सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

दिसंबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या कांग्रेस, ओवैसी और उnके चेले-चपाटों के पास हमारे इन सवालों के जवाब हैं

पूरा देश NRC और CAA को लेकर हिंसा और नफरत की आग में जल रहा है और सोशल मीडिया और वामपंथी चैनल उसमें झूठ और अफवाहों का घी डालकर उसे और भड़का रहा है. विपक्षी दल उस आग पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं. लेकिन क्या किसी के पास हमारे निम्न सवालों के जवाब हैं- १.        पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे मुल्कों में जो हिन्दू बसे हैं, वह न तो ब्राह्मण हैं, न बनिये और न ठाकुर, वह दलित वर्ग के हैं या सिख हैं. तो क्या विपक्ष हमारे दलित और सिख भाइयों को यूँ ही मरने के लिए छोड़ देना चाहता है? २.        क्या कारण है कि कांग्रेस ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को आज तक लागू नहीं करने दिया? जबकि उसमें साफ शब्दों में लिखा है कि हिन्दुस्तान में मुसलमानों की आर्थिक और सामाजिक हालात दलितों से भी बदतर है. ३.        पुरे विश्व में भारत एक ऐसा देश है जहाँ मुसलमानों की जनसंख्या दुसरे नम्बर पर आती है. यहाँ करीब ३० करोड़ मुसलमान हैं उसके बावजूद वह अल्पसंख्यक कहलाता है और उसको सारे लाभ मिलते हैं. क्या भारत में...

“हिंदी-हिन्दू-हिंदुत्व” का विरोध गाँधी परिवार के DNA में है

  जवाहर लाल नेहरु ने कहा था “ मैं शिक्षा से ईसाई हूँ, संस्कृति से मुसलमान और दुर्भाग्य से हिन्दू हूँ”. यानि राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा के दादा और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जोकि अपने नाम से पहले “पंडित” करते थे, उन्होंने अपने हिन्दू होने को दुर्भाग्यशाली ठहराया था. आजादी के बाद जब वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मन्दिर के दोबारा निर्माण की कोशिश शुरू की तो जहाँ एक ओर महात्मा गाँधी ने इसका स्वागत किया था, वहीँ दूसरी ओर जवाहरलाल नेहरु ने लगातार उस निर्णय का विरोध किया था. जब तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मन्दिर गए तो नेहरू ने न केवल उन्हें जाने से मना किया गया और विरोध भी दर्ज कराया था. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में “हिन्दू” शब्द पर भी जवाहरलाल नेहरू को घोर आपत्ति थी और उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय पर भी नेहरू ने युनिवर्सिटी से हिन्दू शब्द हटाने के लिए भी दबाव डाला था. लेकिन नेहरू ने कभी अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी में “मुस्लिम” शब्द रखने पर खभी आपत्ति नहीं की थी.  ७ नवम्बर १९६६ को दिल्ली में हजारों भगवाधारी, निहत्थे और निर्दोष साधू-संतों पर...

सांप खतरनाक नहीं होता, खतरनाक तो उसका जहर होता है

NRC और CAA के विरोध की आड़ में पूरे देश में आगजनी, तोड़फोड़, हिंसा और पत्थरबाजी की घटनाएँ हुईं जिसमें कई लोगों की मौत हो गई और सैंकड़ों लोग जिसमें पुलिसवाले भी शामिल हैं अभी भी घायल हैं, जिनमें से कईयों की हालत अभी भी गम्भीर बनी हुई है. खुफिया विभाग की रिपोर्ट्स के अनुसार इन हिंसात्मक आंदोलनों के पीछे जिन लोगों का हाथ बताया जा रहा है उनमें प्रमुख नाम पौपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया का नाम सामने आ रहा है. मीडिया के अनुसार खबरें मिल रही हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार PFI यानि पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया पर प्रतिबन्ध लगाने की तैयारी कर रही है. एक लम्बे समय से भाजपा और संघ सहित कई हिन्दू सन्गठन PFI यानि पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया नामक संगठन पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग कर चुके हैं. उनकी दलील है कि यह तमाम और कामों के अलावा धर्मांतरण और आईएसआईएस जैसे खूंखार आतंकी संगठनों में देश के नौजवानों को भर्ती करवाने का काम करती है. दरअसल भाजपा और संघ विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने वाले कांग्रेसी और वामपंथी दल इसकी हमेशा से पैरोकारी करते रहे हैं जिसके कारण केरल में आज तक इसपर प्रतिबन्ध नहीं लग पाया है. लेकिन सवाल यह है कि क्या ...

बहुसंख्यक वर्ग भले ही बुलेट का जवाब बुलेट से न दे रहा हो लेकिन बैलेट से जरूर देगा

महात्मा गाँधी ने विभाजन के बाद की परिस्थितियों को देखने के बाद कहा था कि “पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू और सिख हर नजरिये से भारत आ सकते हैं, अगर वे वहां निवास करना नहीं चाहते हैं. उन्हें नौकरी देना और उनके जीवन को सामान्य बनाना भारत सरकार का पहला कर्तव्य है.” १९४७ में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में शरणार्थियों को नागरिकता देने सम्बन्धी आशय प्रस्तावित किया गया. कांग्रेस द्वारा १९४७ से २००३ तक उन समस्त शरणार्थियों को नागरिकता देने का वायदा किया जाता रहा जो दुसरे देशों में धार्मिक प्रताड़ना के शिकार होते रहे. नागरिकता संशोधन कानून नेहरु-लियाकत समझौता १९५० की भावना के भी अनूकूल है. पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनमोहन सिंह ने वाजपेयी सरकार में उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से सदन में आग्रह किया था कि पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक समुदायों के शरणार्थियों को नागरिकता दी जाये. देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सहित केंद्र व राज्य सरकारों के नेताओं और उच्च प्रशासनिक अफसरों की तमाम दलीलों और अपीलों के बावजूद भी हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है...

मजहब ही सिखाता है आपस में बैर रखना- सम्प्रदायवाद ही धर्म का राजनीतिक व्यापार है

सर सय्यद अहमद खान ने भी कहा था- “सच्चा धर्म महज नैतिक मूल्यों का मुख्य सिद्धांत के बतौर प्रतिपादन करता है और कभी-कभी ही इस दुनिया की समस्याओं पर विचार करता है.”  अल्लामा इक़बाल ने कहा था “मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना.” हालाँकि बाद में इन्हीं इक़बाल ने इस्लाम को सर्वश्रेष्ठ धर्म, मुसलमान को सर्वश्रेष्ठ मानव और इस्लामी बन्धुत्व को राष्ट्रीयता का श्रेष्ठतम रूप बताया था. आजकल धार्मिक स्वतंत्रता और धर्म-निरपेक्षता जैसे शब्दों की आड़ में जिस प्रकार इस देश की एकता, अखंडता और संस्कृति को आघात पहुँचाया जा रहा है, धार्मिक उन्माद फैलाया जा रहा है, सडकों पर हिंसा, आगजनी और सरकारी सम्पत्ति को सीधा निशाना बनाया जा रहा है. ये लोग कौन हैं? क्या यह धार्मिक हैं या साम्प्रदायिक? धर्म शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत व्याकरण के “निरुक्त” के अनुसार “धृ” धातु से हुई है, जिसका तात्पर्य होता है- “ धारण करना. जो नियम, साधुता, भक्ति, न्याय, कर्तव्य और व्यवस्था को धारण करता है वही धर्म कहलाता है. नैतिक मूल्यों का आचरण ही धर्म है. धर्म वह पवित्र अनुष्ठान है, जिससे चेतना का शुद्धिकरण होता है. ” महर्षि ...

मुसलमान और हिन्दू कभी भी भाई-भाई नहीं हो सकते लेकिन.........

तुम्हें गर शौक बिजलियाँ गिराने का, हमारा काम भी है आशियाँ बसाने का. सुना है आप हैं माहिर हवा चलाने में, मगर हमें भी हुनर है दिए जलाने का. आज भारत में कुछ विपक्षी दल जिन्ना की उस थ्योरी से सहमत हो सकते हैं जो १९४० ईसवी के मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में अपने अध्यक्षीय भाषण में मौहम्मद अली जिन्ना ने कहा था- “मुसलमानों और हिन्दुओं के धार्मिक मंतव्य, सामाजिक संगठन, रीति-रिवाज, रहन-सहन, खानपान, साहित्यक व सांस्कृतिक परम्पराएँ सब एक-दूसरे से भिन्न हैं. न उनमें परस्पर विवाह होता है, न खाना-पीना. वस्तुतः हिन्दू और मुस्लिम सभ्यताएं आधारभूत रूप से एक-दुसरे से भिन्न हैं. दोनों सभ्यताओं का आधार परस्पर विरोधी विचारों और मान्यताओं पर है. हिन्दू और मुसलमान इतिहास की भिन्न-भिन्न धाराओं से प्रेरणा लेते हैं. उनकी कथाएं अलग हैं और साहित्य अलग हैं, महापुरुष अलग हैं और साहित्य अलग हैं. एक के लिए जो वीर व शहीद है, दुसरे के लिए वह शत्रु है. एक की विजय दूसरे की पराजय है.” लेकिन दूसरी ओर इस देश में कुछ लोग मौलाना अबुल कलाम आजाद के उस वक्तव्य से भी सहमत होंगे जिसमें उन्होंने कहा था- “मैं म...

क्या कांग्रेस ने इस देश की और सपा ने प्रदेश की सुपारी ले रखी है

सम्पूर्ण भारत में धर्मनिरपेक्षता के पैरोकार और शांतिदूत हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ कर रहे हैं. लेकिन बड़े आश्चर्य की बात है कि बात-बात पर धर्मनिरपेक्षता, संविधान और मानवाधिकारों की दुहाई देने वाले विपक्ष के नेता लगातार भड़काऊ बयानबाजी कर रहे हैं. कश्मीर में धारा ३७० का विरोध करने वाली कांग्रेस एनआरसी और नागरिकता संशोधन विधेयक का भी विरोध करने में लगी है और लगातार पाकिस्तान की भाषा बोल रही है. गोडसे और सावरकर का विरोध करने वाले राहुल गाँधी और उनकी बहन प्रियंका वाड्रा लगातार उप्रदवियों और दंगाइयों के पक्ष में धरने दे रहे हैं. उधर समाजवादी पार्टी भी प्रदेश में पूरी तरह से आग में घी डालने का कार्य कर रही है. एक नेता जी जो अपने बाप के नहीं हुए वह देश के क्या होंगे। ऐसा लग रहा है कि मानो कांग्रेस ने देश की और समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की सुपारी उठा रखी हो, जाहिर है जिस तरह की भाषा कांग्रेसी और समाजवादी पार्टी बोल रही है और कुकृत्यों को अंजाम दे रही है वह कोई सुपारी किलर ही दे सकता है. सुपारी देने वाले उनके पाकिस्तानी आका जो भाषा बोल रहे हैं ठीक वही भाषा अक्षरक्षः ये लोग दोहरा रहे हैं....

कांगेस पूरी तरह से नंगी होकर सड़क पर उतर चुकी है- राहुल गाँधी जिन्ना और कांग्रेस मुस्लिम लीग बन चुकी है

राहुल गाँधी जिन्ना की भूमिका निभा रहे हैं और उनकी बहन प्रियंका वाड्रा नेहरु के पदचिन्हों पर चल रही हैं. खुद कांग्रेस मुस्लिम लीग की भूमिका निभा रही है. राहुल गाँधी कभी सावरकर तो नहीं बन सकते लेकिन जिन्ना बनने की कोशिश में जरूर लगे हैं.  १९४७ में इस देश का बंटवारा करने वाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने जामिया में हुई हिंसा पर कल कहा कि "नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध देशवासी कर रहे हैं". जबकि सच्चाई यह है कि नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध केवल और केवल देशविरोधी कर रहे हैं. आज प्रियंका वाड्रा उर्फ़ प्रियंका गाँधी खुद इंडिया गेट पर पत्थरबाजों के समर्थन में धरना देकर बैठी थीं.  प्रश्न यह है कि जो लोग महात्मा गाँधी को अपना ब्रांड एम्बेसडर बताते हैं, जो गाँधी के आदर्शों पर चलने की बातें करते हैं वह पत्थरबाजी और पत्थरबाजों की हिमायत में कैसे खड़े हो जाते हैं?    एक और महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी है कि आखिर क्या कारण है कि कश्मीर में छात्र और छात्राएं हमारी भारतीय सेना पर पत्थर चलाते थे और अब जामिया मिलिया इस्लामिया, अलीगढ़ और जेएनयू के कु...

JNU अर्थात "ज़िहाद निर्माण यूनिवर्सिटी" में आये दिन प्रोटेस्ट के नाम पर गुंडागर्दी क्यों हो रही है

लव जिहाद की अवैध सन्तानों द्वारा JNU अर्थात "ज़िहाद निर्माण यूनिवर्सिटी" में आये दिन प्रोटेस्ट के नाम पर गुंडागर्दी हो क्यों हो रही है। कोई नहीं जानता कि #Congress और वामपंथी सरकारों ने इन गुंडों को क्यों पाल रखा था। अब जबकि #bjp सरकार ने इन आवारा और बेलगाम सांडों के मुहं में लगाम लगाने की पूरी तैयारी कर ली है, तब इन हरामखोरों और नशाखोरों को कौन लोग शह दे रहे हैं, यह जानना और समझना कोई विशेष बात नहीं है। दरअसल इन हरामखोरों को उन लोगों ने पाल रखा है जो केवल भारतीय संस्कृति और सभ्यता के दुश्मन ही नहीं बल्कि वह इस देश की एकता, अखण्डता और सम्प्रभुता के विरुद्ध हमेशा से षड्यंत्र रचते रहे हैं। १९९९ में भी जे एन यू के छात्रों ने गुंडागर्दी करते हुए वाइस चांसलर को घेर लिया  था. साल में २००८ में जे एन यू के छात्रों ने देश की सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश को भी मानने से इंकार कर दिया था.  साल २०१४ में जे एन यू के छात्रों ने हिन्दुओं के देवी-देवताओं के विरूद्ध अपमानजनक बातें कही थीं. और महिषासुर शहादत दिवस मनाया था. साल २०१६ में जे एन यू के छात्रों ने अफजल गुरु की बरसी म...

भारत सरकार बताये कि आखिर आज तक कितनी हिन्दू बेटियों के साथ मुसलमानों ने बलात्कार किया है- स्वामी यति नरसिंहानन्द सरस्वती

स्वामी यति नरसिंहानन्द सरस्वती ने २ दिसम्बर २०१९ को एक वीडियो के जरिये ये दावा किया था कि हैदराबाद बलात्कार के तीन आरोपी नाबालिग थे, इसलिए पुलिस द्वारा दिए गए इनके हिन्दू नाम काल्पनिक हैं. उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा  कि सभी आरोपी एक धर्म विशेष के हैं. उन्होंने इस वीडियो में भारत सरकार से यह सवाल भी उठाया है कि आज तक आखिर कितनी हिन्दू बेटियों के साथ मुसलमानों ने बलात्कार किया है? उन्होंने सरकार और प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा किया है.उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. देखिये  उनका यह वीडियो- उधर एशिया नेट न्यूज़ हिंदी नामक वेबसाइट ने यह दावा किया है कि यति नरसिंहानन्द सरस्वती द्वारा किया गया दावा पूरी तरह से झूठा है. इस वेबसाइट का कहना है कि हैदराबाद कांड के चारों आरोपी बालिग हैं इसलिए उनका काल्पनिक नाम होना या लिखने का कोई औचित्य ही नहीं बनता. इस वेबसाइट का यह भी दावा है कि हैदराबाद पुलिस ने सभी आरोपियों के नाम, उम्र और उनके परिवारों की जानकारी साझा की है. जिसमें केवल एक आरोपी आरिफ पाशा ही मुस्लिम था बाकि अन्य सभी आरोपी हिन्दू थे. वेबसाइट के ...

स्वामी विवेकानंद के अनुसार “लक्ष्य के अभाव में हमारी ९९ प्रतिशत शक्तियाँ इधर-उधर बिखरकर नष्ट होती रहती हैं

युवा ह्रदय सम्राट स्वामी विवेकानंद कहते हैं- “बालकों तुम दृढ़ बने रहो, मेरी संतानों में से कोई भी कायर न बने. तुम लोगों में जो सबसे अधिक साहसी है सदा उसी का साथ करो. बिना विघ्न बाधाओं के क्या कभी कोई महान कार्य हो सकता है, धैर्य तथा अदम्य इच्छा-शक्ति से ही कार्य हुआ करता है. मैं तो लोहे के सदृश दृढ़ इच्छा-शक्ति सम्पन्न हृदय चाहता हूँ जो कभी कंपित न हो. दृढ़ता के साथ लगे रहो, ईश्वर तुम्हें आशीर्वाद दे. हे युवाओं! तुम उस सर्वशक्तिमान की संतानें हो. तुम उस अनंत दिव्य अग्नि की चिंगारियां हो.” वह कहते हैं- “हर आत्मा मूलरूप में देवस्वरूप है और लक्ष्य इस दिव्यता को जगाना है ( Each soul is potentially divine and the goal is to manifest this divine) ”. स्वामी विवेकानंद के अनुसार “लक्ष्य के अभाव में हमारी ९९ प्रतिशत शक्तियाँ इधर-उधर बिखरकर नष्ट होती रहती हैं. अध्यात्मिक आदर्श के अभाव में हम अपनी अंतर्निहित दिव्यता एवं पूर्णता को भुलाकर देह-मन तक ही अपना परिचय मान बैठते हैं. हमारे समस्त दु:खों, कष्टों और विषादों का मूल कारण यह आत्मविस्मृति ही है. यह अज्ञान ही सब दुःख-बुराइयों की जड़ है. इसी कारण ...

*ऐसी शिक्षा होगी तो महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की गारंटी कैसे दी जा सकती है*

विद्यालय शिक्षा का मंदिर होते हैं, जहां पर विद्यार्थियों को शिक्षा के माध्यम से सदाचार और नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाता है, ताकि वह एक आदर्श समाज की स्थापना कर सकें।  चरित्र निर्माण में शिक्षा की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है और इसीलिए यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि हम आज की पीढ़ी को किस प्रकार की शिक्षा दे रहे हैं, और कम से कम भारतीय संस्कृति और सभ्यता में तो शिक्षा को ही एकमात्र विकल्प माना जा सकता जो समाज में शान्ति,  सदाचार और सामंजस्य स्थापित कर सके। लेकिन यदि हमारी शिक्षा ही  व्यभिचार और अनैतिकता का पाठ पढ़ाएगी तो समाज में विकृति ही फैलेगी। ऐसे समाज में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की गारंटी कैसे दी जा सकती है। कल एक दैनिक राष्ट्रीय समाचार-पत्र में छपे एक समाचार के अनुसार चौधरी चरण सिंह विश्विद्यालय में बीए प्रथम वर्ष के अंग्रेजी पाठ्यक्रम में जिन कहानियों को शामिल किया गया है वह भारतीय संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने में पूर्णतया सहायक सिद्ध होंगी। अखबार के अनुसार इस पाठ्यक्रम में कुछ ऐसी कहानियों को शामिल किया गया है जो युवाओं को व्यभिचार और अनैतिक सम्...

युवापीढ़ी भटकाव और विषमताओं के गर्त से निकलकर उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर हो

Adv. अल-इक़बाल मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, फीना तिराहा, सराय रफ़ी, चांदपुर जिला बिजनौर(उ.प्र), फोन: 01345-223786, Mobile : 7464857095 </!doctype> महोदय,     किसी भी राष्ट्र के सुदृढ़ भविष्य की नींव युवाशक्ति के सुदृढ़ कंधों के अवलम्बन पर टिकी होती है. भावी सपनों के सुपरिणाम उसके पौरुष और पराक्रम के बीच से होकर पुष्पित-पल्लवित होते हैं. युवाशक्ति के श्रमसींकरों से निकलकर कोई राष्ट्र उत्कर्ष की सीढियाँ चढ़कर बलवान बनता है, परन्तु इसके साथ ही राष्ट्र के निति-नियंताओं का भी यह कर्तव्य बनता है कि वह ऐसी नीतियों का प्रतिपादन करें ताकि युवापीढ़ी का मार्ग प्रशस्त हो. बेरोजगारी और भुखमरी की मार से त्रस्त युवावर्ग आज किंकर्तव्यविमूढ़ता की स्थिति में फंसा हुआ है. पढ़-लिखकर भी आज उसे अपना मार्ग दिखाई नहीं पड़ता है. रोजगार की खोज में वह गांवों को विस्मृत कर शहरों की ओर निरंतर पलायन कर रहा है. नशाखोरी, जुआ, चोरी और अवैधानिक गतिविधियाँ उसके जीवन में बड़ी तेजी के साथ स्थान बनाती जा रही हैं. सरकार इन विषम परिस्थितियों से चिंतित होकर ऐसे प्रयास कर रही है ताकि युवापीढ़ी भटकाव ...