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गौरैया और पानी का कटोरा

गर्मी के दिन थे। सूरज बहुत तेज़ चमक रहा था। पेड़ों की पत्तियाँ भी थकी-सी लग रही थीं।

छह साल का आरव अपनी बालकनी में खेल रहा था।
तभी उसने देखा—
एक छोटी सी गौरैया बार-बार उड़कर आ रही है, लेकिन फिर चली जा रही है।

आरव ने माँ से पूछा,
“माँ, यह चिड़िया बार-बार क्यों आ रही है?”

माँ ने कहा,
“बेटा, शायद उसे प्यास लगी है।” आरव तुरंत रसोई में गया। उसने एक छोटा सा कटोरा लिया, उसमें साफ पानी भरा और बालकनी में रख दिया।

कुछ देर बाद—
गौरैया आई। उसने पानी पिया। फिर वह वहीं बैठ गई।
आरव खुश हो गया।

उसने कहा,
“माँ, मैंने चिड़िया की मदद कर दी!”
माँ मुस्कराईं और बोलीं,
“नहीं बेटा…
तुमने दया और करुणा सीखी है।”


उस दिन के बाद आरव रोज़ पानी का कटोरा भरता। धीरे-धीरे और भी चिड़ियाँ आने लगीं। बालकनी अब छोटा सा पक्षी-घर बन गई थी।

🌼 कहानी से सीख (बच्चों के लिए)

  • जानवर और पक्षी भी हमारे दोस्त हैं.
  • उन्हें भी भूख और प्यास लगती है.
  • छोटी मदद भी बहुत बड़ी होती है.
  • दया करने से दिल खुश होता है.

❓ सोचने वाले सवाल (बच्चों के लिए)

क्या आपने कभी किसी जानवर या पक्षी की मदद की है?
गर्मी में पक्षियों को सबसे ज़्यादा किस चीज़ की ज़रूरत होती है?
क्या आप अपने घर या स्कूल में पानी का कटोरा रख सकते हैं?
अगर हर बच्चा एक जानवर की मदद करे, तो क्या होगा?

🌍 आज का छोटा काम (Action for Kids)

👉 आज अपने घर के बाहर एक कटोरी पानी ज़रूर रखें और अपने माता–पिता को दिखाएँ।


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