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सांप खतरनाक नहीं होता, खतरनाक तो उसका जहर होता है

NRC और CAA के विरोध की आड़ में पूरे देश में आगजनी, तोड़फोड़, हिंसा और पत्थरबाजी की घटनाएँ हुईं जिसमें कई लोगों की मौत हो गई और सैंकड़ों लोग जिसमें पुलिसवाले भी शामिल हैं अभी भी घायल हैं, जिनमें से कईयों की हालत अभी भी गम्भीर बनी हुई है. खुफिया विभाग की रिपोर्ट्स के अनुसार इन हिंसात्मक आंदोलनों के पीछे जिन लोगों का हाथ बताया जा रहा है उनमें प्रमुख नाम पौपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया का नाम सामने आ रहा है. मीडिया के अनुसार खबरें मिल रही हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार PFI यानि पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया पर प्रतिबन्ध लगाने की तैयारी कर रही है. एक लम्बे समय से भाजपा और संघ सहित कई हिन्दू सन्गठन PFI यानि पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया नामक संगठन पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग कर चुके हैं. उनकी दलील है कि यह तमाम और कामों के अलावा धर्मांतरण और आईएसआईएस जैसे खूंखार आतंकी संगठनों में देश के नौजवानों को भर्ती करवाने का काम करती है. दरअसल भाजपा और संघ विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने वाले कांग्रेसी और वामपंथी दल इसकी हमेशा से पैरोकारी करते रहे हैं जिसके कारण केरल में आज तक इसपर प्रतिबन्ध नहीं लग पाया है. लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल किसी संगठन पर प्रतिबन्ध लगाने से उन गतिविधियों को रोका जा सकता है जिनसे देश को भीतर से खोखला किया जा रहा है, जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं, हिंसा, आगजनी और पत्थरबाजी को उचित ठहरा रहे हैं, देश की सेना और पुलिस पर हमले कर रहे हैं, शायद नहीं. क्योंकि किसी भी संगठन का जन्म विचारधारा से होता है, और विचारधारा जब तक जीवित है संगठनों के जन्म होते रहेंगे, केवल उनके नाम बदलते रहेंगे लेकिन विचारधारा वही रहेगी. इसलिए विचारधारा को समाप्त करना होगा, उसे समझना होगा. जिन लोगों ने कहा था कि- “हंसकर लिया था पाकिस्तान, लड़कर लेंगे हिंदुस्तान”. उन लोगों की विचारधाराओं को पुष्पित-पल्लवित करने में इन संगठनों और इसके संस्थापकों की महत्वपूर्ण भूमिका है. जरूरत यह समझने की है कि आखिर इस विचारधारा को कैसे समाप्त किया जाये. सांप खतरनाक नहीं होता, खतरा उसके जहर से होता है. इसलिए सांप को मारने से बेहतर है कि उसके जहर को बाहर निकाल दो. बिना जहर के सांप एक रस्सी से ज्यादा कुछ भी नहीं. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि इन आंदोलनों में जामिया मिलिया इस्लामिया, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के साथ-साथ जेएनयू और एनएसयूआई भी शामिल रही है. जेएनयू वही यूनिवर्सिटी है जिसमें संसद हमले के आरोपी अफजल गुरु की बरसी मनाई गई थी.

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