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किसान हित तो केवल एक बहाना है, असली मक़सद तो योगी-मोदी को हटाना है

मीडिया सूत्रों से मिली खबरों के अनुसार भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमान राकेश टिकैत ने अपने एक बयान में कहा कि *"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीच में ही अपने पद से हट जाएंगे और वह राष्ट्रपति बनेंगे. उन्होंने यह भी कहा, ''योगी जी का प्रमोशन होना चाहिए, और वह पीएम बन जाएं."*
हमारी समझ से यह बाहर की बात है कि कल तक जो राकेश टिकैत किसान हितों की बातें कर रहे थे और मंचों से "अल्लाह हू अकबर" के नारे लगा रहे थे, आज वही राकेश टिकैत किसान भाइयों के हितों की चिंता छोड़कर श्री मोदी-योगी के प्रमोशन  के लिए इतने उतावले क्यों हो रहे हैं। जो टिकैत कल तक "मोदी-योगी मुक्त भारत" बनाने का संकल्प लेकर देशभर में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे, वही टिकैत आज श्री मोदी को राष्ट्रपति और श्री योगी को प्रधानमंत्री बनाने पर क्यों तुले हुए हैं? प्रश्न यह भी है कि बकौल श्रीमान राकेश टिकैत के यदि श्री योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बना दिया गया तो "टिकैत एंड कम्पनी" के प्रायोजक श्रीमान राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने के "हसीन सपनों" पर पानी नहीं फिर जाएगा? श्री राकेश टिकैत को यह समझना चाहिये कि "गांधी एंड संस् कम्पनी" की एक ही महत्वाकांक्षा है कि श्री राहुल गांधी इस देश के प्रधानमंत्री बन जाएं। लेकिन लगता है कि श्री राकेश टिकैत श्री योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बनाने की भीष्म प्रतिज्ञा ले चुके हैं। इसे कुछ यूं कहा जाए कि खाये भैया का और गीत गाये सैंया का।।

साथ ही श्री राकेश टिकैत ने एक कार्यक्रम में सवालों का जवाब देते हुये कहा- *''बीजेपी का हारा हुआ उम्मीदवार भी जीत का प्रमाण-पत्र लेकर जाएगा क्योंकि मुझे ईवीएम पर भरोसा नहीं है."*
उल्लेखनीय है कि यह वही राकेश टिकैत हैं जो कल तक यह दावा करते नहीं थक रहे थे कि "टिकैत आंदोलन" के कारण भाजपा को पश्चिम बंगाल में हार का मुंह देखना पड़ा। और अब यह कहकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्हें ईवीएम पर भरोसा नहीं है। अरे टिकैत साहब सच बताइये, "आपका ईवीएम पर से भरोसा उठ गया है या फिर अपने आप पर से भरोसा उठा है।" लगता है कि टिकैत साहब को धीरे-धीरे यह समझ आने लगा है कि जनता जनार्दन उनके "किसान हितों की नौटँकी" को भलीभांति समझ गई है और अब उनके सभी नाटक-नौटँकी बन्द होने की कगार पर आ गए हैं। 
राकेश टिकैत यह भी दावा कर रहे हैं कि *"वह कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे।"* सुधि पाठकों को शायद जानकारी हो कि श्री राकेश टिकैत अब से पहले दो बार चुनाव लड़ चुके हैं, 2007 विधानसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े थे जबकि 2014 में राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर अमरोहा लोकसभा से चुनाव लड़े थे, चुनावी मैदान में टिकैत को दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। और दोनों ही बार उनकी ज़मानत ज़ब्त हो चुकी है। ऐसे में तीसरी बार अगर फिर से उनकी जमानत ज़ब्त हो गई, तो विपक्ष की जो बची-खुची उम्मीद उनसे है, वह भी टूट जाएगी। टिकैत साहब जानते हैं कि उनका खुद का कोई जनाधार नहीं है, अलबत्ता "कथित किसान हित" के नाम पर उन्होंने खासी भीड़ जरूर इकट्ठा कर ली थी, जो कि अब समझ गई कि किसान हित तो केवल एक बहाना है, असली मक़सद तो योगी-मोदी को हटाना है।

दरअसल, किसानों के हित की आड़ में तथाकथित किसान नेता और विपक्षी दलों ने जो खेल खेला है, उसकी सच्चाई को अब पूरा देश समझ गया है। बार-बार लगातार जिस प्रकार से श्री मोदी-योगी को निशाना बनाया जा रहा है और श्री राहुल गांधी की शान में कसीदे गढ़े जा रहे हैं, मंचों से धार्मिक नारे लगाए जा रहे हैं, और ईवीएम को टारगेट किया जा रहा है, उससे सबकुछ साफ़-साफ़ नज़र आ रहा है। 
कथित किसान आंदोलन की आड़ में जिस प्रकार से मुख्य मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों को जाम कर, आम जनता के स्वास्थ्य, शिक्षा सुविधाओं और रोजगार को बाधित किया जा रहा है, वह किसी से छुपा नहीं है। आम आदमी को परेशान करके आप किसका भला कर रहे हैं, लालकिले के गौरवशाली इतिहास को कलंकित करके आप किसको खुश करना चाहते हैं, यह अब सबको मालूम हो चुका है। सम्पूर्ण विपक्ष जान चुका है कि योगी को हटाना मुश्किल ही नहीं वरन नामुमकिन है। 

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

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