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सितंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अखिलेश यादव जी इन समाजवादी पप्पुओं से ज़रा सावधान रहिए

इसौली से समाजवादी पार्टी के विधायक अबरार अहमद साहब का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें वह *ब्राह्मण और क्षत्रिय जाति के मतदाताओं को *'चोट्टा'* बोलते हुए सुने जा सकते हैं. अबरार अहमद ने इस वीडियो में कहा कि- *चुनाव जीतने के लिए उन्हें ब्राह्मणों और क्षत्रियों के वोट की जरूरत नहीं है. उनके बिना भी वह जीत सकते हैं.* वह आगे कह रहे हैं कि *"मुसलमान ही उनके वास्तविक वोटर्स हैं."*  यहां मज़े की बात यह है कि इस प्रकार के समाज को तोड़ने और साम्प्रदायिक विद्वेष को बढ़ाने वाले बयान देने वाले सपा नेता अबरार अहमद साहब की ज़बान पर आखिरकार सच आ ही गया। शायद सच यही है कि आजकल उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी मुस्लिम लीग की भूमिका निभा रही है। दरअसल, समाजवादी पार्टी में ब्राह्मण और क्षत्रिय सहित अन्य वर्ग के वोटों की गिनती होती ही नहीं है। वहां तो केवल एक वर्ग विशेष और जाति विशेष के वोटों को ही गिना जाता है, बाकी तो बस लुभाव के वोट माने जाते हैं।  वैसे सपा विधायक ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज पर उंगली उठाने से पहले यह भूल गए कि तीन उंगलियां उनकी ओर भी उठ रही...

टिकैत साहब अब आप भी मीडिया को धमकाने लगे, आप तो ऐसे नहीं थे

किसी ने क्या ख़ूब कहा है कि सच्चाई छुप नहीं सकती, कभी बनावट के उसूलों से। के ख़ुशबू आ नहीं सकती, कभी बनावट के उसूलों से।।  किसानों के स्वयंभू हितैषी बने श्रीमान राकेश टिकैत औऱ उनके भाई श्रीमान नरेश टिकैत पर यह शेर बिल्कुल सटीक बैठता है। टिकैत बंधुओं ने राष्ट्रवादी चैनल ज़ी न्यूज़ के एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद जिस प्रकार की प्रतिक्रिया दी है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देने वाले श्री राकेश टिकैत लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को किस अधिकार से धमका रहे हैं? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ लेकर अनाप-शनाप बयानबाजी करने वालों को मीडिया की आज़ादी रास क्यों नहीं आ रही है। यह तो बिल्कुल वही बात हुई "या तो भेली दे, नहीं तो चल प्रधान के पास।" मतलब या तो कथित किसान नेताओं के सुर में सुर मिलाओ, अन्यथा "किसान विरोधी" कहलाओ। व्हाट एन आइडिया टिकैत जी!  श्री नरेश टिकैत साहब ने स्टिंग ऑपरेशन के दौरान जो सच उगला है, उसने कम से कम "कथित किसान आंदोलन" की कलई तो खोलकर रख ही दी। पूरा देश इस बात को भलीभांति समझ चुका है कि "कथित किसान हितों" की आड़ मे...

यदि वास्तव में ऐसा होता है तो यह "गांधी परिवार" का दुर्भाग्य ही होगा

कांग्रेस ने कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी के कंधों पर अपना सर रख दिया है। कहते हैं कि डूबते को तिनके सहारा चाहिए होता है, और कांग्रेस का जहाज डूब रहा है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि ख़ुद कन्हैया कुमार कह रहे हैं। कन्हैया कुमार वही हैं जो जेएनयू में प्रति वर्ष दुर्दांत आतंकी अफ़ज़ल गुरु की मौत पर "अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं, तेरे क़ातिल जिंदा हैं" कहकर छाती पीट-पीटकर आंसू बहाते थे। यही कन्हैया कुमार कहते थे- भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्लाह, इंशा अल्लाह। यह वही कन्हैया कुमार हैं जो बिहार में बेगूसराय से चुनाव लड़े थे और गिरिराज सिंह ने उन्हें 4 लाख से भी अधिक मतों से हरा दिया था। दूसरे किरदार हैं जिग्नेश मेवाणी, जिन्होंने कहा था कि "मोदी की जीत सामूहिक पागलपन का नतीजा है"। यह कहकर न केवल उन्होंने लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों का अपमान किया था, बल्कि देश के उस प्रत्येक नागरिक को "पागल" बताने दुस्साहस किया था, जिन्होंने श्रीमान मोदी को अपना कीमती मत दिया था। विडम्बना देखिये कि देश की सबसे पुरानी और गांधीवादियों की जमात कांग्रेस पार्टी ने अपनी डूबती हुई नैया ...

श्रीराम मंदिर बनवाकर भाजपा ने महापाप किया था, अब सजा भुगतो

कभी-कभी सोचता हूँ कि श्री अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर बनवाकर भारतीय जनता पार्टी ने महापाप किया। काश अगर इसके स्थान पर बाबरी मस्जिद बनवा दी होती तो पश्चिम बंगाल सहित सभी राज्यों में आज भाजपा की पूर्ण बहुमत से सरकार बन होती। और श्रीमान नरेंद्र मोदी को 21वीं सदी का "महापुरुष" बना दिया गया होता। लेकिन हाय री बदकिस्मती, कि श्रीमान मोदी ने 1990 के श्रीरामभक्तों की वीरगति को नमन करते हुए, श्री अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनवा दिया। श्री मोदी शायद भूल गए कि हिंदुओं को मंदिर नहीं सस्ता पेट्रोल चाहिये, सस्ते प्याज-टमाटर, सस्ता राशन, सरकारी नौकरियां, और मुफ़्त की बिजली और पानी चाहिए। इन्हें गन्ने के बढ़ते हुए दाम और मुफ़्त के लैपटॉप चाहिए। सैंकडों वर्षों से विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन करने वाले गुलामों को गुलामी के प्रतीक सुहाते हैं, इन्हें श्रीराम का मंदिर नहीं चाहिए, इन्हें अस्पताल चाहिए। इन्हें मुफ़्त की वैक्सीन चाहिए, इन्हें ऑक्सीजन के सिलेंडर चाहिए। इनकी मानसिकता खाने, सोने और हगने से ज़्यादा कुछ सोच ही नहीं सकती। यह धर्म के प्रति कभी कृतज्ञ नहीं रहे, यह हमेशा ही कृत...

राकेश टिकैत साहब ने तो तमंचे का लाइसेंस लेकर सीधा तोप का ऑर्डर दे दिया

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बीती 24 सितंबर को अमेरिका के राष्ट्रपति को टैग करके ट्वीट किया। टिकैत ने लिखा कि "भारतीय किसान पीएम मोदी की सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। पिछले 11 महीने के विरोध प्रदर्शन के दौरान 700 किसानों की जान जा चुकी हैं। इस काले कानून से हमारी रक्षा होनी चाहिए। कृपया पीएम मोदी से अपनी मीटिंग में हमारे मुद्दों पर भी ध्यान दें।" इससे पूर्व पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती साहिबा ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान से बात करने की सलाह दी थी। AIMIM अध्यक्ष जनाब असदुद्दीन ओवैसी और नेशनल कांफ्रेंस के फ़ारुख अब्दुल्ला साहब ने तालिबान से बातचीत करने की सलाह दी थी। कांग्रेस नेताओं ने हमेशा ही भारत के अंदरूनी मसलों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाने की कोशिश की है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कश्मीर मसले का अंतरराष्ट्रीयकरण न किया होता तो आज POK हमारा होता। कांग्रेस के युवराज श्री राहुल गांधी ने भी विदेशों में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। अपने घर का झगड़ा चौराहों...

ऐसे तथाकथित ब्राह्मणों को चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए

आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक ऑडियो क्लिप सुनाई पड़ रही है जिसमें दो शख़्स धर्मांतरण को लेकर आपस में टेलीफोन पर वार्तालाप कर रहे हैं, जो कि काफी आपत्तिजनक है। ऑडियो मैसेज में मौलाना कलीम सिद्दीकी दूसरी तरफ एजेंट से कहते हुए साफ सुनाई दे रहे हैं कि धर्मांतरण उस रफ्तार से नहीं हो पा रहे. इसके जवाब में एजेंट मौलाना से बोल रहा है कि लॉकडाउन के चलते हिंदू लड़कियां नहीं मिल पा रही हैं. एजेंट ये भी कहता है कि कुछ छोटी जाति की लड़कियां मिल रही थी... इसपर मौलाना कहते हैं कि नहीं, बड़ी जाति की लड़की खासतौर पर ब्राम्हण वगैरह की लडकियां हों तो ठीक रहेगा. ऑडियो मैसेज से साफ है कि मौलाना बड़े पैमाने पर हिंदू लड़कियों विशेषकर ब्राह्मण वर्ग की लड़कियों के धर्मपरिवर्तन की तैयारियों में लगे थे। हालांकि हम इस ऑडियो क्लिप की पुष्टि नहीं कर रहे। परन्तु दूध में पड़ी हुई मक्खी देखकर उसे अनदेखा करना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। उल्लेखनीय है कि इन मौलाना कलीम सिद्दीकी को उत्तरप्रदेश ATS (एंटी टैरर स्क्वाड) ने जबरन धर्मांतरण सहित कई संगीन आरोपों में गिरफ्तार क...

हिन्दू माता-पिता अपनी बेटियों को मुस्लिम लड़कों के पीछे लगाते हैं-मसूद हाशमी

इस देश में दो प्रकार के आतंकवादी जिहाद चला रहे हैं। एक वह जो "गोली" से आतंकवाद फैलाते हैं, और दूसरे वह हैं जो "बोली" से आतंक फैलाने की साजिश कर रहे हैं। यह दोनों ही प्रकार के आतंकी भारत की एकता, अखंडता और सम्प्रभुता के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।  "बोली" यानी विचारों से आतंकवाद करने वाले लोगों को आप "वैचारिक आतंकी" की संज्ञा दे सकते हैं। वैचारिक आतंकवाद का एक नमूना हमें तब देखने को मिला जब कल राष्ट्रीय स्तर के एक चैनल पर मौलाना कलीम सिद्दीकी साहब की गिरफ्तारी को लेकर एक परिचर्चा (डिबेट) चल रही थी। जिसमें कई पार्टियों के प्रवक्ताओं के साथ-साथ इत्तेहाद सोसायटी के अध्यक्ष और राजनीतिक विश्लेषक मसूद हाशमी भी वहाँ उपस्थित थे। लव जिहाद से सम्बंधित एक प्रश्न के उत्तर में मसूद हाशमी ने कहा कि - *"मुस्लिम लड़के किसी प्रकार का कोई 'लव जिहाद' नहीं करते बल्कि सत्य यह है कि हिन्दू लोग दहेज न देने से बचने के लिए अपनी बहन-बेटियों को मुस्लिम लड़कों के पीछे लगाते हैं।"* हालांकि इस बेहद घटिया औऱ शर्मनाक बयान के बाद कार्यक्रम के एंकर ने तुर...

अखिलेश जी आपने परिवार द्वारा परिवार के लिए परिवार का शासन बना दिया

मीडिया के हवाले से ख़बर मिली है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि "भाजपा के कारण लोकतंत्र कमजोर हुआ है।" यहाँ एक प्रश्न श्री अखिलेश यादव से बनता है कि महोदय क्या मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे गुंडों-माफियाओं के बलबूते पर शासन चलाने वालों के शासनकाल में लोकतंत्र मज़बूत था? लोकतंत्र का अर्थ है- जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का शासन। परन्तु पूर्ववर्ती सरकारों ने लोकतंत्र की परिभाषा को पूरी तरह बदलते हुए इसे - * "परिवार द्वारा, परिवार के लिए, परिवार का शासन बना दिया।"* पूर्ववर्ती सरकारों में मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद जैसे बाहुबलियों ने और गायत्री प्रजापति जैसे भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे राजनीतिज्ञों ने लोकतंत्र का मख़ौल बनाया। आजम खान जैसे लोगों ने गरीब जनता को न्याय दिलाने के स्थान पर पुलिस-प्रशासन को भैंसों की रखवाली पर लगा दिया। संवैधानिक संस्थाओं का इससे बड़ा दुरुपयोग भला और क्या हो सकता है। उत्तरप्रदेश जनता शायद अभी नहीं भूली है कि 2016 में किस प्रकार से सत्तामोह में फंसा "मुलायम कुनबा" एक-दूसरे के प्रति ज़हर उ...

किसान हित तो केवल एक बहाना है, असली मक़सद तो योगी-मोदी को हटाना है

मीडिया सूत्रों से मिली खबरों के अनुसार भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमान राकेश टिकैत ने अपने एक बयान में कहा कि *"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीच में ही अपने पद से हट जाएंगे और वह राष्ट्रपति बनेंगे. उन्होंने यह भी कहा, ''योगी जी का प्रमोशन होना चाहिए, और वह पीएम बन जाएं."* हमारी समझ से यह बाहर की बात है कि कल तक जो राकेश टिकैत किसान हितों की बातें कर रहे थे और मंचों से "अल्लाह हू अकबर" के नारे लगा रहे थे, आज वही राकेश टिकैत किसान भाइयों के हितों की चिंता छोड़कर श्री मोदी-योगी के प्रमोशन  के लिए इतने उतावले क्यों हो रहे हैं। जो टिकैत कल तक "मोदी-योगी मुक्त भारत" बनाने का संकल्प लेकर देशभर में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे, वही टिकैत आज श्री मोदी को राष्ट्रपति और श्री योगी को प्रधानमंत्री बनाने पर क्यों तुले हुए हैं? प्रश्न यह भी है कि बकौल श्रीमान राकेश टिकैत के यदि श्री योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बना दिया गया तो "टिकैत एंड कम्पनी" के प्रायोजक श्रीमान राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने के "हसीन सपनों" पर पानी...

मिलते हैं मुस्कुरा कर वो गले, मगर "ख़ंजर" पीठ पर घोंपते हैं

आजकल उत्तरप्रदेश में बहरूपियों की मानो बाढ़ सी आई हुई है। जिधर देखिये आपको कुछ लोग रामनाम का दोशाला ओढ़े हुए मंदिर-मंदिर भटकते हुए मिल जाएंगे। जहां कुछ लोग राम नाम का जप कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ बहरूपियों को हरे कृष्णा-हरे कृष्णा का जाप करते हुए भी देखा जा सकता है। कुछ तो अपने आपको श्रीकृष्ण का वंशज बताने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। दो बहरूपिये तो विशेष रूप से दिल्ली से इम्पोर्ट हुए हैं, जिनमें से एक सज्जन तो किसी ज़माने में सिनेमाओं के टिकट ब्लैक करने का घोर पाप भी किया करते थे। और उत्तरप्रदेश की जनता ने स्याही से उनका मुहं भी काला कर दिया था, और वह अपना मुहं काला कराकर दबे पांव भाग निकले थे। लेकिन बेशर्मी की हद देखिये कि इतना सबकुछ होने के बावजूद भी वह अपना काला मुहं लेकर उत्तरप्रदेश में पुनः प्रयासरत हैं। एक और भाई-बहन का जगप्रसिद्ध जोड़ा उत्तरप्रदेश में माथा टेकते हुए घूम रहा है, गले में जेएनयू धारण किये हुए, सत्तात्रेय गोत्र के यह पोंगापण्डित इससे पहले भी मंदिरों में काफी माथा फोड़ चुके हैं, लेकिन इनके हाथ में आया बाबा जी का ठुल्लू। मजे की बात यह है कि आजकल जो लोग भग...

राहुल गांधी की बातों में तर्क ढूंढना मतलब चील के घोंसले में मांस ढूंढना

गांधी परिवार के एकमात्र चश्मेचिराग श्री राहुल गांधी ने 14 सितंबर को अखिल भारतीय महिला कांग्रेस समिति को समर्पित एक नए लोगो का अनावरण किया। इस दौरान श्री राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस की विचारधाराओं पर हमला करते हुए कहा, *"मैं अन्य विचारधाराओं के साथ समझौता कर सकता हूं, लेकिन मैं आरएसएस और भाजपा की विचारधारा से कभी समझौता नहीं कर सकता।”*  यहाँ प्रथम प्रश्न तो यह है कि क्या श्री राहुल गांधी यह जानते हैं कि भाजपा और आरएसएस की विचारधारा क्या है? जिन्होंने अपना पूरा जीवन मुगलों, तुर्कों और अफ़ग़ान आक्रान्ताओं की शान में कसीदे गढ़ते हुए निकाल दिया, जो हिंदी, हिन्दू और हिंदुत्व के नाम से घृणा करते हों, जिन्होंने "हिन्दू आतंकवाद" की मनगढ़ंत परिभाषा गढ़ी हो, जो सत्तात्रेय गोत्र के जेएनयूधारी पोंगा पंडित हों, जो गोमांस-भक्षियों को संरक्षक बने हों, और जो अपने अतिथियों को कुत्तों का झूठा परोसते हों, जिन्हें राष्ट्र और राष्ट्रवाद का क ख ग न मालूम हो, वह भला आरएसएस की पवित्र और पावन विचारधाराओं से समझौता कर भी कैसे सकते हैं। सच तो यह है कि श्री राहुल गांधी स्वयं कांग्रेस की वि...

अब्बाजान और चचाजान के बीच फंसे हैं भाईजान

12 सितंबर को यूपी के सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने कुशीनगर में पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए कथिततौर पर कहा था, "अबसे पहले "अब्‍बाजान" कहने वाले गरीबों की नौकरी पर डाका डालते थे। पूरा परिवार झोला लेकर वसूली के लिए निकल पड़ता था। "अब्‍बाजान" कहने वाले राशन हज़म कर जाते थे। राशन नेपाल और बांग्‍लादेश पहुंच जाता था। आज जो गरीबों का राशन निगलेगा, वह जेल चला जाएगा।" उधर स्वयंभू किसान नेता श्री राकेश टिकैत ने बागपत में दिए अपने एक बयान में असदुद्दीन ओवैसी साहब को कथिततौर पर भाजपा का "चचाजान" बताया है।  इस "अब्बाजान" और "चचाजान" के बयानों के बीच कुछ "भाईजान" फंसते नज़र आ रहे हैं। इन "भाईजानों" को श्री योगी का "अब्बाजान" वाला बयान हज़म नहीं हो रहा है, और इन लोगों ने सोशल मीडिया पर #hamare abbahan नाम से एक ट्रेन्ड चला रखा है।  श्री योगी के "अब्बाजान" वाले बयान को लेकर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र के भीखनपुर निवासी तमन्ना हाशमी ने श्री योगी पर अ...

मौलाना जौहर अली यूनिवर्सिटी बनाम राजा महेंद्र प्रताप यूनिवर्सिटी

आज 14 सितंबर 2021 को श्री योगी सरकार ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी है। जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया। राजा महेंद्र प्रताप सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस ज़िले के मुरसान रियासत के राजा थे. जाट परिवार से निकले राजा महेंद्र प्रताप सिंह अपने इलाक़े के काफ़ी पढ़े-लिखे शख़्स तो थे ही, लेखक और पत्रकार की भूमिका भी उन्होंने निभाई. पहले विश्वयुद्ध के दौरान अफ़ग़ानिस्तान जाकर उन्होंने भारत की पहली निर्वासित सरकार बनाई. वे इस निर्वासित सरकार के राष्ट्रपति थे. एक दिसंबर, 1915 को राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने अफ़ग़ानिस्तान में पहली निर्वासित सरकार की घोषणा की थी. निर्वासित सरकार का मतलब यह है कि अंग्रेज़ों के शासन के दौरान स्वतंत्र भारतीय सरकार की घोषणा. राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने जो काम किया था, वही काम बाद में सुभाष चंद्र बोस ने किया था. महात्मा गांधी ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह के बारे में कहा था, "राजा महेंद्र प्रताप के लिए 1915 में ही मेरे हृदय में आदर पैदा हो गया था. उससे पहले भी उनकी ख्याति का हाल अफ़्रीका में ...

पप्पू साहब केवल "पप्पू" बन सकते हैं, प्रधानमंत्री नहीं बन सकते

राजनीति में समझदार व्यक्ति वह होता है जो अपनी लकीर को खींचकर बड़ा करने की कोशिश करता है, वह नहीं जो दूसरों की लकीरों को मिटाकर अपनी लकीर बड़ा करने की सोचता है। विरोध एक सीमा तक सही होता है, लेकिन जब वह हद पार कर जाता है तब वह विरोध न रहकर केवल "पूर्वाग्रह" बन जाता है, और पूर्वाग्रह से ग्रसित व्यक्ति "बेचारा" बनकर रह जाता है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में "पप्पू" कहते हैं। जब आप किसी पर उंगली उठाते हैं तो तीन उंगलियां आपकी तरफ़ भी उठ जाती हैं।  राजनीति में किसी पर उंगली उठाने से पहले यह जरूर समझ लेना चाहिए कि पहले तो आप उसका बेवजह प्रचार करने लगते हैं। सही मायने में आप उसके "स्टार प्रचारक" बन जाते हैं। जिस व्यक्ति की राजनीति "खत्म" करनी हो, तो उसकी चर्चा करना ही बन्द कर दो, वह अपने आप ख़त्म हो जाएगा। दूसरे जब आप किसी का लगातार विरोध करते हैं तो आप केवल उसके अवगुण देखते हैं, उसके गुणों को भूल जाते हैं। आप इतना नकरात्मक हो जाते हैं कि आपके चारों ओर एक नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है और जो भी व्यक्ति आपके सम्पर्क में आता है, वह भ...

मोदी ने सोते हुए हिंदुओं को जगा दिया बस यही उसका अपराध है

विरोध हमेशा उसी का होता है जो या तो किसी का कुछ बना सकता हो या फिर किसी का कुछ बिगाड़ सकता है। जो न तो किसी का कुछ बिगाड़ सकता है और न ही बना सकता है, उसका न तो कोई विरोध होता है और न ही समर्थन। जिसका न विरोध हो और न ही समर्थन, वह व्यक्ति कभी नेता नहीं बन सकता।  आज सम्पूर्ण विपक्ष श्री मोदी का डटकर विरोध कर रहा है और वहीं दूसरी ओर जनता लगातार "हर-हर मोदी, घर-घर मोदी" कर रही है। एक समय था जब भूतपूर्व  प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का जबरदस्त विरोध  हुआ था, और दूसरी ओर उनके समर्थक "इंडिया इज़ इंदिरा, इंदिरा इज़ इंडिया" का नारा बुलंद कर रहे थे। आज वह नारा बदल गया है, अब कहा जा रहा है - मोदी है तो मुमकिन है।  विरोध या समर्थन व्यक्ति का नहीं होता, बल्कि व्यक्तित्व का होता है, विचारों का होता है। मतभेद हमेशा वैचारिक ही होते हैं। *"विचारों से संगठन का निर्माण होता है और संगठन से शक्ति का निर्माण होता है, और जहां शक्ति होती है वहां राष्ट्र का निर्माण होता है।"* इसीलिए कहा जाता है कि संगठन में ही शक्ति है। श्री नरेन्द्र मोदी ने इस देश के हिन्दू समाज को ...

उद्धव ठाकरे साहब यह योगी प्रदेश है यहाँ गुंडाराज नहीं चलता

राजनीतिक गलियारों में ख़बर है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के अखाड़े में श्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना भी मैदान में उतरने का मन बना चुकी है। शिवसेना ने स्पष्ट किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए वह सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। यूपी की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला शिवसेना की प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया है। बैठक में शिवसेना के नेताओं ने योगी सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि "भाजपा सरकार के शासन में उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई है। प्रदेश में बहन-बेटियां कोई भी सुरक्षित नहीं हैं। बेरोजगारी और महंगाई से जनता त्रस्त है।" इस बयान को सुनकर बड़े-बूढों की एक कहावत याद आ गई- "छाज बोले सो बोले, छलनी बोले जिसमें 72 छेद।" योगी सरकार पर उंगली उठाने से पहले शिवसेना को यह भी ज्ञात होना चाहिए कि जब आप किसी दूसरे के ऊपर एक उंगली उठाते हैं तो बदले में तीन उंगलियां आपकी तरफ़ भी ईशारा करती हैं।    शिवसेना का यह कहना है कि उत्तरप्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई है। अब ज़रा शिवसेना यह बताने का कष्ट करे कि महाराष...

महबूबा मुफ़्ती साहिबा सुनिए- महिलाएं केवल बच्चे पैदा करने के लिए होती हैं

महबूबा मुफ्ती ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था, ” इस्लामी इतिहास सशक्त महिलाओं के उदाहरणों से भरा है. हजरत खदीजा तुल कुबरा, पैगंबर एसडब्ल्यूए की पहली पत्नी एक स्वतंत्र और सफल व्यवसायी महिला थीं. हजरत आयशा सिद्दीकी ने ऊंट की लड़ाई लड़ी थी और 13000 सैनिकों के दल का नेतृत्व किया था. मुसलमानों से हमेशा यह साबित करने की अपेक्षा की जाती है कि वे हिंसा के पक्ष में नहीं हैं. मैं देख सकती हूं कि इस धारणा को आगे बढ़ाने के लिए मेरे बयान का इस्तेमाल किस तरह से किया जा रहा है.” हाल ही में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि तालिबान एक हकीकत के रूप में उभर रहा है. "अपने पहले शासन के दौरान उनकी मानवाधिकार विरोधी छवि थी. लेकिन वे दुनिया के लिए एक उदाहरण स्थापित कर सकते हैं अगर वो वास्तविक शरिया कानून का पालन करते हैं जिसमें महिलाओं के अधिकार भी शामिल हैं." उधर तालिबानी संगठन के प्रवक्ता सईद जकरुल्लाह हाशमी (Sayed Zekrullah Hashimi) ने स्थानीय चैनल टोलो न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘एक महिला कभी मंत्री नहीं बन सकती. ये कुछ ऐसा है, जैसे आपने उसकी गर्दन में वो डाल दिया है, ...

एक बार फिर जिन्ना का जिन्न बोतल से बाहर निकला

एक बार फिर जिन्ना का जिन्न बोतल से बाहर निकल आया है। बीजेपी कार्यकर्ता शिवांग तिवारी ने कथिततौर पर खून से खत लिखकर पीएम मोदी से मांग की है कि जिन्ना की तस्वीर हटवाई जाए. वही जिन्ना जिसने पाकिस्तान बनाकर हिंदुस्तान के दो टुकड़े करवाए. उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अलीगढ़ जाने वाले हैं, ऐसे में एक बार फिर जिन्ना की तस्वीर पर विवाद शुरू हो गया है. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने साफ कहा है कि अगर प्रशासन जिन्ना की तस्वीर AMU से नहीं हटाता है तो वो खुद ही ये काम कर देंगे. इससे पहले अगस्त 2021 में हुए करणी सेना के जिला स्तरीय अधिवेशन में करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भाजपा के हरियाणा प्रदेश के प्रवक्ता सूरजपाल अम्मू ने समाज के लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि "एएमयू में जिन्ना की तस्वीर को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो लोग जिन्ना की तस्वीर का समर्थन करते हैं, उन्हें करणी सेना जाने का खर्च देगी और पाकिस्तान के बॉर्डर तक छोड़कर भी आएगी।" मालूम हो कि इससे पहले भी अलीगढ़ से बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने जिन्ना की तस्वीर हटाने की मुहिम शुरू की थी लेकिन ज...

सुना है ब्राह्मणों की थाली में पुलाव आ गया है, लगता है फिर से कोई चुनाव आ गया है

सूत्रों के हवाले से ख़बर है कि कल 12 सितंबर को  बिजनौर में ब्राह्मणों का "महामिलन" होने जा रहा है जिसमें  केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्र "टेनी" पधार रहे हैं। अजय कुमार मिश्र खीरी लोकसभा से सांसद हैं और 2022 में पश्चिमी उत्तरप्रदेश के ब्राह्मण वोटों को भाजपा के पक्ष में एकजुट करने का दारमोदार सांसद केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्र "टेनी" के कंधों पर डाला गया है।  इससे पहले बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र भी बिजनौर का दौरा करके जा चुके हैं। उन्हें भी बसपा पार्टी हाईकमान की ओर से ब्राह्मणों को बसपा के पाले में लाने एक दायित्व सौंपा गया है। अब केवल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के किसी ब्राह्मण नेता के आगमन की प्रतीक्षा है। सही पूछिये तो जैसे कूड़ी के भाग्य 12 साल में एक बार जागते हैं, ठीक वैसे ही ब्राह्मणों के भाग्य भी 5 साल में एक ही बार जागते हैं। इसको कुछ इस तरह समझिये  *सुना है ब्राह्मणों की थाली में पुलाव आ गया है।* *लगता है फिर से कोई चुनाव आ गया है।।* उसके बाद तो ब्राह्मण केवल फुटबॉल बनकर रह जाता है, इस...

एक दिन आप भी हवाई जहाज पर लटकते नज़र आओगे

माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने हाल ही में गोहत्या के एक मामले में टिपण्णी करते हुए कहा कि - *"हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं जब हम अपनी संस्कृति को भूले हैं, तब विदेशियों ने हम पर आक्रमण कर गुलाम बनाया है। आज भी हम न चेते तो अफगानिस्तान पर निरंकुश तालिबानियों का आक्रमण और कब्ज़े को हमें भूलना नहीं चाहिए।"* माननीय उच्च न्यायालय की यह महत्वपूर्ण और समयानुकूल टिप्पणी निश्चित रूप से एक चेतावनी है जो कि भारत में रहने वाले प्रत्येक राष्ट्रभक्त को समझ लेनी चाहिए। यह एक सन्देश है जो कि उन लोगों के लिए एक सबक़ हो सकता है जो कि आज तक इसी भ्रम में जीवन जी रहे हैं कि- *कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।* *सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-जमां हमारा।।* भारत की यह विडंबना रही है कि यहां के कुछ लोगों ने भविष्य के खतरों के प्रति घोर लापरवाही बरतने की भूल की है। हम हमेशा से उस शुतुरमुर्ग की तरह आने वाले खतरों से अनभिज्ञ रहे जो रेत में मुहं देकर बैठ जाता है। हम कबूतर की तरह अपनी आंख मूंदकर यह सोचकर बैठे रहे कि बिल्ली हमें नहीं देख पाएगी। हम कभी इतिहास से यह सीख ही नहीं पाए कि हमारे पूर...

मानो "गिद्धों का कोई झुंड" शाकाहार की उपयोगिता पर व्याख्यान दे रहा हो

आज कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर मुजफ्फरनगर में हुई महापंचायत के फोटो भेजे, यह उन्हीं लोगों के समर्थक हैं जिन्होंने 2013 में उन दो निर्दोष भाइयों को मौत के घाट उतार दिया था, जो अपनी बहन की लाज बचाने के लिए अकेले ही जूझ गए थे। किसानों की आड़ में अपने क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों की क्षतिपूर्ति करने वाले आज महापंचायत में उमड़ी भीड़ को देखकर बहुत प्रसन्न हैं।  कल तक जिन लोगों को गंगा में बहती लाशें दिखाई दे रही थीं, आज उन्हें निर्दोष अफगानी नागरिकों के कटे हुए सरों से फुटबॉल खेलते वहशी और दरिंदे तालिबानी आतंकी नज़र नहीं आ रहे। इन्हें 2013 में मुज्जफरनगर दंगों में मारे गए निर्दोष और लाचार लोगों की लाशें नहीं दिखाई दी थीं। तब यह लोग महोत्सवों में चैन की बंसी बजा रहे थे और फिल्मी कलाकारों और विदेशी नृतकियों के ठुमकों पर ठहाके लगा-लगाकर तालियां बजा रहे थे। पश्चिमी बंगाल में जब "जय श्रीराम" का उदघोष करने वालों को सरेआम मौत के घाट उतारा जा रहा था, माताओं-बहनों की आबरू लूटी जा रही थी, तब यही लोग ममता बानो के साथ गलबहियां कर रहे थे। आज "किसानों" के कंधों पर बंदूक रखकर अपने...