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जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या भारत का संविधान मूर्तिपूजा को अनुचित मानता है?

आजकल मूर्तिपूजा को लेकर कई आपत्तिजनक बयान आ रहे हैं, जिसे देखो मुहं उठाकर मूर्तिपूजा और मूर्तिपूजकों के ख़िलाफ़ बोलना शुरू कर देता है और पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ हमारी सरकारें भी उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नाम देकर पल्ला झाड़ देते हैं। क्या यह सनातन धर्म और मूर्तिपूजकों की आस्था और उनकी श्रद्धा का खुला अपमान नहीं है?  अभी हाल ही में एक राष्ट्रीय चैनल के एक पत्रकार ने ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को लेकर कोई टिपण्णी कर दी थी जिसे लेकर उनके मानने वालों में खूब रोष देखने को मिला था और उन पत्रकार महोदय की गिरफ्तारी की मांग भी उठी थी। इससे पहले भी कई बार इस प्रकार की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें एक-दो लोगों को धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाने के नाम पर कत्ल भी कर दिया गया। जिसमें एक प्रमुख नाम हुतात्मा कमलेश तिवारी का  भी है। *प्रश्न यह नहीं कि मूर्ति पूजा का विरोध कौन कर रहा है, बल्कि प्रश्न यह है कि उन्हें विरोध करने की खुली छूट कौन और क्यों दे रहा है? प्रश्न यह भी है कि श्रीराम मंदिर को मुद्दा बनाकर दो बार पूर्ण बहुमत से सत्ता प्राप्त कर चुकी भाजपा भी मूर्तिपूजा के विरोधियो...

गांधीवाद के खोखले अहिंसावादी आदर्शों की आड़ में कब तक छुपोगे

महात्मा गांधी ने कहा था कि "कोई तुम्हारे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो तुम दूसरा गाल आगे कर दो". हमने उनके उस सिद्धान्त को अपना लिया और उसका नतीजा यह निकला कि 1947 से आज तक हम दोनों गालों पर कई बार थप्पड़ खा चुके हैं। बापू के अहिंसात्मक सिद्धान्त को हमने इतनी गम्भीरता से लिया कि हम कब नपुसंक हो गए यह हमें अभीतक समझ ही नहीं आया। हम शठे शाठ्यम समाचरते के नियम को भूल गए और हर बार थप्पड़ खाकर अपना गाल आगे करते गए। जिसके कारण पाकिस्तान जैसा दो कौड़ी का मुल्क जिसकी हमारे सामने कोई औक़ात न थी उसने भी हम पर कई बार हमला बोल दिया। 1948 से लेकर आज तक हम अपने वीर जवानों और भाई-बहनों की आहुति इस "गांधीवादी अहिंसात्मक यज्ञ" में चढ़ा चुके हैं।  इंग्लिश में एक कहावत है "अटैक इज द बैस्ट डिफेंस" अर्थात आक्रमण ही सबसे अच्छी रक्षात्मक रणनीति है। परन्तु बापू ने तो हमें रक्षात्मक रहना भी नहीं सिखाया, उन्होंने तो केवल पिटना सिखाया। हम आक्रमण तो छोड़िए अब तो हम रक्षात्मक होना भी भूल गए। कभी चीन, कभी पाकिस्तान और अब तो नेपाल जैसा देश जिसको कल तक हिन्दुराष्ट्र का दर्जा मिला हुआ था ...

केवल जेहादी और माओवादी ही सेना औऱ सरकार पर आक्षेप लगा रहे हैं

मेरे कुछ मित्र जानना चाहते हैं कि जब हमारे प्रधानमंत्री महोदय कहते हैं कि भारत-चीन बॉर्डर पर कोई दिक्कत नहीं है तो आखिर किस कारण से हमारे 20 सैनिक शहीद हो गए आखिर विवाद क्या और क्यों है? मैं ऐसे तमाम लोगों को बताना चाहता हूं कि- विवाद इस बात का है कि कोरोना के कारण चीन में लगभग 1 करोड़ लोग मारे गए हैं, चीन में उईगर मुस्लिम समुदाय के लोगों को ग़ुलाम बनाकर रखा जा रहा है, चीन विश्व में पहले नम्बर की महाशक्ति बनना चाहता है, पाकिस्तान और नेपाल सरकारों ने चीन के समक्ष घुटने टेक दिए हैं, पाकिस्तान तो पूरी तरह से चीन का गुलाम बन चुका है, इमरान खान चीन का वफ़ादार कुत्ता बन गया है और उसके सारे मंत्री-सन्तरी चीनियों के समक्ष दुम हिलाते घूमते हैं। 1962 में जिस प्रकार तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने चीन के समक्ष आत्मसमर्पण सा कर दिया था, और हमारी 43000 वर्ग किमी भूमि को कब्ज़ा लिया था और उन्हीं कांग्रेसियों के आकाओं के परिवार के लोग जिस प्रकार से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ MOU मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग का एग्रीमेंट बनाकर आये थे और वामपंथी जो कि चीन के मानसिक ग़ुलाम हैं, खाते हमारा हैं और गा...

क्या आप जानते हैं कि "पंडित" कौन है?

अक्सर हम लोग एक शब्द सुनते हैं "पंडित जी"। परन्तु क्या हम जानते हैं कि पंडित कौन है?  दरअसल *पंडित काव वास्तविक अर्थ है विद्वान, स्कॉलर, बुद्धिजीवी अथवा किसी विषय विशेष में पारंगत होना। महात्मा विदुर ने पंडित अर्थात बुद्धिजीवी और मूढ़ चित्त अर्थात मूर्ख के जिन गुणों-अवगुणों का बखान किया है, वह मैं आपके समक्ष रखता हूँ-* पंडित अर्थात बुद्धिजीवी के लक्षण- *1. जो अच्छे कर्मों का सेवन करता है और बुरे कर्मों से दूर रहता है, साथ ही जो आस्तिक और श्रद्धालु है वह पंडित है।* *2. जो किसी विषय को देर तक सुनता है किंतु शीघ्र ही समझ लेता है और उसे समझकर कर्तव्य बुद्धि से पुरुषार्थ में प्रवृत्त होता है, कामना से नहीं, अर्थात जो केवल अपने कर्म पर ध्यान करता है और फल की इच्छा नहीं करता वही पंडित है।* *3. जो व्यक्ति बिना पूछे किसी दूसरे के विषय में कोई बात नहीं कहता अर्थात बिना मांगे सलाह न देना, पंडित की पहचान है।* *4. जो पहले निश्चय करके फिर कार्य का आरंभ करता है, कार्यों के बीच में नहीं रुकता, समय को व्यर्थ नहीं जाने देता और चित्त को वश में रखता है वह पंडित है।* *5. जो तर्क में नि...