्म धर्मनिरपेक्ष इतिहासकारो और कांग्रेसी सरकारों ने बड़ी चतुराई से हमारी पीढ़ियों के दिमाग़ में यह कूट-कूट कर भर दिया कि मुगल बादशाह कोई विदेशी आक्रांता या लुटेरे नहीं थे बल्कि वह तो सच्चे देशभक्त थे और उन्होंने भारत को अंग्रेजों के चंगुल से आज़ाद करान...