हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर से जुड़े कई विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए तालिबान का जिक्र किए बिना कहा था कि "आतंक की सत्ता स्थायी नहीं रहती"।
प्रधानमंत्री श्री मोदी का यह कथन ठीक ऐसे समय में आया है जबकि तालिबानी आतंकियों ने क्रूरता और आतंक की समस्त सीमाओं को लांघते हुए अफगानिस्तान पर अपना कब्ज़ा जमा लिया है और अपनी ही सरकार बनाने की घोषणा भी कर दी है।
मोदी जी ने आगे कहा कि- *"भगवान सोमनाथ का मंदिर आज भारत ही नहीं, पूरे विश्व के लिए एक विश्वास है। जो तोड़ने वाली शक्तियां है... जो आतंक के बलबूते सामर्थ्य खड़ा करने वाली सोच है... वह किसी कालखंड में कुछ समय के लिए भले ही हावी हो जाए लेकिन उसका अस्तित्व कभी स्थाई नहीं होता। वह ज्यादा दिनों तक मानवता को दबाकर नहीं रख सकतीं।"*
मोदी जी का यह सच तालिबान को कड़वा लग गया है। तालिबान के प्रमुख नेता शहाबुद्दीन दिलावर ने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए दावा किया है कि उसका संगठन सफल रहेगा। पीएम मोदी की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलावर ने कहा कि भारत जल्द देखेगा कि तालिबान देश को ठीक तरीके से चला सकता है।
लेकिन तालिबानी आतंकी यह भूल रहे हैं कि इराक का सद्दाम हुसैन हो या जर्मनी का हिटलर, औरंगजेब हो या जनरल डायर आतंक की सत्ता कभी किसी की स्थायी नहीं रही है।
दिलावर खान जैसे आतंकी यह भी भूल रहे हैं कि सत्ता हथियाना और सत्ता चलाना, दो अलग-अलग मसले हैं। हथियारों और आतंक के बल पर सत्ता तो हथियाई जा सकती है परन्तु उसे सुचारू रूप से चलाने के लिए रणनीतिक कौशल, कुशल नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है।
इतिहास साक्षी है कि तलवारों के बल पर दौलत और ताक़त तो हासिल हो जाती है लेकिन दिल नहीं जीते जा सकते। और राजनीति वही कर सकता है जो दिलों पर राज करना जानता हो।
तालिबानी नेता ने 'रेडियो पाकिस्तान' को दिए इंटरव्यू में भारत को यह भी चेतावनी दी कि अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों में दखल ना दिया जाए। लेकिन यह धमकी देते हुए तालिबानी नेता यह भूल गया कि यह भारत है, तुम्हारी खाला का घर नहीं कि जब चाहोगे धमका दोगे। यह वही कबायली हैं जिन्हें 1947 में भारत के शूरवीरों ने धूल चटा दी थी। तालिबानियों को यह समझ लेना चाहिए कि कुत्तों के भौंकने से हाथी नहीं डरा करते।
भारत के प्रधानमंत्री जी ने जो कुछ कहा वह केवल उनकी व्यक्तिगत राय नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारतवर्ष की देशभक्त जनता का आतंक और आतंकियों को कड़ा सन्देश है।
🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
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