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पप्पू साहब केवल "पप्पू" बन सकते हैं, प्रधानमंत्री नहीं बन सकते

राजनीति में समझदार व्यक्ति वह होता है जो अपनी लकीर को खींचकर बड़ा करने की कोशिश करता है, वह नहीं जो दूसरों की लकीरों को मिटाकर अपनी लकीर बड़ा करने की सोचता है। विरोध एक सीमा तक सही होता है, लेकिन जब वह हद पार कर जाता है तब वह विरोध न रहकर केवल "पूर्वाग्रह" बन जाता है, और पूर्वाग्रह से ग्रसित व्यक्ति "बेचारा" बनकर रह जाता है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में "पप्पू" कहते हैं।
जब आप किसी पर उंगली उठाते हैं तो तीन उंगलियां आपकी तरफ़ भी उठ जाती हैं। 
राजनीति में किसी पर उंगली उठाने से पहले यह जरूर समझ लेना चाहिए कि पहले तो आप उसका बेवजह प्रचार करने लगते हैं। सही मायने में आप उसके "स्टार प्रचारक" बन जाते हैं। जिस व्यक्ति की राजनीति "खत्म" करनी हो, तो उसकी चर्चा करना ही बन्द कर दो, वह अपने आप ख़त्म हो जाएगा।

दूसरे जब आप किसी का लगातार विरोध करते हैं तो आप केवल उसके अवगुण देखते हैं, उसके गुणों को भूल जाते हैं। आप इतना नकरात्मक हो जाते हैं कि आपके चारों ओर एक नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है और जो भी व्यक्ति आपके सम्पर्क में आता है, वह भी उस नकारात्मक ऊर्जा से प्रभावित होता है। इसके विपरीत यदि आप अपने विरोधी के गुणों को पहचान कर उन्हें आत्मसात करने का प्रयास करें तो शायद आप उससे कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सकते हो। साथ ही आपमें एक सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार होने लगता है जो सदैव आपके विकास में सहायक सिद्ध होता है। तीसरे आप "बेचारे" अर्थात "पप्पू" बनने से भी बच जाते हैं। 
श्री राहुल गांधी प्रत्येक दृष्टिकोण से एक बेहतर और विद्वान व्यक्ति हैं, परन्तु श्री मोदी विरोध की सीमा को लांघकर वह अब केवल "पप्पू" बनकर रह गए। उन्होंने केवल श्री मोदी के अवगुणों को ही देखने का प्रयास किया। श्री राहुल गांधी कभी श्री मोदी की सकारात्मक ऊर्जा, ओजस्विता और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को आत्मसात नहीं कर पाए। यदि श्री गांधी ने अपने आपको केवल राष्ट्र के प्रति समर्पित ही कर दिया होता, तो आज वह इस देश के प्रधानमंत्री होते। लेकिन वह केवल "पप्पू" बनकर रह गए और पप्पूजीवी उन्हें शेखचिल्ली वाले सपने दिखाकर सुलाते रहे, आज भी सुला रहे हैं। न जाने वह कब जागेंगे।

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

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*विशेष नोट- उपरोक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। उगता भारत समाचार पत्र के सम्पादक मंडल का उनसे सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है। हमारा उद्देश्य जानबूझकर किसी की धार्मिक-जातिगत अथवा व्यक्तिगत आस्था एवं विश्वास को ठेस पहुंचाने नहीं है। यदि जाने-अनजाने ऐसा होता है तो उसके लिए हम करबद्ध होकर क्षमा प्रार्थी हैं।

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