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उद्धव जी ने तो पूरे संत समाज और सम्पूर्ण उत्तरप्रदेश का अपमान किया था

भाजपा के केंद्रीय मंत्री राणे ने रायगढ़ जिले में जन-आशीर्वाद यात्रा के दौरान कथित तौर पर कहा, *‘यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि आजादी को कितने साल हो गए हैं। भाषण के दौरान वह पीछे मुड़कर इस बारे में पूछते नजर आए थे। अगर मैं वहां होता तो उन्हें एक जोरदार थप्पड़ मारता।’* राणे ने दावा किया कि 15 अगस्त को जनता को संबोधित करते समय ठाकरे यह भूल गए थे कि आजादी को कितने साल पूरे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि भाषण के बीच में वह अपने सहयोगियों से पूछ रहे थे कि स्वतंत्रता दिवस को कितने साल हुए हैं।

इस बयान को लेकर महाराष्ट्र में बड़ा बवाल मचा हुआ है। और *"ठाकरे सेना" का यह मानना है कि राणे ने केवल मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र का अपमान किया है।*
अब ज़रा तस्वीर का दूसरा रुख़ देखिये महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ने मई 2018 में पालघर में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ पर कमेंट करते हुए कहा था कि- *"उन्होंने (योगी आदित्यनाथ ने) चप्पल पहनकर शिवाजी की प्रतिमा को माला पहनाई। मेरा मन किया कि उन्हें उन्हीं की चप्पल से उनके चेहरे पर मारुं। वह कोई योगी नहीं है वह भोगी है। यदि वह योगी होते तो सबकुछ छोड़कर चले जाते और गुफा में जाकर रहते, लेकिन वह जाकर सीएम की कुर्सी पर बैठ गए हैं।"*
यहां उल्लेखनीय है कि योगी जी ने चप्पल नहीं खड़ाऊं पहने हुए थे।

 गोरखधाम पीठ के महंत परम पूज्य श्री योगी आदित्यनाथ के प्रति ऐसे अपमानजनक शब्द "हिन्दू शेर" कहे जाने वाले बाला साहेब ठाकरे के सुपुत्र और शिवसेना प्रमुख श्रीमान उद्धव ठाकरे ने कहे थे। क्या श्री ठाकरे का यह बयान सम्पूर्ण हिन्दू समाज का अपमान नहीं था? क्या उत्तरप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी के ख़िलाफ़ दिया गया यह बयान सम्पूर्ण उत्तरप्रदेश का अपमान नहीं माना जाना चाहिए? 
क्या उद्धव जी का यह बयान समस्त हिन्दू साधु-संतों का अपमान नहीं माना जाना चाहिए?

कल तक दूसरों का अपमान करने वाले उद्धव जी की ख़ुद की परछाई पर आज पैर पड़ा तो "ठाकरे सैनिक" चीख पड़े। 

कोई भी सभ्य समाज का व्यक्ति नारायण राणे के वक्तव्य को उचित नहीं ठहरा सकता और न ही हम उसका समर्थन करते हैं। लेकिन क्या यह शर्मनाक नहीं है कि बाला साहेब के उत्ताधिकारी और वीर शिवाजी की भूमि पर जन्मे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को यही नहीं मालूम है कि हमारे देश को स्वतंत्र हुए कितना समय बीत गया है? क्या श्री ठाकरे कभी यह भूले हैं कि वह कुल कितने वर्ष के हो गए हैं? क्या वह कभी अपनी शादी की वर्षगांठ भूले हैं? कभी अपने बच्चों की वर्षगांठ भूले हैं? शायद कभी नहीं भूले हैं। 

सच तो यह है ठाकरे जी पर उनकी बुरी संगत का असर स्पष्ट नज़र आ रहा है। कहीं ठाकरे साहब ने राष्ट्रवादियों का साथ छोड़कर राष्ट्रघातियों का साथ तो नहीं पकड़ लिया?

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

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*विशेष नोट- उपरोक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। उगता भारत समाचार पत्र के सम्पादक मंडल का उनसे सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है। हमारा उद्देश्य जानबूझकर किसी की धार्मिक-जातिगत अथवा व्यक्तिगत आस्था एवं विश्वास को ठेस पहुंचाने नहीं है। यदि जाने-अनजाने ऐसा होता है तो उसके लिए हम करबद्ध होकर क्षमा प्रार्थी हैं।

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