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जुलाई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

इतिहास साक्षी है कि अहंकार ने हमेशा सत्ताओं की बलि ली है

क्षत्रिय का परम कर्तव्य है कि वह ब्राह्मण और ब्राह्मणत्व की रक्षा करे, क्षत्रिय के लिए ब्रह्महत्या मानो गऊ हत्या समान है। एक बार महाराज धृष्टर्राष्ट्र के दरबार में चार अपराधी आये, जिसमें एक ब्राह्मण, दूसरा क्षत्रिय, तीसरा वैश्य और चौथा शुद्र था, चारों ही एक हत्या के अपराधी थे। जब न्याय की बात आई तो पहले दुर्योधन को अवसर दिया गया, अहंकारी और सत्ता के मद में चूर दुर्योधन ने चारों अपराधियों को मृत्युदंड का निर्णय सुना दिया। परन्तु जब धर्मराज युधिष्ठिर से पूछा गया तो उन्होंने ब्राह्मण को सबसे कठोर दंड दिया परन्तु मृत्युदंड देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि ब्राह्मण की हत्या नहीं की जा सकती है। नन्दवंशी राजा घनानंद को अपनी सत्ता और सम्पदा पर बहुत अहंकार था, उसने कभी ब्राह्मणों का सम्मान नहीं किया, और उसी अहंकार के चलते उसने आचार्य चाणक्य का भी भरे दरबार में अपमान किया था, क्योंकि उसे लगता था कि निहत्थे, कमज़ोर और हमेशा पठन-पाठन में लगे रहने वाले ब्राह्मण भला उसका क्या बिगाड़ सकते हैं। परन्तु परिमाण उसकी सोच के ठीक विपरीत आया जो कि सर्वविदित है। अहंकार तो महाराज रावण, कंस, हिरण्यक...

स्वंयभू गांधीवादियों ज़रा हमारी भी सुन लो

जो लोग हमें गोड़सेवादी कहते हैं और अपने आपको  गांधीवादी, मैं उन समस्त स्वयम्भू गांधीवादियों से पूछना चाहता हूं कि- 👉🏽 गाँधीजी अहिंसावादी थे, लेकिन आप तो आतंकियों के लिए छाती पीटते हैं, उन्हें क्रांतिकारी बताते हैं, खुलेआम सड़कों पर पत्थरबाजी और आगज़नी करते हैं, अफ़ज़ल गुरु और कसाब आपके आदर्श हैं, ऐसा क्यों? 👉🏽 गांधीजी राष्ट्रपिता थे, और आप सीधे-सीधे राष्ट्रविरोध करते हैं, आप अपने राष्ट्र का ही सम्मान नहीं करते, तो राष्ट्रपिता का क्या सम्मान करेंगे? 👉🏽 आप कहते हैं कि हमें गाँधीजी ने इस देश में रोका था, मतलब अगर गाँधीजी आपको न रोकते तो आप सीधे पाकिस्तान चले जाते, मतलब आपको इस देश से कोई मौहब्बत नहीं थी, केवल गाँधीजी के कहने मात्र से आप इस देश में रुक गए, तब आप देशभक्त कैसे हुए? 👉🏽 गाँधीजी ने हमेशा सत्य का साथ दिया और आप तो झूठ और फरेब की चलती-फिरती दुकान हैं, तब आप गांधीवादी कैसे हुए? 👉🏽 गांधी जी हमेशा रघुपति राघव राजा राम.....अर्थात रामधुन गाते थे, और उनके अंतिम शब्द भी "हे राम" थे, लेकिन आपने तो श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आपने तो श्रीराम मंदिर को बन...