लखीमपुर खीरी कांड पर विपक्ष विशेष रूप से कॉंग्रेस खुलकर राजनीति कर रहा है, इसी क्रम में बिजनौर कांग्रेस कमेटी के जिला उपाध्यक्ष श्रीमान मुनीश त्यागी जी ने मीडिया को दिए अपने एक वक्तव्य में कहा कि - "जनता का दर्द वह क्या समझेगा जिसके कोई औलाद नहीं है। ये बे-औलादों की सरकार है।" यह पहला मौका नहीं है जब किसी विपक्षी नेता ने श्री योगी-मोदी की सरकार को बे-औलादों की सरकार बताया है। इससे पहले भी विपक्ष इस तरह के घटिया और शर्मनाक बयान देता रहा है। सोशल मीडिया पर भी अक्सर श्री योगी-मोदी पर इस प्रकार की घोर आपत्तिजनक टिप्पणियां होती रहती हैं।
लेकिन कांग्रेसियों को यह कहते हुए ख़ुद के गिरेबान में भी झांककर देखना चाहिए कि वह जिन श्री राहुल गांधी साहब को देश की राजगद्दी सौंपना चाहते हैं, उनके ख़ुद की कितनी औलादें हैं, तो क्या वह भी जनता के दर्द को नहीं समझते? जिन ममता दीदी और मायावती बहनजी की कांग्रेस गलबहियां कर रही है, उनके कितने पुत्र-पुत्रियां हैं?
कांग्रेस को यह समझना चाहिये कि राजनीति में परिवार की जरूरत उन्हें होती है, जो परिवारवाद की राजनीति करते हैं। गांधी परिवार, लालू परिवार, मुलायम परिवार, ठाकरे परिवार सभी परिवारवाद की राजनीति कर रहे हैं। श्री मुनीश त्यागी साहब, यह अच्छा ही है कि श्री नरेन्द्र मोदी और श्री योगी आदित्यनाथ जी के कोई पुत्र नहीं है, वरना वह भी पुत्रमोह में धृष्टर्राष्ट बन जाते, और भाजपा का भी वही हश्र होता जो आजकल कांग्रेस का हो रहा है। किसी ने सही कहा है कि "कुपुत्र" जनने से अच्छा है कि बांझ रह जा।
रहा जनता के दर्द का प्रश्न, तो महोदय बहुत विनम्रता से पूछना चाहता हूं कि 1966 में निहत्थे और निर्दोष गौभक्तों और साधु-संतों पर गोलियां चलवाने वाली श्रीमती इंदिरा गांधी के दो सुपुत्र थे, 1984 में निर्दोष सिखों की नृशंस हत्या पर जिन स्व. राजीव गांधी साहब ने कहा था कि "जब बड़े पेड़ गिरते हैं, तब धरती थोड़ा हिलती ही है", उनके भी एक सुपुत्र है, 1990 में निर्दोष श्रीरामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले माननीय मुलायम सिंह यादव के भी ईश्वर की कृपा से दो सुयोग्य पुत्र हैं, उस सबके बावजूद उन्होंने जनता के दर्द को क्यों नहीं समझा था? इस प्रश्न का उत्तर हर कांग्रेसी, समाजवादी को देना ही चाहिए।
श्रीमान मुनीश त्यागी जी ने अपने बयान में यह भी कहा कि- "जब देश आज़ाद हुआ था तब 100 बीघे के काश्तकार पर लंगोटी नहीं जुड़ती थी, आज देश का किसान कार से चरी लेकर जाता है, कार से दूध लेकर जाता है, आज मजदूर मोटरसाइकिल से मजदूरी करने जाता है।"
श्रीमान मुनीश त्यागी जी से हम बहुत विनम्रतापूर्वक जानना चाहते हैं कि साहब जब देश का किसान कार से चरी लाता है तो उसे कार से कौन रौंद सकता है? ऐसे सम्पन्न किसानों के लिए मुफ़्त बिजली और खाद की आवश्यकता भला क्यों पड़ती है? मोटरसाइकिल पर जाकर मजदूरी करने वाला मजदूर और कार से चलने वाला किसान गरीब कैसे हो सकता है? शायद इसीलिए श्रीमान राहुल गांधी ने कहा था कि "गरीबी दिमाग़ का वहम है"।
श्रीमान मुनीश त्यागी जी ने आगे कहा कि- "श्रीमती प्रियंका गांधी को एक गन्दी कोठरी में कैद किया गया जिसमें मिट्टी के ढेर लगे हुए थे, प्रियंका गांधी ने खुद झाड़ू लगाकर बैठने का काम किया है।"
माननीय मुनीश त्यागी जी को हम बताना चाहते हैं कि "कारों से चलने वाले "गरीब" किसान की मौत पर छाती पीटने वाली "शाही परिवार" की बेटी को अगर एक दिन झाड़ू लगानी भी पड़ गई तो कोई आसमान नहीं टूट गया, *मुनीश साहब "बड़े-बड़े शहरों में ऐसी छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं।"*
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🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
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