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भेड़िया अगर भेड़ की खाल पहन भी ले तो भी.....

एक पंडित जी के घर एक छोटी सी बच्ची आई जिसने पंडित जी को एक प्लेट में खीर दी, पंडित जी ने उस बच्ची से पूछा कि - बेटे, आज ये खीर किस खुशी में लाई हो? बच्ची बड़ी मासूमियत से बोली कि पंडित जी, इस खीर में कुत्ता मुहं मार गया था, इसलिए मम्मी ने कहा कि जाओ यह खीर पंडित जी को दे आओ, वह इसे अपने मंत्रों से पवित्र कर देंगे। पंडित जी को बहुत क्रोध आया उन्होंने उस खीर से भरी प्लेट को फर्श पर पटक दिया, प्लेट टूट गई। प्लेट के टूटते ही वह बच्ची दहाड़ मारकर रोने लगी। पंडित जी क्रोध में लालपीले होते हुए बोले- तू क्यों रो रही है। धर्म तो मेरा भ्रष्ट हुआ है। बच्ची बिलखते हुए बोली, पंडित जी इस प्लेट में मम्मी मेरी गन्दगी फेंकती थीं, अब मैं नई प्लेट कहाँ से लाऊंगी।

ठीक यही स्थिति उत्तरप्रदेश के ब्राह्मणों की है। आज लगभग प्रत्येक पार्टी अपनी गन्दगी ब्राह्मणों को परोसना चाहती है, ताकि ब्राह्मण उनके दुष्कर्मों, अपराधों और दुराचरण को क्षमा कर उन्हें पवित्र बना दें।
यह वही राजनीतिक दल और संगठन हैं जिनकी नींव ही ब्राह्मण विरोध पर रखी गई थी। औरंगज़ेब और बाबरभक्तों को शांतिदूत बताने वाले और उन मुस्लिम आक्रांताओं, लुटेरों और अय्याशों की शान में कसीदे गढ़ने वाले जिन्होंने ब्राह्मणों का नरसंहार किया, लाखों जनेऊधारी इनकी नफरत के शिकार हुए, उन आतंकियों को शरण देने वाले और उनकी पैरोकारी करने वाले जिन्होंने कश्मीर में लाखों पंडितों का कत्लेआम किया, उनकी बहन-बेटियों की इज़्ज़त लूटी, वह तमाम राजनीतिक दल/संगठन आज प्रदेश के ब्राह्मणों को अपनी गन्दगी परोस कर पवित्र होना चाहते हैं।

बाबरी मस्ज़िद की पैरवी करने वाले और मुगल संग्रहालय का निर्माण कर हमारे जख्मों पर नमक छिड़कने वाले, आज ब्राह्मणों को सम्मान देने का वादा कर रहे हैं।

जिनकी सियासत ही ब्राह्मणों के विरोध से शुरू होती हो, जिन्होंने सदैव ब्राह्मणों का अपमान किया हो, जिन्होंने ब्राह्मणों को नीचा दिखाने का हरसम्भव प्रयास किया हो, वह आज ब्राह्मण हितैषी दिखाने की कोशिश में लगे हैं।

बाबर, औरंगजेब और तैमूर लंग जैसे क्रूर आक्रांताओं, हत्यारों और लुटेरों को अपना आका बताने वाले क्या कभी ब्राह्मणों के शुभचिंतक हो सकते हैं? जो लोग आज टोपियां उतारकर तिलक लगाए घूम रहे हैं, वह यह क्यों भूल रहे हैं कि ब्राह्मण बुद्धिजीवी होता है, वह जानता है कि भेड़िया अगर भेड़ की खाल पहन भी ले तो वह खून पीना नहीं भूल जाएगा।

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

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