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राजनीति में जज़्बातों के लिए कोई जगह नहीं होती

राजनीति में जज़्बातों के लिए कोई जगह नहीं होती, जज़्बात यानी भावनाएं। समझदार राजनीतिज्ञ वह होता है जो ख़ुद कभी भावनाओं में न बहे लेकिन हमेशा दूसरों की भावनाओं को भड़काता रहे। दूसरे शब्दों में राजनीति हमेशा दिमाग़ से होती है, दिल से नहीं। 
इस समय पूरे देश में जो कुछ हो रहा है वह राजनीति के इसी सिद्धान्त का एक हिस्सा है। एक और बात जो सबसे जरूरी है वह यह है कि राजनीति में कोई किसी का नहीं होता, सब अपने-अपने स्वार्थ के लिए लड़ते हैं।
लेकिन यह दोनों ही बातें न तो राहुल गांधी आजतक समझ सके और न ही अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने कभी इस बात को समझने की कोशिश की।
दरअसल अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और राहुल गांधी दोनों ही लोग मुहं में चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, और इन तीनों को ही राजनीति विरासत में मिली है। अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, मायावती, शरद पवार, नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जैसे नेताओं ने ज़मीन से राजनीति की है। इसमें मुलायम सिंह यादव, लालू यादव औऱ शिवपाल यादव जैसे नाम भी शामिल हैं।

आज जो कुछ हो रहा है और जिस प्रकार के बचकाना बयान इन हवाई नेताओं विशेषकर राहुल गांधी जैसे नेताओं द्वारा दिये जा रहे हैं, वह कहीं न कहीं विपक्ष का राजनीतिक नुकसान ही कर रहे हैं।

विपक्ष की बचकाना राजनीति को अरविंद केजरीवाल ने जिस प्रकार अपने शपथ ग्रहण समारोह में श्री मोदी को बुलाकर करारा तमाचा मारा है, वह इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि राजनीति में कोई किसी का नहीं होता।

राजनीति में न कोई धर्म होता है, न मज़हब, न जाति और न सम्प्रदाय बल्कि राजनीति में सत्ता ही सबसे बड़ा धर्म होता है। केजरीवाल ने दिल्ली जीतकर विपक्ष को अंगूठा दिखा दिया क्योंकि केजरीवाल जानते हैं कि उनकी सबसे बड़ी शत्रु कांग्रेस है। क्योंकि केजरीवाल जिस रणनीति पर काम कर रहे हैं उसी रणनीति के सहारे कांग्रेस ने इस देश पर 70 सालों तक Nएकछत्र राज किया है।

केजरीवाल इस वक्त हिन्दू सवर्ण (ब्राह्मण, वैश्य और क्षत्रिय) के साथ मुस्लिम समुदाय के लोगों औऱ झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले तमाम लोगों को एकजुट करके राजनीति कर रहे हैं। जबकि भाजपा दलित-पिछड़ा वर्ग की राजनीति कर रही है और राष्ट्रवाद के नाम पर मुस्लिमों को भी अपने पाले में करने का प्रयास करने में लगी है।

कांग्रेस अभी तक यह समझने में ही नाकाम है कि उसको किस वोटबैंक को साधने की परम आवश्यकता है। कभी वह जनेऊधारी ब्राह्मण बन जाती है, कभी कट्टरपंथी मुसलमानों और पाकिस्तान के साथ खड़ी हो जाती है, कभी दलितों के लिए प्रमोशन और सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर शोर मचाती है और कभी पिछड़ों और आदिवासियों का रोना लेकर बैठ जाती है।
कुल मिलाकर देश में कांग्रेस और प्रदेश में सपा पूरी तरह से दिशाहीन हैं। और इसकी मुख्य वजह अखिलेश यादव और राहुल गांधी का अनुभवहीन होना है।


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