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मार्च, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सपा शासनकाल : महिला उत्पीड़न, जातिगत हिंसा और राजनीतिक संरक्षण

  राष्ट्रवादी चिंतन — सपा शासन में महिला उत्पीड़न विशेष विश्लेषणात्मक शोध रिपोर्ट एक विस्तृत विश्लेषणात्मक शोध रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश समाजवादी शासनकाल में महिला उत्पीड़न और 'बाहुबली' तंत्र का उदय लोहियावादी समाजवाद की आड़ में पनपे अपराधी-राजनेता गठजोड़ और महिला सम्मान के हनन का ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण। शास्त्री मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री" दिनांक: 30 मार्च, 2026 | स्थान: लखनऊ उत्तर प्रदेश के समकालीन राजनीतिक इतिहास में समाजवादी पार्टी (सपा) का उदय एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने लोहियावादी समाजवाद और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया । 4 अक्टूबर 1992 को मुलायम सिंह यादव द्वारा स्थापित यह दल अनिवार्य रूप से पिछड़ी जातियों, विशेषकर यादवों, और मुस्लिम समुदाय के गठबंधन पर आधारित रहा है । हालांकि, पार्टी के विभिन्न शासनकालों (1993-1995, 2003-2007, और 2012-2017) के दौरान उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था, विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा और उनके सम्मान के प्रति द...

इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों का परमाणु सम्पन्न होना भारत के हित में क्यों नहीं है?

आतंकवादी संगठनों द्वारा परमाणु हथियार हासिल करने और भारत के रणनीतिक हितों पर इसके प्रभावों का राष्ट्रवादी विश्लेषण। राष्ट्रचिन्तन — इस्लामिक कट्टरपंथ और परमाणु खतरा परमाणु सुरक्षा · राष्ट्रीय अस्तित्व · विशेष आलेख ▶ मार्च 2026 · राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषांक परमाणु हथियार सम्पन्न इस्लामिक कट्टरपंथ — भारत के अस्तित्व को चुनौती ईरान का परमाणु सम्पन्न होना एक वैश्विक खतरा शास्त्री मनोज चतुर्वेदी शास्त्री राष्ट्रचिन्तन · मार्च 2026 परमाणु हथियार का सिद्धांत "Mutually Assured Destruction" — अर्थात् यदि तुमने हमला किया तो तुम भी नष्ट हो जाओगे — इस भय पर टिका है। यह सिद्धांत तब काम करता है जब दोनों पक्ष जीवन को मृत्यु से श्रेष्ठ मानते हों। किन्तु- जब एक मजहबी कट्टरपंथी विचारधारा मजहब को इंसानियत से बड़ा मानती हो — तो MAD का पूरा ढाँचा ध्वस्त हो जाता है। यही वह मूलभूत विभेद है जो इस्लामिक कट्टरपंथ से संचालित परमाणु राज्यों को किसी भी अन्य...

इस्लामिक कट्टरपंथ से झुलसता ईरान क्या भस्मासुर बन गया है?

बदलाव या मजबूरी? ईरान के 'भस्मासुर' बनने और पश्चिम एशिया पर इसके प्रभावों का राष्ट्रवादी विश्लेषण। राष्ट्रचिन्तन — ईरान का भस्मासुर ▶ मार्च 2026 · वैश्विक रणनीति विशेष ईरान का भस्मासुर — कट्टरपंथ, प्रॉक्सी वॉर और भारत की भू-राजनीतिक चुनौती घर को आग लग गई, घर के ही चिराग़ से शास्त्री मनोज चतुर्वेदी शास्त्री राष्ट्रचिन्तन · मार्च 2026 1979 में जब आयतुल्लाह खोमेनी की इस्लामिक क्रांति ने ईरान में शाह के शासन को उखाड़ फेंका, तो उसे एक नई विश्व-व्यवस्था के उदय के रूप में प्रस्तुत किया गया। किन्तु यह क्रांति वास्तव में एक ऐसी विचारधारा का उदय था जिसने राज्य को धर्म का बंधक बना दिया — और उस बंधन में जकड़े राज्य ने अपने नागरिकों को, अपने पड़ोसियों को, और अंततः स्वयं को भी जलाना शुरू कर दिया। आज पैंतालीस वर्षों बाद ईरान का कट्टरपंथ उसी भस्मासुर की भाँति व्यवहार कर रहा है — जो वरदान माँगकर लाया था, वही उसके विनाश का कारण बन रहा है। और इस आग की लपटें भारत की भू-राजनीतिक सुरक्षा तक भी पहुँच रह...

अखिलेश यादव का टोंटी से मिट्टी के चूल्हे तक का सियासी सफ़र

बदलाव या मजबूरी? अखिलेश यादव की बदलती राजनीतिक छवि और उत्तर प्रदेश की सियासत पर एक राष्ट्रवादी विश्लेषण। राष्ट्रचिन्तन — अखिलेश यादव राजनीतिक विश्लेषण · उत्तर प्रदेश · वंशवाद बनाम जनादेश ▶ मार्च 2026 · UP राजनीति विशेष जब विरासत की राजनीति विचारधारा का विकल्प बनने की कोशिश करे शास्त्री मनोज चतुर्वेदी शास्त्री Rashtra-Chintan · राष्ट्रचिन्तन · मार्च 2026 टोंटी — आधुनिकता का प्रतीक, शहरी विकास का दावा, और एक ऐसे मुख्यमंत्री की छवि जो "काम बोलता है" का नारा लेकर चला था। मिट्टी का चूल्हा — ग्रामीण जीवन का यथार्थ, उस उत्तर प्रदेश की तस्वीर जो लैपटॉप और Expressway की चमक के बाद भी अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए संघर्ष करता रहा। इन दोनों प्रतीकों के बीच की दूरी ही अखिलेश यादव की राजनीति का सबसे ईमानदार दस्तावेज़ है। प्रश्न यह नहीं कि वे टोंटी से चूल्हे तक पहुँचे — प्रश्न यह है कि यह यात्रा वास्तविक राजनीतिक परिपक्वता है, या एक वंशवादी नेता का वह सुनियोजित photo-op जो जनता क...