आज देश के जो हालात हैं और हाल ही में दिल्ली में हुई हिंसा को देखने के बाद यह प्रश्न उठना स्वाभाविक ही है कि क्या माननीय गृहमंत्री अमित शाह अपने दायित्व को सही प्रकार से नहीं निभा पा रहे हैं? नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद से ही देश के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, और उधर भाजपा भी लगातार चुनाव हारती जा रही है। इन दोनों ही बातों का एक दूसरे से गहरा सम्बन्ध है। दरअसल जब तक भाजपा के चुनावी रणनीतिकार की कमान पूरी तरह से अमित शाह के हाथों में थी तब तक भाजपा एक बाद एक चुनाव जीत रही थी और देश के हालात भी लगभग सामान्य थे। लेकिन जबसे अमित शाह ने गृहमंत्रालय का पदभार सम्भाला है और चुनावी राजनीति छोड़ी है, न देश स्थिर है और न भाजपा। 20 दिसम्बर को एकाएक पूरे देश में एक वर्ग विशेष के लोग सड़कों पर आ जाते हैं और पुलिस पर सीधे-सीधे हमला बोल देते हैं। लेकिन पुलिसकर्मियों के हाथ बंधे होने के कारण वह सीधे रूप से कोई कार्यवाही नहीं कर पाते, उसके बाद शाहीन बाग़ में धरने के नाम पर सड़कों को जाम कर दिया जाता है लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनकर उन्हीं प्रदर्शनकारियों की रक्षा...
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