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राहुल गांधी की बातों में तर्क ढूंढना मतलब चील के घोंसले में मांस ढूंढना

गांधी परिवार के एकमात्र चश्मेचिराग श्री राहुल गांधी ने 14 सितंबर को अखिल भारतीय महिला कांग्रेस समिति को समर्पित एक नए लोगो का अनावरण किया। इस दौरान श्री राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस की विचारधाराओं पर हमला करते हुए कहा, *"मैं अन्य विचारधाराओं के साथ समझौता कर सकता हूं, लेकिन मैं आरएसएस और भाजपा की विचारधारा से कभी समझौता नहीं कर सकता।”* 
यहाँ प्रथम प्रश्न तो यह है कि क्या श्री राहुल गांधी यह जानते हैं कि भाजपा और आरएसएस की विचारधारा क्या है? जिन्होंने अपना पूरा जीवन मुगलों, तुर्कों और अफ़ग़ान आक्रान्ताओं की शान में कसीदे गढ़ते हुए निकाल दिया, जो हिंदी, हिन्दू और हिंदुत्व के नाम से घृणा करते हों, जिन्होंने "हिन्दू आतंकवाद" की मनगढ़ंत परिभाषा गढ़ी हो, जो सत्तात्रेय गोत्र के जेएनयूधारी पोंगा पंडित हों, जो गोमांस-भक्षियों को संरक्षक बने हों, और जो अपने अतिथियों को कुत्तों का झूठा परोसते हों, जिन्हें राष्ट्र और राष्ट्रवाद का क ख ग न मालूम हो, वह भला आरएसएस की पवित्र और पावन विचारधाराओं से समझौता कर भी कैसे सकते हैं। सच तो यह है कि श्री राहुल गांधी स्वयं कांग्रेस की विचारधारा को भी कभी पूरी तरह से समझ नहीं पाए।

इसके बाद राहुल गांधी ने अपने संबोधन में *बीजेपी को ‘नकली हिंदू’ बताते हुए कहा, “वे किस तरह के हिंदू हैं? वे हिंदुओं का उपयोग करते हैं, वे धर्म की दलाली करते हैं लेकिन वे हिंदू नहीं हैं।”*

श्री राहुल गांधी ने अपने एक पूर्व वक्तव्य में यह भी कहा था, *'जो हमारे जवान हैं, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में अपना खून दिया है, जिन्होंने हिंदुस्तान के लिए सर्जिकल स्ट्राइक किए हैं, उनके खून के पीछे आप (पीएम) छुपे हैं, उनकी आप दलाली कर रहे हो, ये बिल्कुल गलत है।*
कुल मिलाकर श्री राहुल गांधी भाजपा को कभी हिन्दू धर्म का दलाल तो कभी जवानों के खून का दलाल बताते हैं। दरअसल , जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्ह तैसी। अब श्री राहुल गांधी की भावना ही कुछ ऐसी है कि बोफ़ोर्स दलाली से लेकर नेशनल हेराल्ड घोटाले तक उन्होंने दलाली ही दलाली देखी है, इसलिये सावन के अंधे को सब ओर हरा ही हरा नज़र आता है। क्या श्री राहुल गांधी भूल गए जब पूरा देश चीन की विस्तारवादी नीतियों का विरोध कर रहा था, तब वह स्वयं शी जिनपिंग के साथ कोई गुप्त समझौता कर रहे थे। हलांकि यह आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया कि वह समझौता क्या था, और न ही यह कि 4 दिसम्बर 2006 को चीनी दूतावास द्वारा राजीव गांधी फाउंडेशन को जो 90 लाख रुपये की रकम दी गई थी, उसके पीछे का असल उद्देश्य क्या था? क्या कोई चीन की दलाली कर रहा था?? यहाँ यह उल्लेखनीय है कि राजीव गांधी फाउंडेशन गांधी परिवार की ही संस्था है।
 इसके अतिरिक्त, श्री राहुल गांधी ने यह भी टिप्पणी की, *“जब आप (महात्मा) गांधी की तस्वीर देखते हैं, तो आप उनके चारों ओर 2-3 महिलाएं देखेंगे। क्या आपने मोहन भागवत की किसी महिला के साथ तस्वीर देखी है?”* अब श्री राहुल गांधी को कौन समझाए कि महात्मा गांधी ब्रह्मचर्य के प्रयोग किया करते थे जिसमें वह तथाकथित रूप से जवान और कुंवारी कन्याओं के साथ नग्नावस्था में सोते थे। लेकिन श्री मोहन भागवत को ऐसा कोई प्रयोग करते न किसी ने देखा है और न ही सुना है। इसके अतिरिक्त ऐसे कई महान कार्य थे जो महात्मा गांधी किया करते थे, लेकिन श्री मोहन भागवत नहीं कर पाए और शायद न ही कभी कर पाएंगे। इसलिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जैसे असाधारण मनुष्य के क्रियाकलापों की तुलना श्री मोहन भागवत जैसे साधारण व्यक्ति से करना अतार्किक ही कहा जायेगा। 

लेकिन वैसे एक सच यह भी है कि श्री राहुल गांधी की बातों में तर्क ढूंढना मानो चील के घोंसले में मांस ढूंढने के बराबर ही है।

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

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*विशेष नोट- उपरोक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। उगता भारत समाचार पत्र के सम्पादक मंडल का उनसे सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है। हमारा उद्देश्य जानबूझकर किसी की धार्मिक-जातिगत अथवा व्यक्तिगत आस्था एवं विश्वास को ठेस पहुंचाने नहीं है। यदि जाने-अनजाने ऐसा होता है तो उसके लिए हम करबद्ध होकर क्षमा प्रार्थी हैं।

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