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पराजित राष्ट्र, और पराजित मन प्राय: विजेताओं के संस्कार और संस्कृति को स्वीकार करते हैं


धारावाहिक चाणक्य के एक भाग में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि–
“भय सिर्फ यवनों की दासता का नहीं है, भय उनकी सांस्कृतिक दासता का भी है. अनुभव कहता है कि पराजित राष्ट्र, और पराजित मन प्राय: विजेताओं के संस्कार और संस्कृति को स्वीकार करते हैं".
इन थोड़े से शब्दों में जो सत्य छिपा है, जो भाव छिपा है, जो राष्ट्रवाद छिपा है, उसे आज गहराई से समझने की परम आवश्यकता है।

आज CAA-NRC के विरोध की आड़ में इस देश में जो ज़हर की खेती की जा रही है, उसके लिए ज़मीन हमारा पारंपरिक दुश्मन देश पाकिस्तान तैयार कर रहा है।
जिस विचारधारा को पुष्पित-पल्लवित किया जा रहा है वह *इस्लामिक राष्ट्र* की विचारधारा है।
इनका नायक कोई और नहीं, बल्कि ज़ाकिर नाईक और हाफ़िज़ सईद हैं, इनके प्रेरणास्रोत अल-बगदादी और ओसामा हैं।

यह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे इस्लामिक कट्टरपंथी संगठनों के इशारों पर काम कर रहे हैं, इनका एकमात्र उद्देश्य भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना है। यह लोग अपने को केवल राष्ट्रवादी नहीं कहते बल्कि राष्ट्रवादी-मुसलमान कहते हैं, यह अखण्ड भारत की बात कभी नहीं करेंगे बल्कि हमेशा "मुस्लिम-भारत" की ही बात करेंगे।

समस्या इस्लाम या मुसलमान से नहीं है, बल्कि समस्या इस्लामिक राष्ट्र या मुस्लिम-भारत से है। क्योंकि यह हमें पराधीन बना देगा, यह हमारी संस्कृति, हमारे विश्वास, हमारी आस्था और हमारी सभ्यता को ग़ुलाम बना देगा। हम उनके संस्कृतिक दास बन जाएंगे। जो सही मायने में उनका मूल एजेंडा है।


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