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अखिलेश यादव जी इन समाजवादी पप्पुओं से ज़रा सावधान रहिए

इसौली से समाजवादी पार्टी के विधायक अबरार अहमद साहब का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें वह *ब्राह्मण और क्षत्रिय जाति के मतदाताओं को *'चोट्टा'* बोलते हुए सुने जा सकते हैं. अबरार अहमद ने इस वीडियो में कहा कि- *चुनाव जीतने के लिए उन्हें ब्राह्मणों और क्षत्रियों के वोट की जरूरत नहीं है. उनके बिना भी वह जीत सकते हैं.* वह आगे कह रहे हैं कि *"मुसलमान ही उनके वास्तविक वोटर्स हैं."*  यहां मज़े की बात यह है कि इस प्रकार के समाज को तोड़ने और साम्प्रदायिक विद्वेष को बढ़ाने वाले बयान देने वाले सपा नेता अबरार अहमद साहब की ज़बान पर आखिरकार सच आ ही गया। शायद सच यही है कि आजकल उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी मुस्लिम लीग की भूमिका निभा रही है। दरअसल, समाजवादी पार्टी में ब्राह्मण और क्षत्रिय सहित अन्य वर्ग के वोटों की गिनती होती ही नहीं है। वहां तो केवल एक वर्ग विशेष और जाति विशेष के वोटों को ही गिना जाता है, बाकी तो बस लुभाव के वोट माने जाते हैं।  वैसे सपा विधायक ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज पर उंगली उठाने से पहले यह भूल गए कि तीन उंगलियां उनकी ओर भी उठ रही...

टिकैत साहब अब आप भी मीडिया को धमकाने लगे, आप तो ऐसे नहीं थे

किसी ने क्या ख़ूब कहा है कि सच्चाई छुप नहीं सकती, कभी बनावट के उसूलों से। के ख़ुशबू आ नहीं सकती, कभी बनावट के उसूलों से।।  किसानों के स्वयंभू हितैषी बने श्रीमान राकेश टिकैत औऱ उनके भाई श्रीमान नरेश टिकैत पर यह शेर बिल्कुल सटीक बैठता है। टिकैत बंधुओं ने राष्ट्रवादी चैनल ज़ी न्यूज़ के एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद जिस प्रकार की प्रतिक्रिया दी है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देने वाले श्री राकेश टिकैत लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को किस अधिकार से धमका रहे हैं? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ लेकर अनाप-शनाप बयानबाजी करने वालों को मीडिया की आज़ादी रास क्यों नहीं आ रही है। यह तो बिल्कुल वही बात हुई "या तो भेली दे, नहीं तो चल प्रधान के पास।" मतलब या तो कथित किसान नेताओं के सुर में सुर मिलाओ, अन्यथा "किसान विरोधी" कहलाओ। व्हाट एन आइडिया टिकैत जी!  श्री नरेश टिकैत साहब ने स्टिंग ऑपरेशन के दौरान जो सच उगला है, उसने कम से कम "कथित किसान आंदोलन" की कलई तो खोलकर रख ही दी। पूरा देश इस बात को भलीभांति समझ चुका है कि "कथित किसान हितों" की आड़ मे...

यदि वास्तव में ऐसा होता है तो यह "गांधी परिवार" का दुर्भाग्य ही होगा

कांग्रेस ने कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी के कंधों पर अपना सर रख दिया है। कहते हैं कि डूबते को तिनके सहारा चाहिए होता है, और कांग्रेस का जहाज डूब रहा है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि ख़ुद कन्हैया कुमार कह रहे हैं। कन्हैया कुमार वही हैं जो जेएनयू में प्रति वर्ष दुर्दांत आतंकी अफ़ज़ल गुरु की मौत पर "अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं, तेरे क़ातिल जिंदा हैं" कहकर छाती पीट-पीटकर आंसू बहाते थे। यही कन्हैया कुमार कहते थे- भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्लाह, इंशा अल्लाह। यह वही कन्हैया कुमार हैं जो बिहार में बेगूसराय से चुनाव लड़े थे और गिरिराज सिंह ने उन्हें 4 लाख से भी अधिक मतों से हरा दिया था। दूसरे किरदार हैं जिग्नेश मेवाणी, जिन्होंने कहा था कि "मोदी की जीत सामूहिक पागलपन का नतीजा है"। यह कहकर न केवल उन्होंने लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों का अपमान किया था, बल्कि देश के उस प्रत्येक नागरिक को "पागल" बताने दुस्साहस किया था, जिन्होंने श्रीमान मोदी को अपना कीमती मत दिया था। विडम्बना देखिये कि देश की सबसे पुरानी और गांधीवादियों की जमात कांग्रेस पार्टी ने अपनी डूबती हुई नैया ...

श्रीराम मंदिर बनवाकर भाजपा ने महापाप किया था, अब सजा भुगतो

कभी-कभी सोचता हूँ कि श्री अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर बनवाकर भारतीय जनता पार्टी ने महापाप किया। काश अगर इसके स्थान पर बाबरी मस्जिद बनवा दी होती तो पश्चिम बंगाल सहित सभी राज्यों में आज भाजपा की पूर्ण बहुमत से सरकार बन होती। और श्रीमान नरेंद्र मोदी को 21वीं सदी का "महापुरुष" बना दिया गया होता। लेकिन हाय री बदकिस्मती, कि श्रीमान मोदी ने 1990 के श्रीरामभक्तों की वीरगति को नमन करते हुए, श्री अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनवा दिया। श्री मोदी शायद भूल गए कि हिंदुओं को मंदिर नहीं सस्ता पेट्रोल चाहिये, सस्ते प्याज-टमाटर, सस्ता राशन, सरकारी नौकरियां, और मुफ़्त की बिजली और पानी चाहिए। इन्हें गन्ने के बढ़ते हुए दाम और मुफ़्त के लैपटॉप चाहिए। सैंकडों वर्षों से विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन करने वाले गुलामों को गुलामी के प्रतीक सुहाते हैं, इन्हें श्रीराम का मंदिर नहीं चाहिए, इन्हें अस्पताल चाहिए। इन्हें मुफ़्त की वैक्सीन चाहिए, इन्हें ऑक्सीजन के सिलेंडर चाहिए। इनकी मानसिकता खाने, सोने और हगने से ज़्यादा कुछ सोच ही नहीं सकती। यह धर्म के प्रति कभी कृतज्ञ नहीं रहे, यह हमेशा ही कृत...

राकेश टिकैत साहब ने तो तमंचे का लाइसेंस लेकर सीधा तोप का ऑर्डर दे दिया

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बीती 24 सितंबर को अमेरिका के राष्ट्रपति को टैग करके ट्वीट किया। टिकैत ने लिखा कि "भारतीय किसान पीएम मोदी की सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। पिछले 11 महीने के विरोध प्रदर्शन के दौरान 700 किसानों की जान जा चुकी हैं। इस काले कानून से हमारी रक्षा होनी चाहिए। कृपया पीएम मोदी से अपनी मीटिंग में हमारे मुद्दों पर भी ध्यान दें।" इससे पूर्व पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती साहिबा ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान से बात करने की सलाह दी थी। AIMIM अध्यक्ष जनाब असदुद्दीन ओवैसी और नेशनल कांफ्रेंस के फ़ारुख अब्दुल्ला साहब ने तालिबान से बातचीत करने की सलाह दी थी। कांग्रेस नेताओं ने हमेशा ही भारत के अंदरूनी मसलों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाने की कोशिश की है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कश्मीर मसले का अंतरराष्ट्रीयकरण न किया होता तो आज POK हमारा होता। कांग्रेस के युवराज श्री राहुल गांधी ने भी विदेशों में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। अपने घर का झगड़ा चौराहों...

ऐसे तथाकथित ब्राह्मणों को चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए

आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक ऑडियो क्लिप सुनाई पड़ रही है जिसमें दो शख़्स धर्मांतरण को लेकर आपस में टेलीफोन पर वार्तालाप कर रहे हैं, जो कि काफी आपत्तिजनक है। ऑडियो मैसेज में मौलाना कलीम सिद्दीकी दूसरी तरफ एजेंट से कहते हुए साफ सुनाई दे रहे हैं कि धर्मांतरण उस रफ्तार से नहीं हो पा रहे. इसके जवाब में एजेंट मौलाना से बोल रहा है कि लॉकडाउन के चलते हिंदू लड़कियां नहीं मिल पा रही हैं. एजेंट ये भी कहता है कि कुछ छोटी जाति की लड़कियां मिल रही थी... इसपर मौलाना कहते हैं कि नहीं, बड़ी जाति की लड़की खासतौर पर ब्राम्हण वगैरह की लडकियां हों तो ठीक रहेगा. ऑडियो मैसेज से साफ है कि मौलाना बड़े पैमाने पर हिंदू लड़कियों विशेषकर ब्राह्मण वर्ग की लड़कियों के धर्मपरिवर्तन की तैयारियों में लगे थे। हालांकि हम इस ऑडियो क्लिप की पुष्टि नहीं कर रहे। परन्तु दूध में पड़ी हुई मक्खी देखकर उसे अनदेखा करना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। उल्लेखनीय है कि इन मौलाना कलीम सिद्दीकी को उत्तरप्रदेश ATS (एंटी टैरर स्क्वाड) ने जबरन धर्मांतरण सहित कई संगीन आरोपों में गिरफ्तार क...

हिन्दू माता-पिता अपनी बेटियों को मुस्लिम लड़कों के पीछे लगाते हैं-मसूद हाशमी

इस देश में दो प्रकार के आतंकवादी जिहाद चला रहे हैं। एक वह जो "गोली" से आतंकवाद फैलाते हैं, और दूसरे वह हैं जो "बोली" से आतंक फैलाने की साजिश कर रहे हैं। यह दोनों ही प्रकार के आतंकी भारत की एकता, अखंडता और सम्प्रभुता के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।  "बोली" यानी विचारों से आतंकवाद करने वाले लोगों को आप "वैचारिक आतंकी" की संज्ञा दे सकते हैं। वैचारिक आतंकवाद का एक नमूना हमें तब देखने को मिला जब कल राष्ट्रीय स्तर के एक चैनल पर मौलाना कलीम सिद्दीकी साहब की गिरफ्तारी को लेकर एक परिचर्चा (डिबेट) चल रही थी। जिसमें कई पार्टियों के प्रवक्ताओं के साथ-साथ इत्तेहाद सोसायटी के अध्यक्ष और राजनीतिक विश्लेषक मसूद हाशमी भी वहाँ उपस्थित थे। लव जिहाद से सम्बंधित एक प्रश्न के उत्तर में मसूद हाशमी ने कहा कि - *"मुस्लिम लड़के किसी प्रकार का कोई 'लव जिहाद' नहीं करते बल्कि सत्य यह है कि हिन्दू लोग दहेज न देने से बचने के लिए अपनी बहन-बेटियों को मुस्लिम लड़कों के पीछे लगाते हैं।"* हालांकि इस बेहद घटिया औऱ शर्मनाक बयान के बाद कार्यक्रम के एंकर ने तुर...