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नवंबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

*नाथूराम गोडसे को देशद्रोही कहने वालों, पहले अपने गिरेबाँ में झांककर तो देख लो*

नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने पर हंगामा कौन कर रहा है? वह लोग जो आतंकियों के नाम के साथ भी "जी" लगाकर सम्बोधित करते हैं, वह लोग जो जिन्ना को देशभक्त बताते हैं, वह लोग जो विदेशी आक्रमणकर्ताओं को समाज उद्धारक बताकर उनका महिमामंडन करते हैं, वह लोग जो आक्रमणकारी और अय्याश अकबर को महान बताते हैं, वह लोग जो अपने को बाबर का वंशज कहते हैं, वह लोग जो बाबर, हुमायूं, तुगलक जैसे आक्रमणकर्ताओं के नाम पर सड़कें और संस्थान बनवाते हैं, वह लोग जो अंग्रेजों के जाने के बाद भी अंग्रेजियत को नहीं छोड़ पाए, जो लोग आजतक शहीदे आजम भगत सिंह को "शहीद" का दर्जा नहीं दिला पाए, और तो और भगतसिंह को आतँकवादी बता दिया, जिन्हें "वन्देमातरम" बोलने पर एतराज़ है, जो लोग स्वामी श्रद्धानन्द, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जैसी महान विभूतियों की वीरगति पर मुहं में दही जमाकर बैठ गए, जिन लोगों ने सदैव अपनी ही सभ्यता, अपनी संस्कृति और अपने महापुरुषों का मज़ाक़ बनाया, जो ऋषि-मुनियों को भी अपशब्द कहने से नहीं चूकते, जिन्होंने भारत माता को डायन कहा, जिन्होंने कश्मीर की आज़ा...

*महाराष्ट्र महाभारत: क्या भाजपा के बुरे दिन शुरू हो गए हैं*

पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र में सत्ता के लिए जो महाभारत चल रहा था, उसमें लोकतन्त्र, संविधान, जनभावना, हिंदुत्व और राजनीतिक मूल्यों का बलिदान दिया गया है। दूसरे शब्दों में कहें तो उनकी हत्या की गई है और यह कहना कठिन है कि इस हत्या के लिये वास्तविक जिम्मेदार कौन है। अंतिम चक्र में जिस प्रकार से भाजपा ने नैतिकता, संविधान और हिंदुत्व को किनारे रखकर सत्ता प्राप्त करने का दुस्साहस किया उसका दुष्परिणाम मंगलवार को सबके सामने आ गया।  यह समझ से बिल्कुल परे है कि अपने आपको शतरंज का खिलाड़ी मानने वाले अमित शाह जैसे राजनीतिक धुरन्धर भी पटखनी खा गए। यह कैसी नासमझी है कि भाजपा कर्नाटक के नाटक से भी कुछ न समझ सकी।  शरद पवार राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं, उनसे बिना सलाह-मशविरा किये अजित पवार जैसा नौसिखिया उप-मुख्यमंत्री बना दिया गया। राकांपा शरद पवार की पार्टी है न कि अजित पवार की।  इस खेल में सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को ही हुआ, वह अपने वजीर (देवेंद्र फडणवीस) को बचाने के चक्कर में शरद पवार के प्यादे (अजित पवार) से मात खा गई।  दूसरे दृष्टिकोण से देखें तो रा...

*अधिक पढालिखा हिन्दू अपने ही धर्म का विरोध क्यों करने लगता है*

दुनिया के किसी भी दूसरे धर्म का व्यक्ति जितना पढ़-लिखकर विद्वान बनता जाता है, वह उतना ही अधिक अपने धर्म के प्रति निष्ठावान और जागरूक होता जाता है। वह न स्वयं जागरूक होता है वरन अपने ही जैसे दूसरे लोगों को भी जागरूक करने का प्रयास करता है। वह अपने धर्म की तमाम अच्छाइयों को दुनिया-समाज के समक्ष लाने का प्रयास करता है और अपने धर्म में फैली बुराइयों को ढककर रखते हुए उन्हें स्वयं ही दूर करने का प्रयास करता है।  किंतु इसके ठीक उलट हिन्दू धर्म के लोग जितना पढ़ते-लिखते रहते हैं, वह उतना ही अधिक अपने धर्म का विरोध करते हैं, वह न केवल अपने धर्मशास्त्रों और रीति-रिवाजों में बुराइयाँ ढूंढते हैं वरन उनको दुनिया-समाज के समक्ष लाकर उनका मख़ौल उड़ाने का कुत्सित प्रयास भी करते हैं। इतना ही परन्तु अपने महापुरुषों, पूर्वजों के बनाये हुए नियम-सिद्धान्तों में भी खोट निकालकर उन्हें गलत सिद्ध करने का षड्यंत्र भी लगातार रचते रहते हैं। एक मुस्लिम व्यक्ति वामपंथी होते हुए भी नमाज़ और रोजा नहीं छोड़ता लेकिन एक हिन्दू यदि वामपंथी बन जाता है तो वह सर्वप्रथम अपनी संस्कृति और संस्कारों को ही भूल जाता...

मोहन भागवत या मोदी कोई ईश्वरीय अवतार नहीं हैं

मैं बड़ी विनम्रता किंतु दृढ़तापूर्वक कहना चाहता हूं कि प्रत्येक हिन्दू समाज के व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और संघ संचालक परम् आदरणीय श्री मोहन भागवत कोई ईश्वरीय अवतार नहीं हैं, बल्कि हमारी-आपकी तरह से एक साधारण मनुष्य ही तो हैं। भाजपा कोई देवताओं की सभा नहीं है और न ही स्वयं सेवक संघ को ऋषि-मुनियों की मंडली माना जा सकता है। अतः हमारा धर्म, हमारी आस्था और धर्मशास्त्रों को कौन पढ़ाएगा, उसका ज्ञान कौन देगा और उसपर शास्त्रार्थ करने की अनुमति किसको दी जा सकती है, इसपर निर्णय करने का पूरा अधिकार हम सभी सनातनभक्तों और वैदिक लोगों को है। यह अधिकार किसी राजनीतिक संगठन अथवा किसी संगठन विशेष को नहीं दिया जा सकता। हमारे वेदों, उपनिषदों, संस्कारों, कर्मकांडों, हमारी संस्कृति और हमारे रीति-रिवाजों के विषय में उपदेश करने का अधिकार केवल और केवल उसी व्यक्ति को दिया जा सकता है जो हमारे धर्म का है, जिसने वेदों को न केवल पढ़ा है अपितु उसकी शिक्षा-दीक्षा को ह्रदय से अंगीकार किया है। वह प्रत्येक व्यक्ति जो गायत्री मंत्र को न केवल पढ़ना जानता है बल्कि गायत्री मं...