'हर शाख पे उल्लू बैठा है' के परिप्रेक्ष्य में पार्टी के वैचारिक पतन की एक तीखी राष्ट्रवादी पड़ताल। राष्ट्रचिन्तन — अंजाम-ए-कांग्रेस राजनीतिक विश्लेषण · कांग्रेस का पतन · विशेष आलेख · अप्रैल 2026 ▶ अप्रैल 2026 · राष्ट्रीय राजनीति विशेषांक जो दल अपने बयानों से अपने शत्रु को संजीवनी देता रहे "हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा" — मिर्ज़ा ग़ालिब उसका भविष्य इतिहास पहले ही लिख चुका है म.च. शास्त्री मनोज चतुर्वेदी शास्त्री Rashtra-Chintan · राष्ट्रचिन्तन · अप्रैल 2026 'हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा?' मिर्ज़ा ग़ालिब का यह शेर जब लिखा गया था, तब शायद उन्हें यह नहीं पता था कि डेढ़ सौ वर्ष बाद यह भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी पर इतना सटीक बैठेगा। कांग्रेस का गुलिस्तां आज वह है, जहाँ हर शाख पर एक ऐसा नेता विराजमान है जो अपने ही दल की जड़ें काट रहा है — और भाजपा को घर बैठे संजीवनी दे रहा है। हा...
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