क्या भाजपा और संघ परिवार परिवारवाद से भी घातक व्यक्तिवादी राजनीति की ओर अग्रसर हैं? एक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण। भाजपा और संघ में व्यक्तिवाद: परिवारवाद से भी बड़ा खतरा? कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित समस्त विपक्षी दलों पर दीर्घकाल से परिवारवादी होने के आरोप भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रक्षेपित किए जाते रहे हैं। यह आरोप इतनी प्रखरता और नियमितता से लगाए गए कि भारतीय लोकतंत्र में "परिवारवाद" शब्द ही एक राजनीतिक अभिशाप बन गया । परंतु आज सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विचारणीय प्रश्न यह उभरता है कि क्या भाजपा और संघ परिवार स्वयं "व्यक्तिवादी" राजनीति की अभूतपूर्व नींव प्रस्तरित करते हुए प्रतीत नहीं हो रहे? एक कालखंड था जब देवकीनंदन पांडे द्वारा उद्घोषित किया गया था कि "इंदिरा इज़ इंडिया, इंडिया इज़ इंदिरा" । उस वाक्य को तानाशाही प्रवृत्ति का प्रतीक मानकर दशकों तक भर्त्सना की गई। किंतु आज का परिदृश्य उससे भी अधिक चिंताजनक है। आज नरेंद्र मोदी ही सर्वस्व हो गए हैं—वही राष्ट्र का पर्याय हैं, वही संविधान के व्याख्याता हैं, वही हिंदुत्व के एकमात्र...
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