सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ऐसे तथाकथित ब्राह्मणों को चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए

आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक ऑडियो क्लिप सुनाई पड़ रही है जिसमें दो शख़्स धर्मांतरण को लेकर आपस में टेलीफोन पर वार्तालाप कर रहे हैं, जो कि काफी आपत्तिजनक है। ऑडियो मैसेज में मौलाना कलीम सिद्दीकी दूसरी तरफ एजेंट से कहते हुए साफ सुनाई दे रहे हैं कि धर्मांतरण उस रफ्तार से नहीं हो पा रहे. इसके जवाब में एजेंट मौलाना से बोल रहा है कि लॉकडाउन के चलते हिंदू लड़कियां नहीं मिल पा रही हैं. एजेंट ये भी कहता है कि कुछ छोटी जाति की लड़कियां मिल रही थी... इसपर मौलाना कहते हैं कि नहीं, बड़ी जाति की लड़की खासतौर पर ब्राम्हण वगैरह की लडकियां हों तो ठीक रहेगा. ऑडियो मैसेज से साफ है कि मौलाना बड़े पैमाने पर हिंदू लड़कियों विशेषकर ब्राह्मण वर्ग की लड़कियों के धर्मपरिवर्तन की तैयारियों में लगे थे। हालांकि हम इस ऑडियो क्लिप की पुष्टि नहीं कर रहे। परन्तु दूध में पड़ी हुई मक्खी देखकर उसे अनदेखा करना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है।
उल्लेखनीय है कि इन मौलाना कलीम सिद्दीकी को उत्तरप्रदेश ATS (एंटी टैरर स्क्वाड) ने जबरन धर्मांतरण सहित कई संगीन आरोपों में गिरफ्तार किया है। इसके बावजूद समाजवादी पार्टी के सांसद जनाब शफीकुर्रहमान बर्क़ साहब, कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता जनाब राशिद अल्वी साहब और आम आदमी पार्टी के विधायक अमानुतल्ला खान और प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने इन मौलाना साहब की गिरफ्तारी का न सिर्फ़ कड़ा विरोध किया बल्कि उन्हें पूरी तरह से क्लीन चिट देने का हरसम्भव प्रयास भी किया। 

विडम्बना देखिये कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान अखिलेश यादव लगातार ब्राह्मण समाज की सुरक्षा और सम्मान की दुहाई दे रहे हैं, कांग्रेस पार्टी के युवराज श्री राहुल गांधी स्वयं को दत्तात्रेय गोत्र का जनेऊधारी ब्राह्मण बताते हुए नहीं थक रहे। इस सबके बावजूद भी सपा और कांग्रेस के नेता मौलाना कलीम सिद्दीकी  के बचाव के लिए लगातार हाथ-पैर पीट रहे हैं।

यहां यह भी बताना जरूरी है कि सपा औऱ कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल ब्राह्मण समाज को अपने पाले में करने के लिए लगातार "सम्मान समारोह" कर रहे हैं। दूसरी तरफ़ ब्राह्मण बेटियों को अपमानित करने का षड्यंत्र रचने वालों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि ब्राह्मण समाज के जो लोग इस सबको अनदेखा करके इन "ब्राह्मण विरोधी मानसिकता" के पैरोकारों के दरबारों में हाजिरी लगा रहे हैं, क्या वह किसी भी दृष्टिकोण से ब्राह्मण कहलाने योग्य हैं? सच पूछिए तो ऐसे लोगों को चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिये। परन्तु इनकी आंख का पानी उतर चुका है। इन चंद "नौताखाऊ पोंगा पंडितों" के कारण ही पूरे ब्राह्मण समाज को शर्मिंदा होना पड़ता है। ऐसे कुलद्रोही और कुल कलंकी ब्राह्मणों से तो रावण कहीं अधिक अच्छा था, जिसने अपने जीते जी श्रीराम और उनकी सेना को अपनी लंका में प्रवेश नहीं करने दिया था।
ब्राह्मणों को चाहिए कि वह मौजूदा सरकार से मांग करें कि वह इस ऑडियो क्लिप की हर प्रकार से पुष्टि कराये और साथ ही उन तमाम राजनीतिक दलों से भी माफ़ी की मांग रखें जिन्होंने मौलाना कलीम सिद्दीकी के बचाव का हरसम्भव प्रयास किया था। अन्यथा ऐसे तमाम नेताओं और दलों का खुलकर विरोध किया जाना चाहिए जो कि इस प्रकार के षड्यंत्रकारियों की पीठ थपथपाते हैं।


👉🏽 *यदि अच्छा लगे तो शेयर करें, बुरा लगे तो क्षमा करें*)

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

व्हाट्सऐप-

 9058118317

ईमेल-
 manojchaturvedi1972@gmail.com

वेबसाइट-

https://www.shastrisandesh.co.in/

फेसबुक-

https://www.facebook.com/shastrisandesh

ट्विटर-

https://www.twitter.com/shastriji1972

*विशेष नोट- उपरोक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। उगता भारत समाचार पत्र के सम्पादक मंडल का उनसे सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है। हमारा उद्देश्य जानबूझकर किसी की धार्मिक-जातिगत अथवा व्यक्तिगत आस्था एवं विश्वास को ठेस पहुंचाने नहीं है। यदि जाने-अनजाने ऐसा होता है तो उसके लिए हम करबद्ध होकर क्षमा प्रार्थी हैं।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

संविधान सभा की बहसों में छिपा भारत का असली सपना

संविधान निर्माण की प्रक्रिया, प्रमुख बहसें, और उन विवादों का विश्लेषण जो आज भी प्रासंगिक हैं संविधान सभा की बहसों में छिपा भारत का असली सपना  एक राष्ट्र की नींव 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान लागू किया। यह केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं था, बल्कि एक नवजात राष्ट्र का सामूहिक सपना था। इस संविधान को बनाने में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। संविधान सभा में कुल 165 बैठकें हुईं, जिनमें से 114 दिन केवल संविधान के प्रारूप पर विचार-विमर्श में व्यतीत हुए। यह विश्व के किसी भी लोकतांत्रिक संविधान निर्माण की सबसे लंबी और सबसे गहन बहस थी। संविधान सभा की बहसों में भारत का वास्तविक स्वरूप उभरकर आया। यहाँ केवल कानूनी धाराएँ नहीं लिखी गईं, बल्कि एक बहुलतावादी, धर्मनिरपेक्ष और समतामूलक समाज की कल्पना को मूर्त रूप दिया गया। इन बहसों में जो तर्क-वितर्क हुए, जो असहमतियाँ व्यक्त हुईं, और जो समझौते किए गए, वे आज भी भारतीय लोकतंत्र की समझ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। संविधान सभा की संरचना: प्रतिनिधित्व का गणित संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना 1946 के...

UGC विनियम 2026: उच्च शिक्षा में समानता का नया ढांचा (भाग-1)

UGC विनियम 2026 ऐतिहासिक संदर्भ और बदलाव का दौर भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना विनियम, 2026' न केवल एक प्रशासनिक सुधार है, बल्कि यह भारतीय समाज की सबसे गहरी जड़ों में छिपे भेदभाव और असमानता से निपटने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है। यह लेख श्रृंखला इन नए नियमों की गहन पड़ताल करती है - न केवल उनकी संरचना और प्रावधानों की, बल्कि उनके पीछे के सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ, संभावित परिणामों और विवादास्पद पहलुओं की भी। 2012 से 2026 तक का सफर: तीन चरणों में बदलाव भारतीय परिसरों में जातिगत और सामाजिक भेदभाव को रोकने के प्रयास कोई नई बात नहीं हैं। 2012 में UGC ने पहली बार 'SC/ST के छात्रों के खिलाफ भेदभाव की रोकथाम के लिए विनियम' जारी किए थे। उस समय का फोकस मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों तक सीमित था। 2024 में एक ड्राफ्ट सामने आया जिसमें पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया। लेकिन उस ड्...

गंगा स्नान का वैज्ञानिक महत्व : एक प्रमाणिक और गहन विश्लेषण

  गंगा स्नान को धार्मिक आस्था का विषय माना जाता है — लेकिन इसका एक ठोस वैज्ञानिक आधार भी है, जिसे आधुनिक शोधों ने प्रमाणित किया है। 1. प्राकृतिक एंटीबायोटिक जल गंगाजल में Bacteriophage नामक वायरस पाए जाते हैं, जो हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं। इसलिए यह पानी सड़ता नहीं, बल्कि शुद्ध बना रहता है — यह आधुनिक माइक्रोबियल साइंस द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है।  इसे भी पढ़ें : कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व  2. स्किन एवं इम्यून सिस्टम के लिए लाभकारी गंगाजल में विद्यमान खास खनिज (Mineral Salts) व प्राकृतिक माइक्रोब्स त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाते हैं और त्वचा रोगों में उपचारकारी पाए गए हैं। इससे शरीर की immune response क्षमता बढ़ती है — विशेषकर जल-ज्वर, फंगल और फोड़े-फुंसियों जैसे संक्रमणों से लड़ने में। 3. नेगेटिव आयन एनर्जी थैरेपी (Negative Ion Therapy) जब व्यक्ति सूर्योदय या प्रातःकालीन मौसम में गंगा में स्नान करता है, तब उसे नेगेटिव आयन (−IONs) प्राप्त होते हैं — यह वही आयन हैं जो हिमालय, झरनों और बारिश के बाद की हवा में होते हैं। विज्ञान...