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ओवैसी साहब, बाप बनने की कोशिश मत करो, बेटा बनकर रहो

आपने एक कहावत जरूर सुनी होगी, जो गरजते हैं, वो बरसते नहीं। आपने अक्सर देखा होगा कि कुत्ता जब किसी गाड़ी के पीछे भागता है, तो सिर्फ़ भौंकता है, वो क्यों भागता है और क्यों भौंकता है इसपर शायद ही आपने कभी विचार किया हो। दरअसल कुत्ते को गाड़ी से कुछ लेना-देना नहीं होता, लेकिन उसके वजूद और उसकी रफ़्तार से डरता है और इसीलिए वह उसके पीछे भौंकते हुए दौड़ता है।

अकबरुद्दीन ओवैसी साहब ने कहा कि "हमने 800 साल इस देश में हुक़ूमत की है". बेशक की होगी, लेकिन ओवैसी साहब आपने यह हुकूमत उनपर की है जिनके साथ आप जय भीम-जय मीम का नारा लगाते हैं, हमपर नहीं। हम उनकी औलादें हैं जिन्होंने महाभारत की है, जिसके कारण आज भी उस मैदान की मिट्टी लाल ही निकलती है। 
आप कहते हैं कि 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दीजिये तो 100 करोड़ हिंदुओं को काट देंगे। ओवैसी साहब जब 800 साल तक आपकी हुक़ूमत थी, जब पुलिस भी आपकी ही थी और जज भी आपका, तब आपने इन हिंदुओं को जिंदा क्यों छोड़ दिया था।

आप जिन्ना बनना चाहते हैं, शौक से बनिये, हम तो चाहते हैं कि भारत का मुसलमान आपको जिन्ना मान ले लेकिन दिक़्क़त यह है कि इस मुसलमान ने तो उस जिन्ना की नहीं सुनी तो यह आपकी क्या सुनेगा। 

ओवैसी साहब, आप कभी हैदराबाद से बाहर निकले हैं, शायद नहीं। अपनी गली में तो कुत्ता भी शेर होता है। कभी हैदराबाद से बाहर निकल कर देखिये जनाब, आपको अपनी औक़ात समझ आ जायेगी। 

ओवैसी साहब हमने महाभारत से लेकर अंग्रेजों तक हमेशा हुक़ूमत के ख़िलाफ़ ही लड़ाइयां लड़ी हैं, हमने कारगिल भी लड़ा है और 93,000 आप जैसे लड़ाकुओं को घुटने के बल रेंगने को मजबूर भी किया है।

ओवैसी साहब, हम वीर शिवाजी और महाराणा प्रताप की औलादें हैं, किसी मीरजाफ़र की नाजायज़ संताने नहीं।

आप कहते हैं कि आपके बाप ने ताजमहल बनाया, कुतुबमीनार बनाई, लालकिला बनाया। बेशक बनाया होगा, लेकिन जिस ज़मीन पर आपके बाप ने इमारतें खड़ी की हैं वो ज़मीन आपके बाप की नहीं थी बल्कि वो ज़मीन हमारे बाप-दादाओं की थी। जिन्हें आप अपना बाप बता रहे हैं, उन्हें हम अवैध घुसपैठिया, आक्रांता और लुटेरे के नाम से जानते हैं। और हमें नहीं लगता कि आप जैसे शरीफ़, इज्जतदार और रसूखदार का बाप कोई लुटेरा या घुसपैठिया होगा।

ओवैसी साहब, बाप बनने की कोशिश मत कीजिये, क्योंकि बाप बनकर आज तक कोई नहीं खा सका, अलबत्ता बेटा बनकर सबने खाया है।

आप यह मत समझिए कि हम ख़ामोश हैं तो चीखना नहीं जानते, हम चीखना भी जानते हैं और चीख निकलवाना भी जानते हैं। ये मत समझना कि हमने चूड़ियां पहन रखी हैं।

ओवैसी साहब, जिन्होंने हिंदुस्तान पर हुक़ूमत की थीं वो तो अपनी औलादों को लेकर चले गए, लेकिन आप जैसे "केयरटेकर" यहां छोड़ गए। केयरटेकर का मतलब समझते हैं न आप।

एक शेर अर्ज है, ज़रा ग़ौर फ़रमाइये-

"हमको डरा सको ये तुम में दम नहीं।
तुम हमसे हो, तुमसे हम नहीं।।"

अल्लाह हाफ़िज़

*-मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*

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