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जुलाई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शायद राहुल गांधी की याददाश्त बहुत कमज़ोर है

इजरायल की एक कम्पनी एनएसओ पेगासस को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें भारत के कई महत्वपूर्ण लोगों की जासूसी की बात कही गई थी। जिसमें श्री राहुल गांधी का नाम भी शामिल है। मीडिया सूत्रों के अनुसार इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि- "यह हथियार हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया गया है। हम इस मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे। इसका प्रयोग देशद्रोहियों और आतंकियों के ख़िलाफ़ होना चाहिए। नरेंद्र मोदी ने इसका प्रयोग लोकतंत्र के ख़िलाफ़ क्यों किया।" कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज लोकतंत्र और देशभक्ति की बात कर रहे हैं। कल तक "आतंकियों का साथ-आतंक का विकास" का नारा देने वाली कांग्रेस किस मुँह से नरेंद्र मोदी पर आरोप लगा रही है। क्या राहुल गांधी वह दिन भूल गए जब कश्मीर में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सैफुद्दीन सोज ने कहा था कि "उनका बस चलता तो वह आतंकी बुरहान वानी को जिंदा रखते।". क्या वह बताएंगे कि श्रीमति सोनिया गांधी ने बाटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के लिए रातभर आंसू बहाए थे? खुद राहुल गां...

इस हिसाब से तो महाराज रावण की मूर्तियां हर चौराहे पर लगवानी चाहिएं

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कानपुर के चौबेपुर स्थित ग्राम बरुआ में भगवान परशुराम मंदिर के भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. राजेंद्र नाथ त्रिपाठी पहुंचे थे। उन्होंने मंच से घोषणा की थी, कि " ब्राह्मण महासभा यूपी में प्रकाश शुक्ला और विकास दुबे की प्रतिमा स्थापित कराएगी। उन्होंने कहा कि जब फूलन देवी डकैत और ददुआ डकैत की प्रतिमा उनका समाज लगाता है, जो घोषित डकैत थे, तो जो ब्राह्मणों के महापुरुष और वीरता के प्रेरणा स्रोत हैं, उनकी प्रतिमा क्यों नहीं लग सकती है। पूरा ब्राह्मण समाज इसका समर्थन करता है। " हम बड़ी विनम्रता से श्रीमान त्रिपाठी जी से पूछना चाहते हैं कि अगर आपके कथनानुसार विकास दुबे और श्री प्रकाश शुक्ला जैसे गुंडे-माफिया ब्राह्मण समाज के महापुरुष और वीरता के प्रेरणास्रोत हैं इसलिए उनकी मूर्ति लगनी चाहिए तो प्रश्न यह है कि फिर लँकाधिपति महाराज रावण, उनके भैया कुम्भकर्ण और पुत्र मेघनाथ का पुतला दहन क्यों किया जा रहा है? महाराज रावण भी तो ब्राह्मण थे और उन जैसा विद्वान और महायोद्धा तो न कल था, न आज ...

क्या इस देश में सवर्ण और पुरुष होना एक अपराध है

कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि मानो इस देश में सवर्ण और पुरुष होना दोनों ही एक अपराध हैं। इस देश में दो तरह के आयोग गठित होना परम आवश्यक हैं, पहला "सवर्ण आयोग" और दूसरा "पुरुष आयोग"। सवर्ण आयोग अर्थात जहां सवर्ण समाज की समस्याओं और शिकायतों को गम्भीरता पूर्वक सुना और समझा जा सके। सवर्ण समाज केवल ब्राह्मण, वैश्य और राजपूत ही नहीं है बल्कि शेख़, सैयद, मुगल और पठान भी सवर्णों की श्रेणी में ही आते हैं। इस आयोग को यह भी तय करने का अधिकार होगा कि सवर्ण समाज को कितना प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए अथवा नहीं मिलना चाहिए। एससी-एसटी एक्ट की निष्पक्ष जांच में सवर्ण आयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए।  इसके अतिरिक्त दूसरा "पुरुष आयोग" गठित होना चाहिये जो कि भारतीय पुरुष समाज की समस्याओं, शिकायतों और उनके बेहतर विकास के लिए हरसम्भव प्रयास कर सके।  हमारा मानना है कि इस देश में सबसे अधिक यदि कोई मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित होता है तो वह पुरुष समाज ही है।  इसका सबसे ताज़ातरीन उदाहरण है सोशल मीडिया पर सबसे अधिक ट्रेंड करने वाला हैशटैग me too. जिसमें देश...

भेड़िया अगर भेड़ की खाल पहन भी ले तो भी.....

एक पंडित जी के घर एक छोटी सी बच्ची आई जिसने पंडित जी को एक प्लेट में खीर दी, पंडित जी ने उस बच्ची से पूछा कि - बेटे, आज ये खीर किस खुशी में लाई हो? बच्ची बड़ी मासूमियत से बोली कि पंडित जी, इस खीर में कुत्ता मुहं मार गया था, इसलिए मम्मी ने कहा कि जाओ यह खीर पंडित जी को दे आओ, वह इसे अपने मंत्रों से पवित्र कर देंगे। पंडित जी को बहुत क्रोध आया उन्होंने उस खीर से भरी प्लेट को फर्श पर पटक दिया, प्लेट टूट गई। प्लेट के टूटते ही वह बच्ची दहाड़ मारकर रोने लगी। पंडित जी क्रोध में लालपीले होते हुए बोले- तू क्यों रो रही है। धर्म तो मेरा भ्रष्ट हुआ है। बच्ची बिलखते हुए बोली, पंडित जी इस प्लेट में मम्मी मेरी गन्दगी फेंकती थीं, अब मैं नई प्लेट कहाँ से लाऊंगी। ठीक यही स्थिति उत्तरप्रदेश के ब्राह्मणों की है। आज लगभग प्रत्येक पार्टी अपनी गन्दगी ब्राह्मणों को परोसना चाहती है, ताकि ब्राह्मण उनके दुष्कर्मों, अपराधों और दुराचरण को क्षमा कर उन्हें पवित्र बना दें। यह वही राजनीतिक दल और संगठन हैं जिनकी नींव ही ब्राह्मण विरोध पर रखी गई थी। औरंगज़ेब और बाबरभक्तों को शांतिदूत बताने वाले और उन मुस्लिम आक्...

मिस्टर ओवैसी, हिंदुत्व समझना आपके बस की बात नहीं है

आधुनिक मुस्लिम लीग के जन्मदाता और "आज के जिन्ना" माने जाने वाले जनाब असदुद्दीन ओवैसी साहब का कहना है कि - "मुस्लिम विरोधी नफरत का आदि है संघ, आधुनिक भारत में हिंदुत्व की कोई जगह नहीं है".  असदुद्दीन ओवैसी साहब ये बताएं कि जब शरिया कानून की बात आती है तब आपको बाबा आदम के ज़माने की बातें याद आती हैं। जब तीन तलाक़ की बात है तो आपको सैंकड़ों साल पुराने कानून याद आने लगते हैं। जब जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जाता है तब आपको परिवार नियोजन के आधुनिक तरीके समझ नहीं आते, तो आपके लिए बच्चे अल्लाह की देन हो जाते हैं। वहां आप वही घिसेपिटे जुमलों को दोहराने लगते हो। जब श्रीरामजन्मभूमि की बात आती है तब आपको मध्यकाल के आक्रांता, लुटेरे, और अय्याश बाबर की याद आने लगती है।  जरा आप बताएंगे कि आधुनिक भारत में सैंकड़ों-हजारों साल पुराने शरिया कानूनों का क्या काम? क्या इस्लाम आधुनिक भारत की देन है? क्या इस्लाम की विचारधारा आधुनिक भारत की विचारधारा से मेल खाती है?  ओवैसी साहब, आप बताइए कि क्या 72 हूरों का जलवा और गजवा-ए-हिन्द की सोच आधुनिक भारत में कोई स्थान रखती है?  आप कल भी मु...

अगर गांधी ने भेड़ियों को चराया होता तो शायद नाथूराम गोडसे जन्म न लेता

अहिंसा के पुजारी कहे जाने वाले मोहनदास करमचंद गांधी जिन्हें हम महात्मा गांधी के नाम से जानते हैं। जिन्होंने हमें सिखाया कि कोई अगर तुम्हारे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो तुम दूसरा गाल भी उसके आगे कर दो। वही गांधी जो सत्याग्रह और अहिंसात्मक आंदोलनों के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध थे। वही गांधी जो पूरी जिंदगी बकरी पालते रहे और बकरी का ही दूध पीते रहे। उस गांधी ने कभी उन निर्दोष, मासूम और बेजुबान बकरों की जान बचाने हेतु कोई आमरण अनशन क्यों नहीं किया? जिस गांधी ने अपने कथित अहिंसात्मक आंदोलनों से बिना खड्ग और ढाल के इस देश को अंग्रेजों के चंगुल से आज़ाद करा दिया वह गांधी मौहम्मद अली जिन्नाह को भारत के टुकड़े करने से क्यों नहीं रोक पाए? समस्त हिन्दू समाज को "अहिंसा परमो धर्म:" का पाठ पढ़ाने वाले गांधी, जिन्ना और उसके समर्थकों को अहिंसावादी क्यों नहीं बना पाए? आखिर क्या कारण था कि गांधी उन कुपरम्पराओं के विरोध में कभी आमरण अनशन पर नहीं बैठे जिसमें हर वर्ष लाखों-करोड़ों बेजुबानों की जान चली जाती है। कभी आपने इस विषय पर गम्भीर चिंतन किया? जरा सोचिए कि महात्मा गांधी ने पाकिस्तान में...

भारत ही एक ऐसा देश है जहां यह दोगला प्राणी बहुतायत में पाया जाता है

भारत की धरती पर "सेक्युलर" नामक एक दुर्लभ प्रजाति पाई जाती है। पूरी दुनिया में एकमात्र भारत ही एक ऐसा देश है जहां पर यह "दोगला" प्राणी बहुतायत में पाया जाता है, इसे राजनीतिक भाषा में "सेक्युलर" कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये जिस थाली में खाता है, उसी में छेद कर देता है। घड़ियाली आंसू बहाने में तो यह बहुत माहिर है। छाती कूटना, विधवा विलाप करना, अर्धरात्रि को माननीय न्यायधीशों की निद्रा में विघ्न डालना, आंदोलन के नाम पर धींगामुश्ती करना, मुफ़्तखोरी को बढ़ावा देना, घुसपैठी हरामखोरों को शैल्टर देना, आदि-आदि इसके कुछ विशिष्ट गुण हैं। दोगलापन तो समझिये कि इसकी रग-रग में है, गिरगिट को भी इसे देखकर अपनी किस्मत पर तरस आता है कि आख़िर इस "सेक्युलर" नामक जीव को प्रकृति ने उसके मुकाबले अधिक रंग बदलने का यह विशेष गुण क्यों दिया।  अब ज़रा देखिए जब इस देश में कोई आतंकी मरता है तो यह "प्राणी" सारी रात मातम मनाता है, लेकिन सेना के वीर जवानों की मौत पर जश्न मनाया जाता है।  कश्मीरी "भटके हुए नौजवानों" की मौत का जिम्मेदार स...

मायावती का हाथी ऐसे बनेगा प्रदेश के ब्राह्मणों का साथी?

मीडिया सूत्रों से ख़बर मिली है कि 23 जुलाई को अयोध्या में होने वाले ब्राह्मण सम्मेलन से पहले पार्टी नेता और पूर्व मंत्री नकुल दुबे ने एलान किया कि बिकरू कांड में आरोपी बनाई गई खुशी दुबे की रिहाई की लड़ाई बसपा लड़ेगी। खुशी कुख्यात विकास दुबे के भतीजे अमर की पत्नी है। बिकरू कांड के बाद पुलिस मुठभेड़ में दोनों ढेर कर दिए गए थे। ब्राह्मण वोटों को साधने के लिए बसपा, सपा और कांग्रेस एड़ीचोटी का जोर लगा रहे हैं। लेकिन ब्राह्मणों का सच्चा हमदर्द कौन है?  बसपा सुप्रिमो सुश्री मायावती और उनकी पार्टी के "ब्राह्मण नेता" अगर वास्तव में ब्राह्मणों के हितैषी हैं तो सर्वप्रथम आरक्षण को समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। यदि यह भी संभव नहीं है तो कम से कम Sc/St एक्ट को "ब्राह्मण मुक्त" बनाने हेतु आंदोलन चलाएं और महामहिम से सिफारिश करें। साथ ही साथ ब्राह्मण समाज पर लगे तमाम झूठे मुकदमे वापस कराए जाएं।  सतीश चंद्र मिश्रा और नकुल दुबे जैसे बसपा नेता यह भी बताएं कि बाबा अम्बेडकर की तरह ही भगवान परशुराम के नाम पर भी गांव और पार्क कब बनवाये जाएंगे। ब्राह्मण भाईचारा सम्मेलन करव...

अरे ब्राह्मणों, जो राम का न हुआ वह परशुराम का क्या होगा

मीडिया स्रोतों से ख़बर मिली है कि बसपा सुप्रीमों कुमारी मायावती "ब्राह्मण सम्मेलन" करा रही हैं। यह सुनकर अच्छा लगा कि जो कल तक "तिलक, तराजू और तलवार। इनके मारो जूते चार" का नारा लगाते थे, मनुस्मृति की प्रतियां जलाते थे और ब्राह्मणों को अत्याचारी और व्यभिचारी बताया करते थे। जिन्होंने पंडितों को हर की पैड़ी पर कुरान पढ़वाने की बात कही थी। आज वही लोग "ब्राह्मण सम्मेलन" करवा रहे हैं।  उधर "सिर्फ मुस्लिम बेटियां ही हमारी बेटियां हैं" और "ब्राह्मणों की कोई मदद न करे" कहने वाले भगवान श्री परशुराम जी की मूर्तियां लगवा रहे हैं।भगवान श्री परशुराम के चित्र लगवाने से क्या लाभ जब आप उनके चरित्र और आदर्शों को ही सिरे से नकार चुके हैं।  शायद वह भूल गए कि इनके गृह जनपद इटावा में ब्राह्मण समाज के परिवार की महिलाओं और बच्चों तक को जूते की माला पहनाकर और मुंह काला करके घुमाया गया। ऐसा करके एक वर्ग के लोगों ने अमानवीयता की सभी हदें पार कर दीं थीं, पर सुना जाता है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इतने गंभीर मामले को भी छोटी-मोटी घटना करार देते हुए ठोस का...

मुन्नवर राना साहब सौ कौरव पैदा करके धृष्टराष्ट्र बनने से क्या लाभ होगा

उत्तरप्रदेश जनसंख्या नियंत्रण कानून पर "दरबारी शायर" और कथित बुद्धिजीवी मुन्नवर राना साहब ने एक बयान देते हुए कहा कि- *“दो से ज्यादा बच्चे इसलिए पैदा किए जाते हैं क्योंकि दो बच्चे एनकाउंटर में मार दिए जाते हैं. एकाध को कोरोना हो जाता है. एकाध एक्सीडेंट में भी मर जाता है. ये वैसे ही है जैसे लोग मुर्गी के 8-10 बच्चे खरीदते हैं. एक-दो बच जाएं तो बच जाएं. हिंदू हो या मुसलमान, एक से ज्यादा बच्चे इसलिए पैदा करता है ताकि कम से कम कोई एक बच्चा कहीं से पंचर जोड़कर, रोटी कमाकर लाए और खिला सके, बाकियों को तो आप मार देंगे.”*  राना साहब का यह बयान सिद्ध करता है कि शायद उन्होंने महापुराण "महाभारत" का अध्ययन नहीं किया और न ही उन्होंने चोपड़ा साहब का "महाभारत" सीरियल ही देखा है। काश अगर देखा होता तो उन्हें मालूम होता कि हस्तिनापुर सम्राट धृष्टराष्ट्र के 100 पुत्र थे जिन्हें कौरव कहा जाता है। और महाराज पांडु के मात्र 5 पुत्र थे, जिन्हें पांडव कहा जाता है। कौरवों के अहंकार और ज़िद के कारण "महाभारत युद्ध" हुआ और उसमें सभी कौरव मारे गए और पांचों पांडव जीवि...

मादरे वतन पर जो लगाते हैं तोहमत,वो कहते हैं कि उनके हिस्से में माँ आई

मुन्नवर राणा साहब चंद "दरबारी शायरों" की नज़र हमारा एक शेर पेश है. ज़रा मुलाहिज़ा फरमाइए- *मादरे वतन पर जो लगाते हैं तोहमत।* *वो कहते हैं कि उनके हिस्से में माँ आई।।* *चंद सिक्कों में जो बेच गए ज़मीर अपना।* *वही चीखते हैं मुल्क़ में बढ़ गई महंगाई।।* उर्दू के "दरबारी शायर" मुनव्वर राणा ने कहा है कि- *"अगर योगी आदित्यनाथ 2022 में फिर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो वह उत्तर प्रदेश छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि अगर योगी आदित्यनाथ फिर से मुख्यमंत्री बनते हैं, तो यह सिर्फ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता असदुद्दीन ओवैसी की वजह से होगा। ओवैसी और भारतीय जनता पार्टी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। बीजेपी और ओवैसी लोगों को गुमराह कर रहे हैं। दोनों की चुनावी लाभ के लिए मतदाताओं के ध्रुवीकरण की नीति अपना रहे हैं।"* राणा ने यह भी कहा कि *अगर यूपी के मुसलमान ओवैसी के जाल में पड़ गए और एआईएमआईएम को वोट दिया, तो कोई भी योगी आदित्यनाथ को दोबारा मुख्यमंत्री बनने से रोक नहीं सकेगा। अगर योगी फिर से मुख्यमंत्री बनते हैं, तो मैं मान लूंगा कि र...

राहुल गांधी पहले अपने डर को दूर भगाने का प्रयास करें, फिर दूसरों पर......

11 जुलाई 2018 को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश के कुछ प्रमुख मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ बैठक में मुसलमानों से जुड़े मुद्दों और देश की वर्तमान राजनीतिक व सामाजिक स्थिति पर चर्चा की थी. राहुल गांधी के साथ इस संवाद बैठक में इतिहासकार इरफान हबीब, सामाजिक कार्यकर्ता इलियास मलिक, कारोबारी जुनैद रहमान, ए एफ फारूकी, अमीर मोहम्मद खान, वकील जेड के फैजान, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट फराह नकवी, सामाजिक कार्यकर्ता रक्षंदा जलील सहित करीब 15 लोग शामिल हुए. इनके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष नदीम जावेद भी मौजूद थे. इसके अगले दिन इस कार्यक्रम को लेकर उर्दू अखबार इंकलाब में *‘हां, कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है।’* शीर्षक से रिपोर्ट लिखी गई. 17 दिसंबर, 2010… विकीलीक्स ने राहुल गांधी की अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर से 20 जुलाई, 2009 को हुई बातचीत का एक ब्योरा दिया। राहुल ने अमेरिकी राजदूत से कहा था, *‘भारत विरोधी मुस्लिम आतंकवादियों और वामपंथी आतंकवादियों से बड़ा खतरा देश के हिन्दू हैं।’* अभी हाल ही में राहुल गांधी सोशल मीडिया वॉलंटियर्...

पाकिस्तान जिंदाबाद-अखिलेश जी आपका यह कैसा समाजवाद

भाजपा सरकार के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने बीते गुरुवार को प्रदेश भर में धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया था। आगरा में भी सपाइयों ने प्रदर्शन किया। इस जुलूस में सपा महानगर अध्यक्ष चौधरी वाजिद निसार भी साथ चल रहे थे। ख़बर है कि जब चौधरी वाजिद निसार सदर तहसील में धरना-प्रदर्शन खत्म कर सपा कार्यकर्ताओं के साथ जुलूस के रूप में लौट रहे थे। उस समय किसी ने जुलूस में "पाकिस्तान जिंदाबाद" के नारे लगा दिए। जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है।हालांकि हम वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करते परन्तु वायरल वीडियो में "समाजवादी पार्टी जिंदाबाद" के नारों के साथ उनका जुलूस पुलिस लाइन मैदान के सामने से गुजरता दिख रहा है, तभी "पाकिस्तान जिंदाबाद" की आवाज गूंजती है। इसके बाद फिर से समाजवादी पार्टी जिंदाबाद के नारे लगने लगते हैं। वीडियो में पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा जब गूंजता है, तब मेहरून शर्ट वाला एक युवक हाथ उठाता नजर आता है। महानगर अध्यक्ष वाजिद निसार का कहना है कि इंटरनेट मीडिया पर वायरल वीडियो में जिस युवक पर देश विरोधी नारे लगाने का आरोप है, उसकी पहचान क...

गांधी परिवार को अध्यक्ष की नहीं बलि के बकरे की तलाश है

भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की मृत्यु के पश्चात से आजतक कांग्रेस की दिशा और दशा दोनों बिगड़ चुकी हैं। श्रीमती सोनिया गांधी ने काफी हद तक कांग्रेस की दशा और दिशा सुधारने में सफलता हासिल कर ली थी परन्तु उनकी बढ़ती आयु और गिरते स्वास्थ्य ने कांग्रेसी नेतृत्व को कमज़ोर कर दिया है। गांधी परिवार के एकमात्र चश्मो चिराग श्री राहुल गांधी से जो उम्मीदें गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी को थीं, उसपर राहुल आजतक खरे नहीं उतर पाए। और अब तो उनसे शायद ही किसी को कोई उम्मीद रह गई है, कहावत भी है कि आख़िरी वक्त में क्या खाक मुसलमाँ होंगे। उधर प्रियंका गांधी कुछ भी कहें लेकिन सच यह है कि वह प्रियंका वाड्रा बन चुकी हैं, और अब न तो देश की जनता और न ही ख़ुद कांग्रेस पार्टी उनके नेतृत्व को गले उतार पा रही है। इस सबके बावजूद गांधी परिवार पार्टी पर अपनी पकड़ को ढीली नहीं करना चाहता है। सोनिया गांधी के विषय में यह कहा जा रहा है कि वह पुत्रमोह में अंधी हो रही हैं जबकि कड़वा सत्य यह है कि सोनिया गांधी पीवी नरसिंघा राव और सीताराम केसरी के कार्यकाल में हुई उठापटक और गांधी परिवार की ढीली पकड़ का अनुभव ...

वामपंथी और लिबरल गैंग की हिन्दू विरोधी मानसिकता

अभी हाल ही में अमेरिका की बहुप्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एण्ड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने उन प्रतिभागियों की फोटो शेयर की है, जिन्हें उनके साथ इंटर्नशिप करने का मौका मिला। उन प्रतिभागियों में भारतीय-अमेरिकी इंटर्न प्रतिमा रॉय की तस्वीर भी थी। प्रतिमा रॉय की टेबल पर हिन्दू देवियों की मूर्तियाँ और दीवार पर हिन्दू देवी-देवताओं की फोटो दिखाई दे रही हैं।यह फोटो भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए गौरवांवित करने वाली होनी चाहिए थी, परन्तु सनातन संस्कृति और सभ्यता विरोधी एक "कथित बुद्धिजीवी लॉबी" को प्रतिमा रॉय की इस धर्मपरायणता ने नाराज कर दिया, क्योंकि ये "बुद्धिजीवी" प्रतिमा राय द्वारा अपनी भक्ति दिखाए जाने पर खुश नहीं हैं। इन्होंने प्रतिमा के ‘वैज्ञानिक स्वभाव’ पर भी प्रश्न उठाया। हालाँकि, प्रतिमा ने अपने उसी वैज्ञानिक स्वभाव के कारण NASA के साथ इंटर्नशिप करने का मौका अर्जित किया है। कुछ लोगों ने NASA पर विज्ञान को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। ऐसे तमाम "बौद्धिक दिवालियों" को यह मालूम होना चाहिये कि यूट्यूब के निर्माता नीलसन को दिए ग...

क्या अखिलेश यादव "चोर" और योगी "नामर्द" हैं

आजकल सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में कुछ दुर्योधन और दुःशासनों द्वारा शब्दों की मर्यादा और भाषा की शालीनता का चीरहरण बेख़ौफ़ किया जा रहा है। एक बानगी देखिये कि पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया श्री अखिलेश यादव को धड़ल्ले से "टोंटी चोर" लिखा जा रहा है। वर्तमान मुख्यमंत्री बाबा योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी पर भी बेहद अश्लील और भद्दी टिप्पणियां की जाती हैं। क्या लिखने वालों के पास कोई पुख़्ता सबूत है अथवा कोई न्याययिक दस्तावेज जिससे वह अपनी बात को साबित कर सकें? या उन्हें बस "कुछ भी बोलना" है। सच पूछिए तो सोशल मीडिया प्लेटफार्म का दुरुपयोग करते हुए देश के कई दिग्गज राजनीतिज्ञों और सम्मानित और गणमान्य नागरिकों के विरुद्ध अश्लीलता भरे कमेंट्स और Fake Messeges द्वारा  दुष्प्रचार करने की मानो एक कु-परम्परा सी चल पड़ी है। और विडम्बना यह है कि इस घिनौने और घृणित कार्य में कुछ कथित बुद्धिजीवी वर्ग के लोग भी शामिल रहते हैं। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दी हुई अपनी एक टिप्पणी में कहा है कि भाषा पर संयम बरतन...

कांग्रेस कभी अपने गिरेबान में क्यों नहीं झांकना चाहती

आजकल बढ़ती हुई महंगाई और ग़रीबी पर बोलने के लिए कांग्रेसी नेताओं औऱ उनके समर्थकों में एक होड़ सी लगी है। आइये आपको बताते हैं कि ग़रीबी क्या है जिसकी चर्चा कांग्रेसी हर चौराहे पर कर रहे हैं।  *"गरीबी एक मानसिक अवस्था है। खाना, पैसे या भौतिक चीजों की कमी से इसका कोई लेना-देना नहीं है। यदि आप में आत्मविश्वास है तो आप गरीबी से उबर सकते हैं।"* ग़रीबी की यह नई परिभाषा कांग्रेस के राजदुलारे श्री राहुल गांधी ने अगस्त 2013 में गढ़ी थी। उस समय राहुल जी जाने-माने समाज विज्ञानी बद्री नारायण की ओर से जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान में आयोजित एक सेमिनार में गरीबी पर व्याख्यान दे रहे थे। इसी तरह आज जिस "मंहगाई" को लेकर कांग्रेस सहित समूचा विपक्ष सड़कों और चौराहों पर अपनी छाती कूट रहा है उसी कांग्रेस के महान नेता श्री पी. चिदम्बरम ने कहा था- *"महंगाई अच्छी है, ये तो ऐसे ही बढ़ेगी"* मतलब कॉंग्रेसी सरकार में जो महंगाई अच्छी थी, वही भाजपा सरकार में काटने को दौड़ रही है।  आज कांग्रेस भाजपा सरकार पर लगातार मंहगाई को नियंत्रित करने के लिये दबाव बना रही है लेकिन फरवरी 20...

जहां गए अरविंद केजरीवाल, वहीं बांटा मुफ़्त का माल

ऐसा प्रतीत होता है कि आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल का चुनावी मंत्र है-  "भाड़ में जाए जनता, कौन करे विकास। मुफ़्त का माल बांटकर चुनाव जीतो झकास।।" भारत की राजनीति में जब भी "मुफ्तखोरी को बढ़ावा देने वाले नेताओं" की सूची बनाई जाएगी तब माननीय अरविंद केजरीवाल का नाम उस सूची में सबसे ऊपर लिखा जाएगा। अरविंद केजरीवाल जैसे नेता अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को परवान चढ़ाने के लिए भारत की जनता में "मुफ्तखोरी" की गन्दी आदत डालने का हरसम्भव प्रयास कर रहे हैं। आश्चर्य तो तब होता है कि जब ऑस्ट्रेलिया से शिक्षा ग्रहण किये हुए और  खुद को "विकास पुरुष" मानने वाले श्री अखिलेश यादव भी अरविंद केजरीवाल के इस "मुफ्तखोर भारत बनाओ" मॉडल की न केवल सराहना करते हैं बल्कि उनके इस चुनावी मॉडल की हूबहू नकल करने पर भी अपना ध्यान केंद्रित करते हैं। आपको याद होगा कि अखिलेश सरकार ने "मुफ्त लैपटॉप" वितरित किये थे।  भारत को "गरीबों का देश" तो पहले से ही कहा जाता रहा है लेकिन 10-20 वर्षों पश्चात अब इसे...

क्या अखिलेश यादव के लिए सत्ता का मोह राष्ट्रधर्म से अधिक मूल्यवान है

उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि - "मुझे उत्तरप्रदेश की पुलिस पर भरोसा नहीं है।" उन्होंने यह बयान तब दिया है जबकि UP ATS ने आतंकी संगठन अलकायदा के दो आतंकी मिनहाज अहमद और मशीरुद्दीन मुशीर को गिरफ्तार किया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह दोनों आतंकी अयोध्या, मथुरा और वाराणसी में आतंकी हमला करने की योजना बना रहे थे। इससे पहले कोविड वैक्सीन पर बयान देते हुए अखिलेश यादव ने कहा था कि-"मुझे भाजपा की वैक्सीन पर भरोसा नहीं है।" हालांकि बाद में उन्होंने उसी वैक्सीन को लगवा लिया। जनसंख्या नियंत्रण बिल और कोरोना जैसी महामारी पर भी समाजवादी पार्टी के नेताओं, चाहे वह शफीकुर्रहमान बर्क़ हों, इक़बाल महमूद हों या फिर एसटी हसन, के बयान न केवल बेहद ग़ैर-जिम्मेदाराना रहे हैं बल्कि कुछ बयान तो बेहद हास्यास्पद भी हैं। उत्तरप्रदेश में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में समाजवादी पार्टी का भाजपा से मतभेद होना स्वाभाविक है और राजनीतिक बयानबाजी भी होनी चाहिए। यह भी सही है कि विपक्ष को सरकार की गलत नीतियों का विरोध करना...

क्या मुसलमानों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार UP ATS ने अलकायदा के दो आतंकियों मिनहाज अहमद और मसिरुद्दीन मुशीर को पकड़ा है। इस पर समाजवादी पार्टी के नेता अबू आज़मी ने मीडिया के हवाले से बयान दिया कि "उत्तरप्रदेश में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसके लिए मुसलमानों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। प्रदेश बल्कि देशभर के मुसलमानों को अब चौकस रहने की ज़रूरत है।" इससे पहले जब "जबरन धर्मांतरण" मामले में मौलाना उमर गौतम और मुफ़्ती जहांगीर आलम को भी UP ATS ने पकड़ा था तब भी विपक्षियों ने कुछ इसी तरह के प्रवचन दिए थे। यहां यह उल्लेखनीय है कि देश की एक बड़ी "सेक्युलर जमात" यह भी शोर मचाते नहीं थकती कि "आतंकी" का कोई "मज़हब" नहीं होता। जब आतंकी का कोई मज़हब नहीं होता तो अबू आज़मी किस बिना पर कह रहे हैं कि मुसलमानों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। इस देश में एक पूरी जमात (लॉबी) है जो हमेशा आतंकियों और उपद्रवियों की पैरोकारी में खड़ी हो जाती है। यह एक ऐसी जमात है जिसे "दानवों" में मानवता नज़र आती है और यह "दानवों" के लिये "मानवाधिकार...

सलमान खुर्शीद साहब पत्थर मत उठाइये,आपके घर शीशे के हैं

उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर योगी सरकार ने फॉर्मूला तैयार कर लिया है, जिसके तहत जिनके पास दो से अधिक बच्चे होंगे, वे न तो सरकारी नौकरी के लिए योग्य होंगे और न ही कभी चुनाव लड़ पाएंगे। उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने जनसंख्या नियंत्रण कानून के तैयार मसौदे में इस तरह के कई प्रस्ताव रखे हैं। आयोग ने इस मसौदे पर लोगों ने आपत्तियां व सुझाव भी मांगे हैं। राज्य विधि आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति एएन मित्तल के मार्ग-दर्शन में यह मसौदा तैयार किया गया है। आपत्तियों एवं सुझावों का अध्ययन करने के बाद संशोधित मसौदा तैयार करके राज्य सरकार को सौंपा जाएगा।  योगी सरकार के इस विधेयक पर कई नेताओं ने हमले किए हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने भी इस संबंध में बड़ा बयान दिया है. सलमान खुर्शीद ने कहा कि "नई जनसंख्या नीति लागू करने से पहले सरकार के मंत्री और नेता अपनी जायज़ और नाजायज़ औलादों के बारे में जानकारी दें." सलमान खुर्शीद का यह बयान कांग्रेस की मानसिकता को प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त है। दरअसल, कांग्रेस में जायज़ और नाजायज़ औलादों का चलन बहुत पुराना ह...

अखिलेश जी इस राजनीतिक।हमाम में सब नंगे हैं

लखनऊ में हुई एक प्रेस कान्फ्रेंस में बोलते हुए  पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया श्री अखिलेश यादव ने कहा कि- "उत्तरप्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख पदों के लिए होने वाले चुनावों में हिंसा औऱ अराजकता का बोलबाला रहा है। उन्होंने प्रदेश की योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायत चुनाव के बाद ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में एक कदम आगे निकल गए, गुंडों को पूरी छूट दी है। पुलिस प्रशासन को खुली छूट दी, पर्चा भरने गए लोगों के साथ मारपीट की गई। उन्होंने किसी का नाम लिए बग़ैर कहा कि जो लोग प्रदेश की योगी सरकार को बधाई दे रहे हैं वह भी दोषी हैं।" माननीय अखिलेश जी जब आज आपकी अपनी परछाई पर पैर पड़ा तो चीख उठे। वह दिन भूल गए जब आप पश्चिम बंगाल में ममता दीदी से आशीर्वाद लेने गए थे और उनसे जीत का मंत्र पूछ रहे थे। आप ही ने ममता दीदी को बधाईयां दी थीं और उनके साथ मुहं मीठा किया था। तब आपको पश्चिम बंगाल में हुई चुनावी हिंसा और खुली अराजकता नहीं दिखाई दे रही थी। पूरे भारत की जनता ने देखा था कि किस प्रकार ममता सरकार ने गुंडों और आतंकियों को सड़कों पर उतार रखा था।...

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आप जानते हैं कि आप जो कुछ देख अथवा सुन रहे हैं उसका आप और आपके बच्चों के मन-मस्तिष्क पर कितना गहरा प्रभाव पड़ रहा है। तो आइए जानते हैं।  आप कुछ दिन केवल रवीश कुमार, पुण्य प्रसून वाजपेयी जैसे पत्रकारों और एनडीटीवी जैसे चैनलों को सुनते रहिए और केवल उन्हीं की खबरों पर ध्यान रखिये। आप राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और ओवैसी सहित तमाम वामपंथी और कांग्रेसी विचारधारा के लोगों का लेख पढिये और उनके भाषण सुनिए। जेएनयू और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं के विचारों और "लिबरल गैंग" के विचारों का गहनता से अध्ययन करिए । जम्मू-कश्मीर समस्या को सैफुद्दीन सोज जैसे नेताओं के चश्मे से देखिये। जावेद अख़्तर, अनुराग कश्यप, फरहान अख़्तर, स्वरा भास्कर, मुनव्वर राना और मरहूम राहत इंदौरी की लिखी शायरी और उनकी फिल्मों को देखते रहिए। आप लगातार टिकैत जैसे  किसान नेताओं और चंद्रशेखर रावण जैसे दलित नेताओं के आंदोलनों पर निगाह जमाये रखिए और शाहीन बाग़ में बैठे लोगों के वीडियो को ध्यान से देखिये और उनके नारों पर ध्यान देते रहिए। सुधा भारद्वाज और स्वर्गीय फादर स्टेन ...