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क्या कांग्रेस, ओवैसी और उnके चेले-चपाटों के पास हमारे इन सवालों के जवाब हैं

पूरा देश NRC और CAA को लेकर हिंसा और नफरत की आग में जल रहा है और सोशल मीडिया और वामपंथी चैनल उसमें झूठ और अफवाहों का घी डालकर उसे और भड़का रहा है. विपक्षी दल उस आग पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं. लेकिन क्या किसी के पास हमारे निम्न सवालों के जवाब हैं-

१.       पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे मुल्कों में जो हिन्दू बसे हैं, वह न तो ब्राह्मण हैं, न बनिये और न ठाकुर, वह दलित वर्ग के हैं या सिख हैं. तो क्या विपक्ष हमारे दलित और सिख भाइयों को यूँ ही मरने के लिए छोड़ देना चाहता है?
२.       क्या कारण है कि कांग्रेस ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को आज तक लागू नहीं करने दिया? जबकि उसमें साफ शब्दों में लिखा है कि हिन्दुस्तान में मुसलमानों की आर्थिक और सामाजिक हालात दलितों से भी बदतर है.
३.       पुरे विश्व में भारत एक ऐसा देश है जहाँ मुसलमानों की जनसंख्या दुसरे नम्बर पर आती है. यहाँ करीब ३० करोड़ मुसलमान हैं उसके बावजूद वह अल्पसंख्यक कहलाता है और उसको सारे लाभ मिलते हैं. क्या भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यक माना जाना चाहिए?
४.       जब मोदी सरकार उज्ज्वला योजना चला रही थी, घर-घर में शौचालय बनवा रही थी, आवास योजना के तहत ढाई-ढाई लाख बाँट रही थी, अल्पसंख्यक समाज के छात्रों को छात्रवृत्ति बाँट रही थी, सबका विश्वास जीतने के लिए मुसलमानों को भाजपा की सदस्यता दे रही थी, ५६६ विदेशी मुस्लिमों को नागरिकता दे रही थी जिसमें अदनान सामी भी शामिल हैं, तब मुस्लिमों के हमदर्द विपक्षी दल कहाँ सो रहे थे?
५.       नागरिकता संशोधन बिल (जो अब कानून बन चूका है) जब लोकसभा फिर राज्यसभा और फिर राष्ट्रपति महोदय के पास गया था तब मुसलमानों के हमदर्द कहाँ थे? तब उन्होंने जनता-जनार्दन को सडकों पर क्यों नहीं बुलाया? सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इन्तजार क्यों नहीं किया गया?
६.       जिसके पास न पासपोर्ट है, न वीजा, न आधार कार्ड, न पैन कार्ड, न स्कूल सर्टिफिकेट, न कालेज सर्टिफिकेट, न मृत्यु प्रमाणपत्र, न जन्म प्रमाणपत्र, न वोटर आईडी, न बैंक में खाता, न बिजली-पानी का बिल, न मोबाइल सिम और न जिसे उसके समुदाय के दो जिम्मेदार लोग जानते हैं, उस इन्सान को इस देश का नागरिक कैसे माना जा सकता है?
७.       जब आज आप समानता के अधिकारों की दुहाई दे रहे हैं तो फिर समान नागरिक सहिंता कानून का विरोध क्यों किया जाता है? शरिया क़ानून की वकालत क्यों की जाती है? अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक का रोना क्यों रोया जाता है?
८.       इस देश में पाकिस्तान जिंदाबाद, भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह-इंशाअल्लाह, हिंदुत्व की कब्र खुदेगी-एएमयू की छाती पर, जैसे नारे क्यों लगाये जाते हैं? और कौन लगाता है?
९.       जब कश्मीर से लाखों कश्मीरी पंडितों को निकाला गया, जब अकबरुद्दीन ओवैसी ने सिर्फ १५ मिनट में हिन्दुओं को काटने की बात कही थी, आजम खान ने भारत माता को डायन कहा था, सैफुद्दीन सोज ने कश्मीर राज्य को पाकिस्तान को सौंपने की वकालत की थी, जब मुलायम सिंह यादव ने निहत्थे रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं थीं, जब १९८४ में हजारों निर्दोष सिखों को कत्ल किया गया था, जब १९६६ में निर्दोष साधू-संतों पर गोलियां चलवाई गई थीं, जब आतंकियों ने बम धमाकों में हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था, जब भागलपुर हत्याकांड हुआ, मुजफ्फरनगर में कत्लेआम हुआ तब संविधान की आत्मा को दुःख नहीं हुआ था क्या?
१०.   भाजपा और आरआरएस से नफरत करने वालों को पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया, जाकिर नायक, अजमल कसाब, याकूब मेमन, अफजल गुरु, बुरहान वानी, कश्मीरी पत्थरबाज, सिमी, हाफिज सईद और बंगाली आतंकी “बेचारे” और “भटके हुए नौजवान” क्यों दिखाई देते हैं?   

जवाब तार्किक और तथ्यपूर्ण होने चाहियें. फालतू की बकवास नहीं चाहिए.

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