उत्तर प्रदेश राजनीति में “MY समीकरण” — यानी Muslim + Yadav — तीन दशकों से समाजवादी पार्टी की चुनावी रीढ़ माना गया है। 2024 लोकसभा में यह समीकरण चट्टान की तरह SP-कांग्रेस गठबंधन के साथ खड़ा रहा। दूसरी ओर 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा दोनों चुनावों में भाजपा का वोटबैंक बड़े पैमाने पर गैर-यादव OBC, गैर-जाटव SC, उच्च जातियाँ और लाभार्थी वर्गों में मज़बूत रहा। अब 2025 बिहार परिणाम ने यह प्रश्न और तीखा कर दिया है: 👉क्या भाजपा 2027 में उत्तर प्रदेश का चुनाव मुस्लिम+यादव पर आंशिक भरोसे के साथ लड़ सकती है? या 👉भाजपा को इन दोनों समुदायों को केवल “incremental swing groups” की तरह ही ट्रीट करना चाहिए? यह लेख इसी प्रश्न का विस्तृत, डेटा-चालित और निष्पक्ष विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. बुनियादी गणित: यूपी में मुस्लिम + यादव कितना बड़ा ब्लॉक? उपलब्ध जनसांख्यिकीय अनुमान के आधार पर: मुसलमान आबादी में हिस्सा लगभग 19–20% के आसपास ( 2011 जनगणना के अनुसार 19.3%) यादव (OBC के भीतर) अलग से जनगणना नहीं है, पर ज़्यादातर अकादमिक/राजनीतिक अनुमान इन्हें 9–11% के बीच मानते हैं। यानि कुल मिलाकर लगभग 28–30% वोट...
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