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स्वरा भास्कर जैसे लोगों को तस्वीर के दोनों रुख़ देखने चाहिए

भारत में टुकड़े-टुकड़े गैंग और "बौद्धिक आतंकवाद" की सदस्या स्वरा भास्कर ने ट्वीट करते हुए लिखा,"हम हिंदुत्व के आतंक के साथ ठीक नहीं हो सकते और हम तालिबान के आतंकी हमले से टूट गए हैं और पूरी तरह से सदमें में हैं। हम तालिबान के आतंक से शांत नहीं हो सकते और हम सभी हिंदुत्व के आतंक के बारे में नाराज होते हैं। हमारे मानवीय और नैतिक मूल्य पीड़िता या उत्पीड़क की पहचान पर आधारित नहीं होने चाहिए।"

दूसरी तरफ़ पाकिस्तान में टिकटॉक पर वीडियो बनाने वाली एक महिला ने आरोप लगाया है कि यहां स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त) के मौके पर उसके कपड़े फाड़ दिए गए और उसे लोगों ने हवा में उछाला. इसके साथ ही, लोगों ने महिला के साथ जमकर मारपीट भी की. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक महिला अपने छह साथियों के साथ 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर मीनार-ए-पाकिस्तान के पास एक वीडियो बना रही थी, तभी करीब 300 से 400 लोगों ने उन पर हमला कर दिया. इसको लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो ख़ूब वायरल हो रहा है जिसमें साफ़ देखा जा सकता है कि मज़हबी उन्माद से भरे हुए कुछ जाहिल और गुंडे किस्म के लोग किस प्रकार से हैवानियत और बेशर्मी की सारी हदों को पार करते हुए उस महिला के साथ वहशियाना हरकतें कर रहे हैं और अपनी इस बेशर्मी और हैवानियत की वीडियो भी बना रहे हैं। जिसके बाद से ये मसला इंटरनेट की दुनिया में छाया हुआ है. ट्विटर पर भी #minarepakistan ट्रेंड कर रहा है.

यहां हुई दो घटनाओं से तस्वीर के दो रुख़ स्पष्ट नज़र आते हैं। 
पहला यह कि किस प्रकार से स्वरा भास्कर, बरखा दत्त, जया बच्चन, शबाना आज़मी और शाहीन बाग़ सरीखे आंदोलन में भाग लेने वाली दादियों द्वारा भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नारी सम्मान की परम्परा का अनुचित लाभ उठाया जाता है। भारत में स्वरा भास्कर जैसे लोगों को "हिंदुत्व" का आतंक दिखाई देता है। और वह मानवीय और नैतिक मूल्यों की दुहाई देती हैं। लेकिन जिस प्रकार पाकिस्तान में दुर्योधन और दुःशासन बने मज़हबी गुंडों ने आयशा नामक महिला टिक टॉकर का चीरहरण किया है, उस पर स्वरा भास्कर सहित प्रियंका वाड्रा, सोनिया गांधी, जया बच्चन, शबाना आज़मी, बरखा दत्त, रवीश कुमार और पुण्य प्रसून वाजपेयी जैसे दोगलों को सांप सूंघ गया है। वहां जिस प्रकार से मानवीय और नैतिक मूल्यों का हनन हुआ उस पर कोई मुहं खोलने को तैयार नहीं है। वह तमाम लोग जो स्त्री-पुरुष की समानता और नारी मुक्ति आंदोलन चलाते हैं, चुप हैं। वह तमाम कांगी, वामी और महिला कल्याण के पैरोकार जो दिनरात नारी स्वतंत्रता की बातें करते हैं। वह सब ख़ामोश क्यों हैं? दरअसल, ऐसे लोग जिस थाली में ख़ाते हैं उसी में छेद करते हैं।

और दूसरा रुख जो कि स्वरा भास्कर साहिबा को भी समझना चाहिए कि यह हिंदुत्व की संस्कृति और संस्कार ही हैं कि भारत में किसी ने आपके कपड़े नहीं उतारे, आपको हवाओं में नहीं उछाला, आपके नाज़ुक अंगों को नहीं छेड़ा और न ही आपके साथ कभी मारपीट की है, उसके बाद भी आपको हिंदुत्व में आतंक नज़र आता है।
तो फिर सबसे बेहतर होगा कि आप एक बार मीनारे-पाकिस्तान जरूर घूमकर आइये ताकि आपको मालूम तो हो कि आतंकवाद का अजगर कैसा होता है और वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कैसे निगल जाता है। और शांतिप्रिय और सौहार्दपूर्ण मज़हबी गुंडे किस हद तक वहशी हो सकते हैं।

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

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*विशेष नोट- उपरोक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। उगता भारत समाचार पत्र के सम्पादक मंडल का उनसे सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है। हमारा उद्देश्य जानबूझकर किसी की धार्मिक-जातिगत अथवा व्यक्तिगत आस्था एवं विश्वास को ठेस पहुंचाने नहीं है। यदि जाने-अनजाने ऐसा होता है तो उसके लिए हम करबद्ध होकर क्षमा प्रार्थी हैं।

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