सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जनवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पाकिस्तान के किन मुसलमानों का धार्मिक उत्पीड़न हो रहा है

कांग्रेस और उसके चेले-चपाटे इस बात को लेकर हो-हल्ला मचा रहे हैं कि नागरिकता संशोधन कानून में मुसलमानों को शामिल क्यों नहीं किया गया। प्रश्न यह है कि किन मुसलमानों को भारत में नागरिकता देने की पैरोकारी की जा रही है। शिया, अहमदिया या रोहिंग्या। सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि मौहम्मद अली जिन्ना, जो कि पाकिस्तान का संस्थापक था, एक शिया था। जिन्ना का जन्म जिस परिवार में हुआ था वह एक शिया उप-सम्प्रदाय है, बाद में जिन्ना ने अशारिया सम्प्रदाय अपना लिया था जो सबसे बड़ा शिया उप-सम्प्रदाय है। दूसरा मुस्लिम नेता राजा मौहम्मद आमिर अहमद खान जिसने पाकिस्तान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, का भी ताल्लुक़ शिया सम्प्रदाय से था। पाकिस्तान बनवाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला हज़रत मिर्ज़ा बशीरुद्दीन महमूद अहमद उस वक्त अहमदिया मुसलमानों का सबसे बड़ा इमाम था। और दूसरा अहमदिया नेता मुहम्मद जफरुल्ला खान था। इस इमाम बशीरूद्दीन के इस्लामिक कट्टरपन्थ का जुनून इस हद तक था कि उसने कहा था कि "पाकिस्तान तो केवल एक शुरुआत है, असल मकसद तो इस्लामिस्तान बनाना है".   अहमदिया समुदाय के लोग स्वयं को ...

जामिया गोलीकांड के लिए ज़िम्मेदार कौन

जामिया गोलीकांड को लेकर जिस प्रकार की बयानबाज़ी कांग्रेस नेता कर रहे हैं उससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मानो इस देश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए केवल भाजपा, संघ और बहुसंख्यक समाज के लोग ही उत्तरदायी हैं। ठीक ऐसी ही परिस्थितियां आज से 72 वर्ष पहले 30 जनवरी 1948 को बनी थीं जब नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की थी और कांग्रेस व वामपंथ ने इसका ठीकरा हिन्दू संगठनों और संघ पर फोड़ा था, जिसे वह आज भी दोहराते रहते हैं। उस समय भी कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण की सारी हदें पार करते हुए हिन्दू समाज को भयभीत और मजबूर किया हुआ था। आज पूरे देश में CAA-NRC की आड़ में विपक्ष देश के विभाजन, मोदी-शाह और संघ के विरुद्ध नफ़रत, तथा हिन्दू-हिंदुत्व औऱ हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ लगातार जहर फैलाया जा रहा है। शाहीन बाग़ में पिछले लगभग 50 दिनों से अराजकतावादी तत्वों ने महिलाओं औऱ मासूम बच्चों के कंधों पर बंदूक रखकर गुंडागर्दी और बदमाशी के बल पर रास्ता जाम किया हुआ है जिसके कारण करीब 2 करोड़ नागरिकों को न केवल परेशानी हो रही है बल्कि उनके रोजमर्रा के कामों में भी काफी रुकावट हो रही है।  उधर AMU में...

पराजित राष्ट्र, और पराजित मन प्राय: विजेताओं के संस्कार और संस्कृति को स्वीकार करते हैं

धारावाहिक चाणक्य के एक भाग में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि– “भय सिर्फ यवनों की दासता का नहीं है, भय उनकी सांस्कृतिक दासता का भी है. अनुभव कहता है कि पराजित राष्ट्र, और पराजित मन प्राय: विजेताओं के संस्कार और संस्कृति को स्वीकार करते हैं" . इन थोड़े से शब्दों में जो सत्य छिपा है, जो भाव छिपा है, जो राष्ट्रवाद छिपा है, उसे आज गहराई से समझने की परम आवश्यकता है। आज CAA-NRC के विरोध की आड़ में इस देश में जो ज़हर की खेती की जा रही है, उसके लिए ज़मीन हमारा पारंपरिक दुश्मन देश पाकिस्तान तैयार कर रहा है। जिस विचारधारा को पुष्पित-पल्लवित किया जा रहा है वह *इस्लामिक राष्ट्र* की विचारधारा है। इनका नायक कोई और नहीं, बल्कि ज़ाकिर नाईक और हाफ़िज़ सईद हैं, इनके प्रेरणास्रोत अल-बगदादी और ओसामा हैं। यह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे इस्लामिक कट्टरपंथी संगठनों के इशारों पर काम कर रहे हैं, इनका एकमात्र उद्देश्य भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना है। यह लोग अपने को केवल राष्ट्रवादी नहीं कहते बल्कि राष्ट्रवादी-मुसलमान कहते हैं, यह अखण्ड भारत की बात कभी नहीं करेंगे बल्कि हमेशा "मुस्लिम-भारत...

इन देशद्रोही बयानों को बेहद गम्भीरता से लिया जाना चाहिए

अलीगढ़ मुस्लिम विवि (AMU) में CAA के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष फैजुल हसन का एक बयान सामने आया है।  इस छात्र नेता ने कहा है कि  "दुनिया में कहीं सब्र देखना है, तो हिंदुस्तान के मुसलमानों का देखिए। 1947 से 2020 तक मुसलमान सब्र कर रहा है कि हिंदुस्तान टूट ना पाए। हम उस कौम से हैं, अगर बर्बाद करने पर आ गए तो छोड़ेंगे नहीं, किसी भी देश को खत्म कर देंगे।" IIT बॉम्बे से कम्प्यूटर साइंस में ग्रेजुएट और JNU से आधुनिक भारतीय इतिहास में पीएचडी कर रहा शरजील इमाम मूल रूप से बिहार के जहानाबाद काको गांव का रहने वाला है. इसी शरजील इमाम ने CAA के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन में दिए एक बयान में कहा कि-  " असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है. और इंडिया कटकर अलग हो जाएं, तभी ये हमारी बात सुनेंगे." इन दोनों बयानों को अगर हम एकसाथ देखें तो स्पष्टतया यह बयान मुस्लिम लीग के नेताओं के बयान की मूलभावना को ही प्रकट करता है जिसमें उन्होंने कहा था-  "हम हिंदुस्तान को बंटवा देंगे या हिंदुस्तान को तबाह कर देंगे।"  दरअसल अन्य...

देश के गद्दारों को गोली मारो....को, नारे पर आपत्ति क्यों?

आपने सुना या देखा भी होगा कि जब किसी भी आदमखोर जानवर का शिकार किया जाता है तो उसे पहले खुले में लाया जाता है, ताकि उसको मारने के चक्कर में कोई निर्दोष जानवर न मारा जाए। इस आदमखोर को बाहर निकालने के लिए हांका लगाया जाता है जिसमें कुछ लोग ढोल-नगाड़े पीटते हुए ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ करते हैं, उस शोर को सुनकर आदमखोर अपने गुप्त स्थान से निकलकर बाहर आ जाता है। और शिकारी उस आदमखोर को आसानी से मार डालता है। आज जो एक नारा "देश के गद्दारों को, गोली मारो.....को" लगाया जा रहा है, उसे सुनकर जो लोग अपने-अपने दड़बों से बाहर आ रहे हैं, वही गद्दार हैं, जिन लोगों को इस नारे से दिक़्क़त है, समझ लीजिए वह देश का गद्दार है क्योंकि जो लोग राष्ट्रभक्त हैं, देश के वफ़ादार हैं उन्हें इस नारे से दिक़्क़त क्यों होने लगी?* इस नारे में किसी धर्म/मज़हब/जाति/सम्प्रदाय या पंथ का नाम नहीं लिया गया है, बल्कि गद्दारों के झुंड को ललकारा गया है। इस्लाम में गद्दारी की सज़ा मौत है, सनातन धर्म में देशद्रोह की सजा मृत्युदंड है  या देश निकाला है। अन्य सभी धर्मों में भी ग़द्दारी की सज़ा मौत ही है। तब इस नारे पर आपत्ति क्यों...

शरजील इमाम जैसे देशद्रोहियो को फाँसी देने का कानून बनाये मोदी सरकार-यति नरसिंहानंद सरस्वती

गुप्त नवरात्रि में सनातन धर्म और सनातन धर्म के मानने वालों की रक्षा व सनातन धर्म के शत्रुओं के समूल विनाश के लिये माँ बगलामुखी का महायज्ञ कर रहे शिवशक्ति धाम डासना के सन्यासियों ने असम को भारतवर्ष से काटने की योजना बनाने वाले शरजील इमाम और उसके जैसे गद्दारो के लिये फाँसी की सजा की मांग की।शिवशक्ति धाम के पीठाधीश्वर व अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी ने भूमा निकेतन की यज्ञशाला से बयान जारी करके यह माँग की है। उन्होंने कहा की इस्लाम के जिहादी भारत के गद्दारो से मिलकर इस देश के टुकड़े टुकड़े करना चाहते हैं।ये सब कुछ जे एन यू,ए एम यू, जामिया और शाहीन बाग में लग रहे नारो से देश की जनता के सामने स्पष्ट हो चुका है।शरलीन इमाम की स्वीकारोक्ति ने इस षड्यंत्र को साबित भी कर दिया।अब केंद्र सरकार को ऐसे देशद्रोहियो को फाँसी पर लटका देना चाहिये।यदि इसके लिये जरूरत पड़े तो केंद्र सरकार संविधान संशोधन के द्वारा नए और कड़े कानून बनाये। इस माँग का श्री ब्राह्मण महासभा ने भी समर्थन किया है।श्री ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पण्डित अधीर कौशिक ...

चाहे पाकिस्तान में समस्त हिन्दू व सिख मार दिए जाएं, पर भारत के एक कमज़ोर मुसलमान बालक की भी रक्षा होगी- महात्मा गाँधी

लियोनार्ड मोसले के अनुसार भारत विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के बावजूद भी महात्मा गांधी ने कहा था- "चाहे पाकिस्तान में समस्त हिन्दू व सिख मार दिए जाएं, पर भारत के एक कमज़ोर मुसलमान बालक की भी रक्षा होगी". स्रोत-(पुस्तक- भारत का राष्ट्रीय आंदोलन: एक विहंगावलोकन, लेखक-मुकेश बरनवाल, डॉ. भावना चौहान) कांग्रेस का इतिहास मुस्लिम तुष्टीकरण के तमाम उदाहरणों से भरा हुआ है। आज देश में CAA-NRC की आड़ में जिन मंचों से मुस्लिम कट्टरपंथी ताकतों को शह दी जा रही है, उन तमाम मंचों के पीछे जिस बेशर्मी के साथ कांग्रेस पार्टी और उसके तमाम नेता खड़े हैं, वह कोई नई बात नहीं है।  आज जिस तरह की भाषा मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर सहित तमाम कांग्रेसी नेता बोल रहे हैं, यह कांग्रेस के पाठ्यक्रम का एक हिस्सा हैं। वह कांग्रेस ही थी जिसने धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलिरिज्म) शब्द को संविधान में जगह दी, औऱ हमेशा उसकी आड़ में मुस्लिम कट्टरपंथी ताकतों को प्रश्रय दिया। जिसका खामियाजा आज तक यह देश भुगत रहा है। डॉ. अम्बेडकर अपनी पुस्तक "पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया" में लिखते हैं कि "...

टू नेशन थ्योरी का सिद्धांत सर्वप्रथम अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने दिया था

सर सैयद अहमद खान  मई 1875 में सर सैयद अहमद खान ने अलीगढ़ में “ मदरसतुल-उलूम ” नामक एक मुस्लिम स्कूल स्थापित किया और महारानी विक्टोरिया की वर्षगाँठ के अवसर पर २४ मई 1875 को उन्होंने "मोहम्डन एंग्लो ओरिएण्टल कॉलेज" की स्थापना की थी जो बाद में विकसित होकर 1920 में "अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय" बना.  मोहम्डन एंग्लो ओरिएण्टल कॉलेज के प्रथम प्रिंसिपल थियोडर बैक थे.   सर सैयद  के प्रयासों से अलीगढ़ क्रांति की शुरुआत हुई , जिसमें शामिल मुस्लिम बुद्धिजीवियों और नेताओं ने भारतीय मुसलमानों को हिन्दुओं से अलग करने का काम किया.  सर सैयद  ने 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय ब्रिटिश साम्राज्य का वफ़ादार बनकर बहुत से यूरोपियों की जानें बचाईं.  सर सैयद  ने 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना में मुख्य भूमिका अदा    की. क्योंकि  सर सैयद  का मानना था कि कांग्रेस हिन्दू आधिपत्य पार्टी है. अलीगढ़ युनिवर्सिटी  अंग्रेजों के बाद जिसने सर्वप्रथम साम्प्रदायिकता के बुनियाद को मजबूत कर...

आप इनसे राष्ट्रप्रेम की उम्मीद क्यों करते हैं

आज दिनांक 26/01/2020 को बाजार ढाली पर स्थित श्रीराम कॉम्प्लेक्स (ज्ञान काँटेवालो के यहां) पर ध्वजारोहण हुआ। वहां ज्ञान वर्मा जी ने एक बहुत अच्छी बात कही, उन्होंने कहा कि- "इस देश के लोगों में राष्ट्रप्रेम की कमी क्यों है? ज्ञान वर्मा जी मेरे बड़े भाई हैं, मैं उनका बहुत सम्मान करता हूँ और उसी सम्मान को बरकरार रखते हुए एक बात कहूंगा और वह यह कि- *जो लोग "भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह-इंशाअल्लाह" का नारा लगाते हैं, जो लोग इस देश में 100 करोड़ हिंदुओं को 15 मिनट में काटे जाने की बात पर तालियां बजाकर उसका समर्थन करते हैं, जो लोग पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसाने वाले और गोलियां चलाने वालों को शहीदों का दर्जा देने की मांग रखते हैं, जो लोग हमारी जाबांज सेना पर गोलियां चलाने वालों को क्रांतिकारी बताते हैं, जो लोग याकूब मेमन को मासूम बताते हैं, जो लोग वीर सैनिकों की शहादत पर दिवाली मनाते हैं और आतंकी अफजल गुरु की बरसी मनाते हैं, जो लोग इस देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को क़ातिल बताते हैं, जो लोग खुलेआम आसाम और कश्मीर को भारत से अलग करने...

मुसलमान किस सीमा तक एक ऐसी सरकार की सत्ता को स्वीकारेंगे जिसको बनाने और चलाने वाले हिन्दू होंगे

आज इस देश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध  की आड़ में जिस प्रकार की नफ़रत, हिंसा और देशद्रोही बयानबाजी की जा रही है वह निश्चित रूप से एक बड़ी गहरी साजिश है जिसके पीछे विदेशी ताकतों के साथ-साथ कटटरपंथी विचारधाराओं का भी पूरा समर्थन है. दरअसल नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने का एकमात्र कारण यह बताया जा रहा है कि इसमें "मुस्लिम" शब्द को क्यों नहीं जोड़ा गया? यहाँ यह उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून, २०१९ के अनुसार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित हिन्दू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिखों जो कि ३१ दिसंबर २०१४ तक भारत में आ गए हैं, को भारत की नागरिकता दे दी जाएगी। इसमें आईने की तरह स्पष्ट है कि नागरिकता केवल उन लोगों को दी जाएगी जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश देश जो इस्लामिक देश हैं, में धार्मिक आधार पर अल्पसंख्यक हैं और इन देशों में उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. ऐसे में यह स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि इन इस्लामिक देशों में कोई भी मुस्लिम धार्मिक आधार पर प्रताड़ित नहीं किया जा सकता है. और दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि...

ओवैसी साहब, बाप बनने की कोशिश मत करो, बेटा बनकर रहो

आपने एक कहावत जरूर सुनी होगी, जो गरजते हैं, वो बरसते नहीं। आपने अक्सर देखा होगा कि कुत्ता जब किसी गाड़ी के पीछे भागता है, तो सिर्फ़ भौंकता है, वो क्यों भागता है और क्यों भौंकता है इसपर शायद ही आपने कभी विचार किया हो। दरअसल कुत्ते को गाड़ी से कुछ लेना-देना नहीं होता, लेकिन उसके वजूद और उसकी रफ़्तार से डरता है और इसीलिए वह उसके पीछे भौंकते हुए दौड़ता है। अकबरुद्दीन ओवैसी साहब ने कहा कि "हमने 800 साल इस देश में हुक़ूमत की है". बेशक की होगी, लेकिन ओवैसी साहब आपने यह हुकूमत उनपर की है जिनके साथ आप जय भीम-जय मीम का नारा लगाते हैं, हमपर नहीं। हम उनकी औलादें हैं जिन्होंने महाभारत की है, जिसके कारण आज भी उस मैदान की मिट्टी लाल ही निकलती है।  आप कहते हैं कि 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दीजिये तो 100 करोड़ हिंदुओं को काट देंगे। ओवैसी साहब जब 800 साल तक आपकी हुक़ूमत थी, जब पुलिस भी आपकी ही थी और जज भी आपका, तब आपने इन हिंदुओं को जिंदा क्यों छोड़ दिया था। आप जिन्ना बनना चाहते हैं, शौक से बनिये, हम तो चाहते हैं कि भारत का मुसलमान आपको जिन्ना मान ले लेकिन दिक़्क़त यह है कि इस मुसलमान ने तो उस ...

मुस्लिम कानून के अनुसार दुनिया दो पक्षों में बंटी है दारुल इस्लाम और दारुल हर्ब : डॉ. बी आर आंबेडकर (भाग-1)

बाबा भीमराव अम्बेडकर साहेब जैसा विद्वान व्यक्तित्व शायद ही कोई दूसरा हो, परन्तु उनके तमाम विचार अंग्रेजी भाषा में होने के कारण और कांग्रेस और भीम-मीम का नारा लगाने वालों की कुटिल राजनीति के चलते हम सब उन विचारों से पूर्णतया अनभिज्ञ ही रहे हैं।  कांग्रेस-वामपंथ सहित ओवैसी जैसों के इशारों पर तथाकथित बुद्धिजीवियों डॉ. आंबेडकर के विचारों को हिन्दुविरोधी और इस्लाम हितैषी बताने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। इन "बौद्धिक आतंकवादियों" ने एक गहरी साजिश के तहत दलित-पिछड़े और सवर्ण जातियों में विभाजित कर दिया। यहाँ तक कि इन्होने यह  दुष्प्रचार किया कि दलित और हिन्दू दो अलग-अलग समुदाय हैं. और इसके लिए उन्होंने बाबा भीमराव आंबेडकर के उन विचारों का सहारा लिया जिनका कोई संबंध बाबा साहेब से कभी रहा ही नहीं। अगर आप लोग भी दलित-मुस्लिम एकता के पक्षधर हैं तो बाबा अम्बेडकर के उन विचारों को जानिए जो शायद आप तक इसलिए नहीं पहुंच पाए क्योंकि बाबा साहेब ने उन्हें अंग्रेजी में लिखा था और जो लोग अंग्रेजी जानते थे उन्होंने सच्चाई को हमेशा अपने तक सीमित रखा. लेकिन एस.के. अग्रवाल जै...

क्या भारत में इतिहास अपने आपको दोहरा रहा है : २०२० से १९४७ की ओर (भाग -२)

अलाउद्दीन खिलजी ने जब एक क़ाज़ी से सवाल किया- इस्लामी क़ानून के अंतर्गत हिन्दुओं की स्थिति क्या होगी? क़ाज़ी ने उत्तर दिया- "उन्हें (हिन्दुओं को ) लगान भरने वाला कहा जाता है, और जब कोई लगान अधिकारी उनसे चांदी मांगे, उन्हें बिना कोई प्रश्न उठाये पूरी विनम्रता और सम्मान के साथ सोना भेंट करना चाहिए। यदि अधिकारी उनके मुहं में गंदगी फेंकें तो उन्हें ख़ुशी-ख़ुशी उसे लेने के लिए मुहं चौड़ा खोल देना चाहिए। धिम्मी (गैर-मुस्लिम) की असली नीच स्थिति इस प्रकार विनम्रता से धन भेंट करने और अपने मुहं में गंदगी स्वीकारने से ही प्रकट होती है. इस्लाम का महिमा गान ही कर्तव्य है और मज़हब के प्रति उपेक्षा भाव ओछापन है. खुदा उन्हें हिक़ारत से देखता है, जैसा कि उसने कहा है, उन्हें दबाकर रखो". हिन्दुओं को अपमानित बनाकर रखना तो ख़ासकर ही मज़हब का कर्तव्य है, क्योंकि वे पैगंबर के सबसे पुराने जिद्दी दुश्मन हैं, और क्योंकि पैगंबर ने हमें उनको क़त्ल करने का हुक्म यह कहकर दिया है कि 'उन्हें इस्लाम कबूल कराओ या मार दो' और गुलाम बनाओ तथा उनकी धन-सम्पत्ति लूट लो'. कोई और नहीं बल्कि स्वयं महान सिद्धांतकार...

क्या भारत में इतिहास अपने आपको दोहरा रहा है :२०२० से १९४७ की ओर (भाग-1)

आज यह देश पूरी तरह से दो विचारधाराओं में बंटा हुआ है. एक विचारधारा उन लोगों की है जिनके लिए देश और देश का  संविधान पहले है, और दूसरी विचारधारा उन लोगों की है जिनके लिए उनका मज़हब और उनकी क़ौम सर्वोपरि है. उनको देश और संविधान से कोई सरोकार नहीं है. हमने इस शीर्षक को ऐसे ही नहीं लिख दिया बल्कि इसके पीछे कई ऐतिहासिक कारण और घटनाक्रम हैं. हमें उनको गहराई से समझना होगा, उसके बाद ही शायद हम किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुँच पाएंगे। यहाँ हमने कटटरपंथी विचारधारा के साथ-साथ राजनैतिक विचारधाराओं का समागम  करने का प्रयास किया है. आम मुसलमान की विचारधारा और उसकी सोच का कोई महत्व न आज है और न कल था. क्योंकि आम मुस्लिम या हिन्दू केवल अपने खाने-कमाने और घर-गृहस्थी के दायरे से बाहर कभी नहीं जा पाता है. इसलिए जब भी हम हिन्दू या मुस्लिम की बात करते हैं तो वहां हमारा आशय मात्र और मात्र उन हिन्दू-मुसलमानों से होता है जो सियासत से ताल्लुक़ रखते हैं या सियासती मामलों में अपना दख़ल रखते हैं. २६ मार्च १९४० को अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में मौहम्मद अली जिन्ना ने अपने अध्यक्षीय भा...

भारत का मुसलमान CAA विरोध क्यों कर रहा है

"सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान" हमारा कहने वाले अल्लामा इक़बाल ने कहा था *"हिंदुस्तानी मुसलमानों को, जो संख्या में एशिया के दूसरे सभी देशों के मुसलमानों को एक साथ जोड़ने पर भी अधिक है, खुद को इस्लाम की सबसे बड़ी जायदाद मानना चाहिए. यानी ऐसे हिंदुस्तानी मुसलमानों को एकरूप होकर दुनिया भर के मुसलमानों के बीच बंधुत्व के सन्देश का वाहक मानना चाहिए।"* इस देश में इस्लामिक कट्टरपंथी या कहिए छद्मधर्मनिरपेक्ष ताकतें लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रश्रय इसलिए नहीं देतीं क्योंकि उनका यह सोचना है कि यदि इस देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर कोई सरकार की स्थापना होगी तो उसमें हिन्दू बहुमत में होंगे और वे निश्चित रूप से अल्पसंख्यकों के विरुद्ध मनमाने तरीके से प्रस्ताव पारित करा देंगे. भारत के मुसलमानों की एक दूसरी और सबसे बड़ी समस्या उनके धर्म का केंद्र भारत से बाहर विदेश में होना है। उनके धार्मिक निर्णय प्रत्यक्ष रूप से तुर्की या अन्य केंद्रों से प्रभावित होते हैं। हिन्दू धर्म पूरी तरह से भारत का अपना धर्म है और उसका केंद्र भारत में ही है। न तो वह किसी एक व्यक्ति को अपना सर्वेसर्वा...

क्या संविधान के स्वयंभू रक्षकों को न्यापालिका पर भरोसा नहीं है

जब भी विपक्ष के किसी नेता या नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध कर रहे किसी प्रदर्शनकारी से आप यह पूछेंगे कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश की जनता को यह आश्वासन दिया है कि CAA से भारत के किसी भी नागरिक की नागरिकता को कोई खतरा नहीं है, तब यह विरोध-प्रदर्शन क्यों? तब वह तपाक से एक ही जवाब देता है कि हमें मोदी जी की बातों पर भरोसा नहीं है, क्योंकि मोदी झूठ बोलता है। दूसरा सवाल अगर उनसे यह पूछा जाए कि आप यह धरना-प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? तो हाथों में पत्थर लिए या "फ्री कश्मीर" का बैनर गले में लटकाए घूमता या "भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह-इंशाअल्लाह" जैसे देशद्रोही नारे लगाता टुकड़े-टुकड़े गैंग का सदस्य भी आपको यही जवाब देगा कि हम संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वह इसे क्रांति का नाम भी दे सकता है। परन्तु क्या किसी के पास इस प्रश्न का उत्तर है कि जब संसद जिसे लोकतन्त्र का मंदिर माना जाता है, और विधायिका जिसे लोकतंत्र का एक मजबूत स्तम्भ माना जाता है, ने इस कानून को बहुमत से पास कर दिया और देश के सर्वोच्च पद पर आसीन मह...

पाकिस्तान में आमतौर पर मुसलमान दलितों द्वारा तैयार भोजन नहीं खाते हैं

पाकिस्तान के सिंध में जमींदारों , या वाडेरों का एक छोटा वर्ग , अधिकांश भूमि का मालिक है , और कुछ सम्पदा हजारों एकड़ में चलती हैं। सिंधी किसान या हरिस की स्थिति , जिसमें मुस्लिमों के साथ-साथ दलित भी शामिल हैं , दयनीय हैं। कई लोग तो मिट्टी के झोपड़ों के भी मालिक नहीं हैं जिनमें वे रहते हैं। पाकिस्तान की लगभग 3 मिलियन आधिकारिक रूप से वर्गीकृत ' हिंदू ' आबादी में से कुछ 80 प्रतिशत दलित हैं। देश में 42 अलग-अलग दलित जातियां हैं , जिनमें सबसे अधिक भील , मेघवाल , ओड और कोहली हैं। ज्यादातर पाकिस्तानी दलित दक्षिणी पंजाब और बलूचिस्तान में कम संख्या में रहते हैं। वे मुख्य रूप से गरीब हैं और बड़े पैमाने पर निरक्षर हैं और मुख्य रूप से कृषि श्रमिकों , मेनियल्स और क्षुद्र कारीगरों के रूप में एक दयनीय अस्तित्व को बाहर निकालते हैं भूमि का अधिकांश हिस्सा अनुपस्थित जमींदारों के पास है जो हैदराबाद और कराची , सिंध के सबसे बड़े शहरों में रहते हैं। सिंध के अधिकांश निचले इलाकों में दलितों की संख्या 70 प्रतिशत तक है। शायद ही कोई दलित किसी भी भूमि का मालिक हो और वे पूरी तरह से अपने अस्तित्व के लिए...

हिन्दू बहुसंख्या में हैं इस नाते उनके दृष्टिकोण का महत्व होना ही चाहिए-डॉ. बी.आर. आंबेडकर

मेरे तर्कों का बहुत बड़ा भाग हिंदुओं को सम्बोधित है। इसका एक स्पष्ट कारण है, जो किसी की भी समझ में नहीं आएगा। हिन्दू बहुसंख्या में हैं इस नाते उनके दृष्टिकोण का महत्व होना ही चाहिए। उनकी आपत्तियों को, चाहे वह तर्कसम्मत हों या भावुकतापूर्ण, दूर किये बिना (हिन्दू-मुस्लिम वैमनस्य की) समस्या का शांतिपूर्ण हल सम्भव नहीं है। इसके अतिरिक्त, अपने तर्कों को अधिकांशतः हिंदुओं को सम्बोधित करने के कुछ विशेष कारण भी हैं जो दूसरे लोगों को पूरी तरह स्पष्ट नहीं होंगे। मैं अनुभव करता हूँ कि जो हिन्दुजन अपने बांधवों के भाग्यों का पथ-प्रदर्शन कर रहे हैं। वे कुछ खोखले भ्रमजालों की चमक ओढ़े घूम रहे हैं जिनके परिणाम, मुझे भय है, हिंदुओं के लिए घातक सिद्ध होंगे। हिंदुओं को यह बोध नहीं होता, यद्दपि यह अनुभव सिद्ध है कि हिन्दू व मुसलमान न तो स्वभाव में एक हैं, न आध्यात्मिक अनुभव में और न ही राजनीतिक एकता की इच्छा में, और जिन कुछ क्षणों में वे सौहार्द के से सम्बन्धों की ओर बढ़े, तब भी यह सम्बन्ध तनावपूर्ण थे। फिर भी हिन्दू इसी भ्रम को प्रसन्नतापूर्वक अपनाए रखेंगे कि पिछले अनुभवों के बावजूद, हिंदुओं व मुसलम...

‘दलित-मुस्लिम राजनीतिक एकता’ का वह भयानक सच जिसे इतिहास के पन्नों में दबा दिया गया

भारत में दलित-मुस्लिम एकता के प्रथम पैरोकार और पाकिस्तान के प्रथम कानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल जिन्होंने जिन्ना के पाकिस्तान में दलित समाज के उत्थान के सपने देखे थे. मंडल ने शेडयूल कास्ट फेडरेशन और मुस्लिम लीग में समझौता किया था. जोगेंद्र नाथ मंडल नमोशूद्राय जाति से ताल्लुक रखते थे. जिन्ना ने जोगेंद्र नाथ मंडल को पाकिस्तान का पहला कानून मंत्री नियुक्त किया था. लेकिन पाकिस्तान में जिस प्रकार से दलित समाज के साथ धोखा किया गया और उनके साथ जो अत्याचार किये गए जो कि आज तक बदस्तूर चल रहे हैं, उनसे दुखी होकर जोगेंद्र नाथ मंडल ने २० फरवरी १९५० को तत्कालीन राष्ट्रपति को अपना जो इस्तीफा सौंपा था, उसके कुछ अंशों को यहाँ प्रस्तुत किया गया है.  "बंगाल में मुस्लिम और दलितों की एक जैसी हालात थी। दोनों ही  पिछड़े ,  मछुआरे और  अशिक्षित थे। मुझे आश्वस्त किया गया था मुस्लिम लीग के साथ मेरे सहयोग से ऐसे कदम उठाये जायेंगे जिससे बंगाल की बड़ी आबादी का भला होगा। हम मिलकर ऐसी आधारशिला रखेंगे जिससे साम्प्रदायिक शांति और सौहार्द बढ़ेगा। इन्हीं कारणों से मैंने मुस्लिम लीग का साथ दिय...