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JNU अर्थात "ज़िहाद निर्माण यूनिवर्सिटी" में आये दिन प्रोटेस्ट के नाम पर गुंडागर्दी क्यों हो रही है

लव जिहाद की अवैध सन्तानों द्वारा JNU अर्थात "ज़िहाद निर्माण यूनिवर्सिटी" में आये दिन प्रोटेस्ट के नाम पर गुंडागर्दी हो क्यों हो रही है। कोई नहीं जानता कि #Congress और वामपंथी सरकारों ने इन गुंडों को क्यों पाल रखा था। अब जबकि #bjp सरकार ने इन आवारा और बेलगाम सांडों के मुहं में लगाम लगाने की पूरी तैयारी कर ली है, तब इन हरामखोरों और नशाखोरों को कौन लोग शह दे रहे हैं, यह जानना और समझना कोई विशेष बात नहीं है। दरअसल इन हरामखोरों को उन लोगों ने पाल रखा है जो केवल भारतीय संस्कृति और सभ्यता के दुश्मन ही नहीं बल्कि वह इस देश की एकता, अखण्डता और सम्प्रभुता के विरुद्ध हमेशा से षड्यंत्र रचते रहे हैं।
१९९९ में भी जे एन यू के छात्रों ने गुंडागर्दी करते हुए वाइस चांसलर को घेर लिया  था. साल में २००८ में जे एन यू के छात्रों ने देश की सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश को भी मानने से इंकार कर दिया था.  साल २०१४ में जे एन यू के छात्रों ने हिन्दुओं के देवी-देवताओं के विरूद्ध अपमानजनक बातें कही थीं. और महिषासुर शहादत दिवस मनाया था. साल २०१६ में जे एन यू के छात्रों ने अफजल गुरु की बरसी मनाई थी. इसी साल जे एन यू के छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी पर सभी छात्र सड़क पर उतर आये थे और दिल्ली की सड़कों पर बवाल मचाते हुए तोड़फोड़ की थी. इनकी यह गुंडागर्दी आज और अभी भी बदस्तूर जारी है.

यह वही लोग हैं जो अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं और भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह के नारे खुलेआम लगाते हैं। दरअसल अफजल, कसाब और जिन्ना की इन नाजायज़ औलादों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कुछ भी बोलने और करने की आज़ादी देना हमारी सबसे बड़ी भूल है।
हम अभी तक यह नहीं समझ पाए कि आखिर इन सपोलों को दूध क्यों पिलाया जा रहा है, हम कब समझेंगे कि सांप को कितना भी दूध पिला लो, वह हमेशा ज़हर ही उगलेगा। इन हराम की औलादों को पाल-पोसकर हम सपोले से सांप कब तक बनाते रहेंगे और क्यों? 

इस देश की सबसे विडम्बना यह है कि हमने एक ऐसे व्यक्ति को इस देश का आदर्श पुरुष बना दिया जिसने हमें हमेशा अहिंसा की आड़ में कायरता सिखाई, जिसने कहा कि कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे तो तुम दूसरा गाल आगे कर दो। इस घटिया और कायरतावादी सोच ने हमें नपुंसक बना दिया और हम इन सपोलों को दूध पिला-पिलाकर यह उम्मीद करते रहते हैं कि कभी तो यह सपोले जहर उगलना बन्द करेंगे।
पर अब तो हमें यह समझ लेना चाहिए कि सांप कितना भी पालतू हो, ज़हर उगलना नहीं छोड़ता। अब हमें चाहिए कि हम इन ज़हरीले नागों का फन सख़्ती से कुचल दें।

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