सनातन धर्म की रक्षा वातानुकूलित आश्रमों से जारी किए गए 'प्रमाणपत्रों' से नहीं, अपितु राम मंदिर और बुलडोजर रूपी उस 'राजदण्ड' से होती है, जिसका निर्माण एक 'राजनैतिक हिंदू' करता है। "धर्मस्य मूलं अर्थः, अर्थस्य मूलं राज्यम्।" (धर्म का मूल संसाधन है, और संसाधनों का मूल राज्यसत्ता है।) – आचार्य चाणक्य जब सभ्यतागत शत्रु 'गजवा-ए-हिंद' और 'डेमोग्राफिक जिहाद' के माध्यम से हमारी अस्मिता को निगलने के लिए द्वार पर खड़े हों, तब यह देखना अत्यंत विक्षोभकारी है कि हमारे स्वयंभू मठाधीश 'असली हिंदू कौन है' इसका राजनैतिक 'सेंसर बोर्ड' चला रहे हैं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के हालिया वक्तव्य और उस पर ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अहंकारी पलटवार ने एक आत्मघाती विमर्श को जन्म दिया है। पाठक का यह कथन कि "जो भाजपा का विरोध कर रहा है, वह हिंदू विरोधी है," भाषाई स्तर पर राजनैतिक दर्प प्रतीत हो सकता है, किंतु इसका भू-राजनैतिक (Geopolitical) यथ...
The Intellectual | The Spiritual | The Creative