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मुन्नवर राना साहब सौ कौरव पैदा करके धृष्टराष्ट्र बनने से क्या लाभ होगा

उत्तरप्रदेश जनसंख्या नियंत्रण कानून पर "दरबारी शायर" और कथित बुद्धिजीवी मुन्नवर राना साहब ने एक बयान देते हुए कहा कि- *“दो से ज्यादा बच्चे इसलिए पैदा किए जाते हैं क्योंकि दो बच्चे एनकाउंटर में मार दिए जाते हैं. एकाध को कोरोना हो जाता है. एकाध एक्सीडेंट में भी मर जाता है. ये वैसे ही है जैसे लोग मुर्गी के 8-10 बच्चे खरीदते हैं. एक-दो बच जाएं तो बच जाएं. हिंदू हो या मुसलमान, एक से ज्यादा बच्चे इसलिए पैदा करता है ताकि कम से कम कोई एक बच्चा कहीं से पंचर जोड़कर, रोटी कमाकर लाए और खिला सके, बाकियों को तो आप मार देंगे.”* 
राना साहब का यह बयान सिद्ध करता है कि शायद उन्होंने महापुराण "महाभारत" का अध्ययन नहीं किया और न ही उन्होंने चोपड़ा साहब का "महाभारत" सीरियल ही देखा है। काश अगर देखा होता तो उन्हें मालूम होता कि हस्तिनापुर सम्राट धृष्टराष्ट्र के 100 पुत्र थे जिन्हें कौरव कहा जाता है। और महाराज पांडु के मात्र 5 पुत्र थे, जिन्हें पांडव कहा जाता है। कौरवों के अहंकार और ज़िद के कारण "महाभारत युद्ध" हुआ और उसमें सभी कौरव मारे गए और पांचों पांडव जीवित रहे। कौरव अहंकारी, दुराचारी और अत्याचारी थे जो अपनी हठधर्मिता के लिए लड़े जबकि पांडव अंत तक सत्य, न्याय और धर्म के साथ खड़े रहे। और अंततः पांडवों की जीत हुई और कौरवों की हार। कौरवों के पिता महाराज धृष्टराष्ट्र और माता गांधारी के सौ पुत्र होने के पश्चात भी वृद्धावस्था में उनका पालन-पोषण पांडवों ने ही किया और उनकी मृत्यु के पश्चात उनका श्राद्ध कर्म इत्यादि भी पांडवों द्वारा ही किया गया। 

मुन्नवर राना साहब 100 "कसाब" पैदा करने से कहीं बेहतर है कि एक "कलाम" पैदा कर लिया जाए। 
एक कहावत है- पूत "कपूत" तो धन क्या करना और पूत "सपूत" तो धन क्या करना। जिसका जीता-जागता उदाहरण हैं हमारे प्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, जिन्होंने अपने "ग़रीब परिवार" का नाम रौशन कर दिया, और दूसरी तरफ़ आपके चहेते "युवराज" जिन्होंने "शाही परिवार" का नाम ख़राब कर दिया। 

मुन्नवर राना साहब एक बात और समझ लीजिए, यह भारत है, यहां की पवित्र भूमि पर श्रीकृष्ण जैसे महायोगी, महाराणा प्रताप और वीर शिवाजी जैसे महायोद्धा, चाणक्य जैसे कूटनीतिज्ञ, महात्मा बुद्ध और कबीरदास जैसे संत और महापुरुष अवतरित होते हैं, मुर्गी के बच्चे नहीं।

मुन्नवर साहब अगर आपको "मुर्गी के बच्चे" पैदा करने का शौक़ है तो "पड़ोसी मुल्क़" में चले जाइये, मुर्गी का तो पता नहीं लेकिन आपको गधे के बच्चे वहां बहुत मिल जाएंगे। आप चाहें तो उन्हें चीन को बेचकर बुढ़ापा अच्छी तरह से काट सकते हैं।

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

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*विशेष नोट- उपरोक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। उगता भारत समाचार पत्र के सम्पादक मंडल का उनसे सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है। हमारा उद्देश्य जानबूझकर किसी की धार्मिक-जातिगत अथवा व्यक्तिगत आस्था एवं विश्वास को ठेस पहुंचाने नहीं है। यदि जाने-अनजाने ऐसा होता है तो उसके लिए हम करबद्ध होकर क्षमा प्रार्थी हैं।

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