आजकल मूर्तिपूजा को लेकर कई आपत्तिजनक बयान आ रहे हैं, जिसे देखो मुहं उठाकर मूर्तिपूजा और मूर्तिपूजकों के ख़िलाफ़ बोलना शुरू कर देता है और पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ हमारी सरकारें भी उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नाम देकर पल्ला झाड़ देते हैं। क्या यह सनातन धर्म और मूर्तिपूजकों की आस्था और उनकी श्रद्धा का खुला अपमान नहीं है? अभी हाल ही में एक राष्ट्रीय चैनल के एक पत्रकार ने ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को लेकर कोई टिपण्णी कर दी थी जिसे लेकर उनके मानने वालों में खूब रोष देखने को मिला था और उन पत्रकार महोदय की गिरफ्तारी की मांग भी उठी थी। इससे पहले भी कई बार इस प्रकार की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें एक-दो लोगों को धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाने के नाम पर कत्ल भी कर दिया गया। जिसमें एक प्रमुख नाम हुतात्मा कमलेश तिवारी का भी है। *प्रश्न यह नहीं कि मूर्ति पूजा का विरोध कौन कर रहा है, बल्कि प्रश्न यह है कि उन्हें विरोध करने की खुली छूट कौन और क्यों दे रहा है? प्रश्न यह भी है कि श्रीराम मंदिर को मुद्दा बनाकर दो बार पूर्ण बहुमत से सत्ता प्राप्त कर चुकी भाजपा भी मूर्तिपूजा के विरोधियो...
The Intellectual | The Spiritual | The Creative