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क्या BJP अर्थात बैकवर्ड जन पार्टी बन रही है

भाजपा पहले हिन्दू, हिंदुत्व और हिन्दू राष्ट्र की बात करती थी, तब वह हिंदुओं की पार्टी कहलाती थी। उसके बाद 2019 में भाजपा ने अपना चोला बदला और राष्ट्रीयता और राष्ट्रवाद की दुहाई देनी आरम्भ कर दी, तब वह राष्ट्रवादी पार्टी कहलाने लगी। अब उत्तरप्रदेश में चुनाव होने का बिगुल बजते ही भाजपा ने जिस प्रकार से बैकवर्ड कार्ड खेलना आरम्भ किया है, उससे लग रहा है कि कुछ समय पश्चात BJP का नया नामकरण "बैकवर्ड जन पार्टी" के नाम से होगा। मतलब हिंदुवादी और राष्ट्रवादी पार्टी अब धीरे-धीरे "पिछड़ावादी पार्टी" बनती जा रही है।
अभी तक जितनी सरकारी योजनाएं और कार्यक्रम आए हैं उनका अधिकांश लाभ पिछड़ा वर्ग को ही मिलता नज़र आ रहा है। और तो और सवर्ण वर्ग की कई जातियों को अब पिछड़ा वर्ग में शामिल कर लिया गया है, जिसमें सबसे प्रमुख हिन्दू कायस्थ हैं, जिन्हें पूर्वान्चल में "लाला" कहा जाता है। मजे की बात यह है कि यह अभी भी हमारी समझ से परे है कि इसे कायस्थ जाति का प्रमोशन कहा जाए या फिर डिमोशन? फिलहाल तो सभी अगड़े अपने को पिछड़ा कहलवाने में गौरवांवित अनुभव कर ही रहे हैं।
उत्तरप्रदेश में पिछड़ों की संख्या 42 प्रतिशत है, अब शायद और बढ़ गई होगी। इस पिछड़े समाज पर अभी तक केवल समाजवादी पार्टी का एकछत्र राज चल रहा था, लेकिन अब BJP ने इसमें अंदर तक सेंध लगा ली है। ऐसे में इसका सबसे बड़ा नुकसान समाजवादी पार्टी को हो रहा है।
अब इसके बाद जो एक नया खेल खिलने जा रहा है, उसकी शायद किसी को कोई ख़बर नहीं है। जल्दी ही हम उस नए "खेला" पर प्रकाश डालेंगे। और हमें यकीन है कि अगर BJP अपने उस खेल में सफल रही तो 2022 में उत्तरप्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने से कोई नहीं रोक पायेगा।
अखिलेश यादव और मायावती सहित तमाम विपक्षी दल केवल हवा में कबूतर उड़ाते नजर आएंगे। 
यहां एक और बात बताते चलें कि भाजपा ब्राह्मण समाज को साधने का भी एक गुरुमंत्र तलाश कर चुकी है, सही समय आने पर उसे भी बाहर निकाला जाएगा। 
भाजपा केवल 2022 के लिए सोचकर कोई काम नहीं कर रही है बल्कि यह सारा खेल-तमाशा 2024 के आयोजन की तैयारियों की एक झलक मात्र है। 

फिलहाल तो यह ट्रेलर है,  पिक्चर तो अभी बाकी है मेरे दोस्त।।

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

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*विशेष नोट- उपरोक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। उगता भारत समाचार पत्र के सम्पादक मंडल का उनसे सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है। हमारा उद्देश्य जानबूझकर किसी की धार्मिक-जातिगत अथवा व्यक्तिगत आस्था एवं विश्वास को ठेस पहुंचाने नहीं है। यदि जाने-अनजाने ऐसा होता है तो उसके लिए हम करबद्ध होकर क्षमा प्रार्थी हैं।

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