सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

अक्टूबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आई एस का चीफ भले ही मारा गया हो लेकिन इस्लामिक स्टेट की सोच अभी भी जिंदा है

एक फ़िल्म थी "सरकार", इस फ़िल्म में एक डायलॉग था, "आदमी को मारने से पहले उसकी सोच को मारना चाहिए". अमेरिका दुनिया के सबसे खूंखार और वहशी आतंकी अबू बकर अल बगदादी को सीरिया में मार गिराए जानेे का दावा किया है। इससे पहले अमेरिका ने अपने समय के सबसे खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेेन को भी मार गिरानेे के सबूत दिए थे। लेकिन महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या इस सबके बावजूद यह दावा किया जा सकता है कि दुनिया से आतंकवाद और आतंकियों का पूरी तरह से खात्मा हो गया है? क्या यह मान लिया जाए कि इस्लामिक स्टेट के सरगना के मरने का बाद इस्लामिक स्टेट का सपना देखने वालों का भी अंत हो गया है? इन सवालों का जवाब अभी किसी के पास नहीं है, सच तो यह है कि अमेरिका खुद दोहरी नीति अपना रहा है। जहां वह एक तरफ बगदादी और लादेन को मारने की मुहिम चलाता है तो दूसरी तरफ़ तालिबान के सरगनाओं से समझौता करने के लिए जीभ लपलपाता है। एक तरफ़ इस्लामिक स्टेट की सोच को ख़त्म करने पर जोर देता है तो वहीं दूसरी ओर तालिबानी सोच को बढ़ावा देता है। अमेरिका की यह दोहरी नीति हमेशा से रही है और इसीलिए व...

“भगवा आतंकवाद” शब्द को गढ़ने वाले किसी गहरी साजिश को रच रहे हैं

हुतात्मा कमलेश तिवारी वीरगति को प्राप्त हो गए लेकिन उनकी हत्या जिस प्रकार से की गई बताई जाती है उससे एक बात बेहद स्पष्ट हो चुकी है कि “भगवा आतंकवाद” शब्द को गढ़ने वाले किसी गहरी साजिश को रच रहे हैं. मिडिया के द्वारा जिस प्रकार से यह बात सामने आ रही है कि कमलेश तिवारी के हत्यारों ने हत्या के समय भगवा वस्त्र पहने हुए थे उससे कहीं न कहीं इस बात को बल अवश्य मिलता है कि हिंदुत्व और भगवा को रात-दिन कोसने वाले लोगों के मंसूबे अच्छे नहीं हैं. इस हत्याकाण्ड के बाद यह भी सिध्द हो चला है कि आजकल हर भगवाधारी साधू नहीं होता बल्कि कुछ शैतान भी भगवा चोला पहनकर इस देश के माहौल को बिगाड़ने में लगे हैं. यह शैतान केवल हिन्दू और हिंदुत्व के ही नहीं बल्कि पुरे देश के दुश्मन हैं. जिस प्रकार भेड़ की खाल में भेड़िया अपने को छुपा लेता है ठीक वैसे ही अजमल कसाब ने अपने हाथ में कलावा पहनकर और कमलेश तिवारी के हत्यारों ने भगवा वस्त्रों को धारण कर जो जघन्य अपराध किये हैं और हिन्दू संस्कृति के प्रतीकों को अपवित्र करने और उन्हें बदनाम करने का जो घिनौना अपराध किया है उसे किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सक...

आज कमलेश तिवारी, कल किसकी बारी: छद्म सेकुलरिज्म की अग्नि में मां भारती के सच्चे सपूतों की यह आहुति कब तक दी जाती रहेगी

धन्य है वह मां जिसकी कोख से कमलेश तिवारी जैसा मां भारती का लाल पैदा हुआ और कोटि-कोटि नमन है उस पिता को जिसके ओज से हिंदुत्व के सच्चे और निर्भीक एक ऐसे सपूत का जन्म हुआ जिसने सनातन संस्कृति और सभ्यता की रक्षा और मान के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए.  श्रधेय स्वामी श्रद्धानंद के अमर बलिदान के पश्चात कमलेश तिवारी का यह बलिदान सनातन समाज के इतिहास में सदा-सदा के लिए स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गया है. लेकिन अहो दुर्भाग्य , कि इतने महान बलिदानों के पश्चात् भी हमारा सनातन समाज कुंभकर्ण की नींद सोया हुआ है. न जाने कितने निर्दोष संत और महात्माओं की बलि और होनी शेष है, न जाने कितने घरों के चिराग अभी और बुझने हैं, यह तो परमात्मा ही भली प्रकार जानता है. क्या हमारी नींद अभी भी नहीं खुलेगी, क्या अब भी हम चैन की नींद सोते रहेंगे. आखिर कितने श्रध्दानन्द, कितने कमलेश तिवारी हिंदुत्व की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करेंगे और कब तक? यह एक यक्ष प्रश्न है. जिसका उत्तर हमें स्वयं तलाशना होगा.  गले में सेक्युलरिज्म का ढोल लटकाए एक बाइक चोर के मरने पर मॉबलिंचिंग की आड़ में...