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दो बूंद पप्पूमूत्र की कीमत तुम क्या जानो बाबूजी

आज प्रियंका गांधी सहित तमाम कांग्रेसी नेताओं द्वारा लखीमपुर खीरी कांड पर जो हायतौबा मचाई जा रही है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के इस्तीफे की मांग को लेकर जिस प्रकार से श्रीमती प्रियंका वाड्रा मौनव्रत धारण किये बैठी हैं। और तमाम कांग्रेसी नेता आशीष मिश्रा को दोषी साबित करने पर तुले हैं, उनकी सच्चाई क्या है उसे समझने के लिये थोड़ा फ्लैश बैक में जाना पड़ेगा। ताकि आपको मालूम हो कि कुछ लोगों की मानसिकता कितनी घिनौनी और निम्नस्तर की हो सकती है। गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आर.वी.एस. मनी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा था कि- *"इशरत जहां केस में इशरत को आतंकवादी ना साबित करने के लिए कांग्रेसी नेता कमलनाथ ने उनपर दबाव बनाया था, कमलनाथ ने उनसे बार-बार कहा कि इशरत जहाँ को निर्दोष बता दो, बाहर लोग राहुल गाँधी का मूत्र पीने को तैयार हैं और तुम इतना भी नहीं कर सकते."* जिसका जवाब मणि ने वही दिया, जो किसी भी स्वाभिमानी भारतीय को देना चाहिए था।  आर.वी.एस.मणि ने कहा, कि *‘आपलोग मूत्र का स्वाद जानते हैं, आप इसे पी सकते हैं, लेकिन मैं सच्चाई के लिए खड़ा रहूंगा’।* गृ...

उद्धव ठाकरे साहब ज़रा अपने गिरेबाँ में भी झांककर देख लेते

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसानों की हत्या के विरोध में महाराष्ट्र सत्तारूढ़ गठबंधन ने 11 अक्टूबर को यानी आज राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है. एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के सत्तारूढ़ गठबंधन महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) ने शनिवार को कहा था कि यह दिखाने के लिए बंद का आह्वान किया गया है कि राज्य देश के किसानों के साथ है. शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने शनिवार को कहा था कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसानों की हत्या के विरोध में 11 अक्टूबर को महाराष्ट्र में बंद में पूरी ताकत से भाग लेगी।  अब ज़रा इस गठबंधन सरकार की तस्वीर का दूसरा रुख़ देखिए।  16 अप्रैल 2020 को सैंकड़ों उपद्रवियों ने दो हिंदू साधुओं और उनके एक ड्राइवर की गडचिंचले गांव , पालघर जिला, महाराष्ट्र, में महाराष्ट्र पुलिस की उपस्थिति में लाठी-डंडों से पीट-पीटकर बेहद निर्मम हत्या कर दी थी। यह घटना इतनी दर्दनाक और भयावह थी कि एकबारगी पूरा देश हिल उठ गया था। औऱ उन निर्दोष और असहाय हिन्दू साधुओं की भीड़ से करुण पुकार और उनकी विवशता भरी मुस्कुराहट जैसे मानो कह रहे हों कि- "हे ईश्वर ...

मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों को मुआवजे देने में पक्षपात करने पर जब सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार

आज लखीमपुर खीरी कांड पर राजनीति कर रही समाजवादी पार्टी भले ही प्रदेश की योगी सरकार पर पक्षपात के आरोप लगा रही हो। लेकिन 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों में  तत्कालीन सपा सरकार पर मुआवजे को लेकर पक्षपात का आरोप लगा था और इसपर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी तत्कालीन सपा सरकार को कड़ी फ़टकार लगाई थी। मुजफ्फरनगर दंगों की शुरुआत 27 अगस्त 2013 को कवाल गाँव में कथिततौर पर एक जाट समुदाय की लड़की के साथ एक मुस्लिम युवक द्वारा छेड़खानी की शिकायत पर हुई थी. पीड़ित युवती मलिकपुरा गांव की थी, जिसके द्वारा जानसठ पुलिस में कई बार अपने साथ छेड़खानी की शिकायत की गई थी, लेकिन माना जाता है कि सपा नेताओं के दबाव के चलते इस मामले में पुलिस द्वारा पीड़िता की कोई मदद नहीं की गई। इस घटना के बाद लड़की के दो ममेरे भाइयों गौरव और सचिन और उस मुस्लिम युवक के आपसी संघर्ष में मुस्लिम युवक की मौत हो गई। जिसके बदले हुई जवाबी हिंसा में  दोनों युवकों सचिन और गौरव की जान चली गई। इसके बाद पुलिस कप्तान मंजिल सैनी और डीएम मुजफ्फरनगर सुरेंद्र सिंह जाट के द्वारा कुछ मुस्लिम युवकों को कव्वाल से गिरफ्तार कर लिया ...

क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वास्तव में किसानों के खलनायक हैं

एक राष्ट्रीय समाचार पत्र की ख़बर के अनुसार सुश्री मायावती के शासनकाल में गोरखपुर मंडल की नौ चीनी मिलों को औने-पौने दाम में बेचा गया था। उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड के अधीन प्रदेश की 21 चीनी मिलों को सुश्री मायावती सरकार के कार्यकाल में 2010-11 में बेचा गया था। इनमें से 10 मिलें उस समय चालू हालत में थीं, 11 मिलें बंद थीं। सीएजी की रिपोर्ट में मिलों को गलत तरीके से औने-पौने दाम में बेचे जाने की पुष्टि भी हुई थी। हालांकि बसपा के बाद सत्ता में आई अखिलेश सरकार ने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की थी। मिलों की वर्तमान कीमत से 15 गुना कम कीमत पर इन्हें बेचा गया था। सर्किल रेट और स्टांप ड्यूटी की अनदेखी कर भी करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान कराया गया था। साथ ही मिलों की मशीनों, आवासों, गोदामों का भी मनमाना रेट निर्धारित किया गया था।  इसमें अमरोहा, चांदपुर, जरवल रोड, सिसवा बाजार, सहारनपुर, बुलंदशहर, बिजनौर, सकौती टाडा, रोहाना कला, खड्डा की चीनी मिलें चालू हालत में थी। जबकि बरेली, हरदोई, बाराबंकी, शाहगंज, बैतालपुर, देवरिया, भटनी, घुघली, छितौनी, लक्ष्मीगंज और रामकोला की चीनी मि...

लखीमपुर खीरी में गिद्धों की जमात : लाशों को नोचने में लगे हैं

लखीमपुर खीरी में गिद्धों की जमात एकत्रित हो रही है। लाल, नीले, सफेद कपड़े पहने कई जवान और बूढ़े गिद्ध वहां मंडरा रहे हैं, लाशों को नोचने को तैयार हैं। उन गिद्धों में होड़ सी मची है कौन ज़्यादा नोचकर ले जाएगा। यह मांसाहार नहीं सत्ताधारी गिद्ध हैं जिन्हें मांस नहीं भाता है बल्कि वोट की लालसा रहती है। इतनी गर्मियों में भी यह गिद्ध उत्तरप्रदेश के लखीमपुर खीरी में डेरा डाले पड़े हैं, कोई श्रीनगर जाने को तैयार नहीं है। लाशें तो वहां भी हैं, दो-दो मासूम और निर्दोष शिक्षकों की, लेकिन समस्या यह है कि उन लाशों को नोचने से वोट नहीं मिल सकते। वहां गोलियां मिलती हैं, गद्दियां नहीं। वहां "शांतिदूत" रहते हैं इसलिए यह "क्रांतिदूत" वहां जाने को तैयार नहीं है। क्योंकि यह जानते हैं कि अगर वहां गए तो सीधे गोलियां मिलेंगी, गद्दियां नहीं। और अगर इन्हें किसी ने गोली मार दी तो इनकी लाशों पर कोई रोने वाला भी नहीं मिलेगा। इनके अपने ही इनकी।लाशों को नोचने लगेंगे, क्योंकि गिद्धों को तो लाश चाहिए नोचने के लिए, भले ही वह उनके अपनों की ही क्यों न हो। इसलिए उत्तरप्रदेश में आराम फरमा रहे हैं...

इंदिरा के नक्शेकदम पर चलने वाली प्रियंका गांधी शायद अंजाम पढ़ना भूल गईं

1977 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी पूरे देश में चुनाव हारने के साथ ही पंजाब में भी चुनाव हार गई थी। इस समय भी कांग्रेस की स्थिति ठीक वैसी ही है, जैसी कि 1977 में थी, अंतर केवल इतना है कि उस समय नेतृत्व स्व. इंदिरा गांधी के पास था और आज नेतृत्व श्रीमती सोनिया गांधी के पास है। इंदिरा गांधी किसी दूसरे की सरकार को बर्दाश्त नहीं कर पाती थीं। इसलिए उन्होंने पंजाब में प्रकाश सिह बादल की सरकार को अस्थिर करने के लिए भिंडरावाले को खड़ा किया था। इंदिरा गांधी ने ही जनरैल सिंह भिंडरावाले को एक संत से आतंकवादी बनाया था। यह खुलासा प्रसिद्ध लेखक स्वर्गीय कुलदीप नैयर ने अपनी आत्मकथा ‘बियॉन्ड द लाइन’ में किया था। उनकी आत्मकथा के कुछ अंश इंडिया टुडे ने प्रकाशित किये हैं। इंडिया टुडे में ‘बियॉन्ड द लाइन’ के प्रकाशित अंश के अनुसार संजय गांधी और ज्ञानी जैल सिंह ने मिलकर जरनैल सिंह भिंडरावाले को पैदा किया था। जिसके पुरुस्कार स्वरूप  ज्ञानी जैलसिंह को भारत का राष्ट्रपति बना दिया गया था।   कुलदीप नैयर ने अपनी किताब में लिखा है कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलन...

लखीमपुर खीरी कांड की तुलना जलियांवाला बाग कांड से करने वालो अपने गिरेबां में भी तो झांक लो

पंजाब के निवर्तमान मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता चरण जीत सिंह चन्नी सहित कुछ विपक्षी नेताओं,  पप्पूजीवियों, आन्दोलजीवियों, टुकड़े-टुकड़े गैंग और जिहादियों का आरोप है कि लखीमपुर खीरी कांड ने जलियांवाला बाग कांड की याद ताज़ा कर दी। *२१ जुलाई १९९३* को पश्चिम बंगाल में तत्कालीन कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ कलकत्ता में राइटर्स बिल्डिंग तक एक विरोध मार्च का आयोजन किया गया था। उनकी मांग थी कि सीपीएम की "वैज्ञानिक धांधली" को रोकने के लिए वोटर आईडी कार्ड को वोटिंग के लिए एकमात्र आवश्यक दस्तावेज बनाया जाए। विरोध के दौरान पुलिस ने १३ लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी और कई अन्य घायल हो गए। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने कहा था कि "पुलिस ने अच्छा काम किया है।" २०१४ की जांच के दौरान, उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुशांत चटर्जी ने पुलिस की प्रतिक्रिया को *"अकारण और असंवैधानिक" बताया। न्यायमूर्ति चटर्जी ने कहा, *"आयोग इस नतीजे पर पहुंचा है कि यह मामला जलियांवाला ...

मुनीश साहब, औलाद तो राहुल गांधी की भी नहीं है, तो क्या वह भी......

लखीमपुर खीरी कांड पर विपक्ष विशेष रूप से कॉंग्रेस खुलकर राजनीति कर रहा है,  इसी क्रम में बिजनौर कांग्रेस कमेटी के  जिला उपाध्यक्ष श्रीमान मुनीश त्यागी जी ने मीडिया को दिए अपने एक वक्तव्य में कहा कि - "जनता का दर्द वह क्या समझेगा जिसके कोई औलाद नहीं है। ये बे-औलादों की सरकार है।" यह पहला मौका नहीं है जब किसी विपक्षी नेता ने श्री योगी-मोदी की सरकार को बे-औलादों की सरकार बताया है। इससे पहले भी विपक्ष इस तरह के घटिया और शर्मनाक बयान देता रहा है। सोशल मीडिया पर भी अक्सर श्री योगी-मोदी पर इस प्रकार की घोर आपत्तिजनक टिप्पणियां होती रहती हैं। लेकिन कांग्रेसियों को यह कहते हुए ख़ुद के गिरेबान में भी झांककर देखना चाहिए कि वह जिन श्री राहुल गांधी साहब को देश की राजगद्दी सौंपना चाहते हैं, उनके ख़ुद की कितनी औलादें हैं, तो क्या वह भी जनता के दर्द को नहीं समझते? जिन ममता दीदी और मायावती बहनजी की कांग्रेस गलबहियां कर रही है, उनके कितने पुत्र-पुत्रियां हैं? कांग्रेस को यह समझना चाहिये कि राजनीति में परिवार की जरूरत उन्हें होती है, जो परिवारवाद की राजनीति करते हैं। गांधी परिवार, लाल...

लखीमपुर खीरी कांड- ब्राह्मण समाज के विरुद्ध कोई सोचा-समझा षड्यंत्र तो नहीं है

कल तक एक कुख्यात अपराधी विकास दुबे की हत्या पर छाती पीटकर विधवा विलाप करने वाले, श्रीमान योगी का ख़ौफ़ दिखाकर ब्राह्मणों पर कथित अत्याचारों का हवाला देकर घड़ियाली आंसू बहाने वाले, ब्राह्मण समाज को वोटबैंक समझकर उनका इस्तेमाल करने वाले और ब्राह्मणों को अपने पाले में करने के लिए "प्रबुद्ध सम्मेलन" करने वाले तमाम स्वयम्भू "ब्राह्मण नेता" और "ब्राह्मण हितैषी विपक्षी दल" अब कहाँ चले गए? क्या इन्हें मालूम नहीं है कि लखीमपुर खीरी में भोलेभाले किसानों की आड़ लेकर कुछ बेरहम लोगों ने शुभम मिश्र पुत्र विजय कुमार मिश्र और हरिओम मिश्र पुत्र परसेहरा, फरधान (अजय मिश्रा का ड्राइवर) की बड़ी निर्दयता से पीट-पीटकर हत्या कर दी। जो लोग बात-बात पर समुदाय विशेष पर  मॉबलिंचिंग की दुहाई देते रहते हैं, क्या वह इस नृशंस हत्याकांड को मॉबलिंचिंग नहीं मानेंगे? हम इस बात से कदापि इंकार नहीं कर रहे कि लखीमपुर खीरी में जो कुछ भी हुआ वह किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता। परन्तु प्रश्न यह है कि यदि यह मान भी लिया जाए कि किन्हीं परिस्थितियों में तथाकथित रूप से कुछ किसान दु...

कांग्रेस का सबसे बड़ा शत्रु मोदी नहीं बल्कि ममता, मुलायम, लालू जैसे सेक्युलर हैं

कांग्रेस शासित प्रदेशों पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार की स्थिति डांवाडोल है। पंजाब के हालात तो अब असामान्य से होने लगे हैं। टुकड़े-टुकड़े गैंग के चीफ़ कन्हैया कुमार के "शुभ कदमों" के पड़ते ही कांग्रेस पार्टी का टुकड़े-टुकड़े होना आरम्भ हो गया है। इसे कुछ यूं कहिये कि "जहां गए दास मलूका, वहीं पड़ गया सूखा।।" उधर उत्तरप्रदेश में "बोटी-बोटी गैंग" के मुखिया कहे जाने वाले इमरान मसूद साहब ने भी सुर बदलते हुए कांग्रेस को सपा के समक्ष आत्मसमर्पण करने की सी नसीहत दे डाली है। दूसरे शब्दों में कहें तो कन्हैया कुमार की तरह ही इमरान मसूद साहब ने भी कांग्रेस के जहाज को डूबता हुआ बताना शुरू कर दिया है। उल्लेखनीय है कि यह वही इमरान मसूद साहब हैं जिन्हें कांग्रेस आलाकमान ने ज़मीन से उठाकर एकदम से आसमान पर बैठा लिया था। उसका कारण केवल इतना भर था कि इमरान मसूद साहब ने कथितरूप से देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की "बोटी-बोटी" अलग करने का दम भरा था। और कांग्रेस हर उस व्यक्ति को गले लगाने के लिए एकदम से तैयार रहती है, जो श्री मोदी-योगी का अ...