सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पाकिस्तान किसी अहिँसा के पुजारी बापू का देश नहीं है

पाकिस्तान में एक बार फिर से एक मंदिर को निशाना बनाया गया. ताज़ा मामला पंजाब प्रांत के सादिकाबाद जिले के भोंग शरीफ गांव का है जहां सिद्धिविनायक मंदिर के अंदर बुधवार शाम जमकर तोड़फोड़ की गई. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है.
इस ख़बर को लेकर पूरे भारत में हंगामा मचा हुआ है, लेकिन कोई यह भी तो बताए कि आख़िर पाकिस्तान में किसी मंदिर का टूटना, किसी हिन्दू का जबरन धर्म-परिवर्तन, किसी हिन्दू का क़त्लेआम या फिर किसी हिन्दू बहन-बेटी की अस्मत लुटना कब से आठवां अजूबा बन गया है।

अरे भाई, पाकिस्तान किसी अहिंसा के पुजारी, किसी संत-महात्मा बापू का देश नहीं है। वह मौहम्मद अली जिन्ना का पाकिस्तान है जिसने "डायरेक्ट एक्शन" के नाम पर हजारों-लाखों हिंदुओं का कत्लेआम करा दिया था। जिस पाकिस्तान की नींव ही हिंदुस्तानियों के खून से सींची गई हो, उससे आप शांति के कबूतर उड़ाने की उम्मीद रख भी कैसे सकते हैं।
आप भूल गए कि यह वही पाकिस्तान है जिसको 55 करोड़ रुपए की ख़ैरात दिलवाने के लिए हमारे देश के "बापू" ने अन्न-जल त्याग दिया था। इस पाकिस्तान के सर पर जो छत पड़ी थी, वह भी "तुष्टिकरण के महात्मा"  की ही देन थी।

पाकिस्तान के "क़ायदे आज़म" ने एक गाल पर थप्पड़ ख़ाकर दूसरा गाल आगे करना नहीं सिखाया, लेकिन हमारे "राष्ट्रपिता" ने सदैव हमें थप्पड़-घूंसे ख़ाकर चुप रहना ही सिखाया है। जिसकी सज़ा हम आज तक भुगत रहे हैं और न जाने कब तक भुगतते रहेंगे।
एक ओर पाकिस्तानी पुलिस है जो मंदिरों और गुरुद्वारों के खण्डित होने को चुपचाप देखती रहती है, और दूसरी तरफ हमारे देश की पुलिस के जवान हैं जो फ्लाई ओवर, रेलवे प्लेटफार्म और रेलवे लाइनों पर बनी मजारों-दरगाहों की सुरक्षा में दिनरात लगे रहते हैं, और उनकी तनख्वाह हमारी खून-पसीने की गाढ़ी कमाई के पैसे से दी जाती है। 

एक हमारे माननीय "नेताजी" थे जिन्होंने एक मुगल आक्रांता की गुलामी की निशानी को बचाने के लिए अपने ही देशवासियों का खून बहाकर अपनी पीठ थपथपाई थी। दूसरी तरफ़ पाकिस्तान की सरकार है जिसने दो हमदर्दी के शब्द भी कभी नहीं बोले जबकि पाकिस्तान में रोज़ कहीं न कहीं एक मंदिर टूटता है।

 पाकिस्तान में "सेक्युलर" नहीं रहते जबकि हिंदुस्तान "सेक्युलर बुद्धिजीवियों" की धर्मशाला बन गया है। इस देश में जयचन्दों की कोई कमी नहीं है, यहां कदम-कदम पर जयचंद, ज्ञानचंद और रायचंद मिल जाएंगे जो किसी न किसी लिब्रांडू गैंग के सदस्य अवश्य होंगे। मज़े की बात तो यह है कि हम पाकिस्तान में मंदिर टूटने का शोक मना रहे हैं, लेकिन जब अपने ही देश की राजधानी में मां दुर्गा और भगवान हनुमान का मंदिर टूटा था तब हमने किसी का क्या उखाड़ लिया था? 500 साल तक हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम बेघर रहे, तब हमने कौन से तीर मार लिए थे।

हम बापू के देश में रहते हैं हमें कोई हक़ नहीं कि हम कोई विरोध प्रदर्शन करें, बस एक गाल पर थप्पड़ ख़ाकर दूसरे गाल के लाल होने की प्रतीक्षा करते रहो।

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

व्हाट्सऐप-

 9058118317

ईमेल-
 manojchaturvedi1972@gmail.com

ब्लॉगर-

https://www.shastrisandesh.co.in/

फेसबुक-

https://www.facebook.com/shastrisandesh

ट्विटर-

https://www.twitter.com/shastriji1972

*विशेष नोट- उपरोक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। उगता भारत समाचार पत्र के सम्पादक मंडल का उनसे सहमत होना न होना आवश्यक नहीं है। हमारा उद्देश्य जानबूझकर किसी की धार्मिक-जातिगत अथवा व्यक्तिगत आस्था एवं विश्वास को ठेस पहुंचाने नहीं है। यदि जाने-अनजाने ऐसा होता है तो उसके लिए हम करबद्ध होकर क्षमा प्रार्थी हैं।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

संविधान सभा की बहसों में छिपा भारत का असली सपना

संविधान निर्माण की प्रक्रिया, प्रमुख बहसें, और उन विवादों का विश्लेषण जो आज भी प्रासंगिक हैं संविधान सभा की बहसों में छिपा भारत का असली सपना  एक राष्ट्र की नींव 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान लागू किया। यह केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं था, बल्कि एक नवजात राष्ट्र का सामूहिक सपना था। इस संविधान को बनाने में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। संविधान सभा में कुल 165 बैठकें हुईं, जिनमें से 114 दिन केवल संविधान के प्रारूप पर विचार-विमर्श में व्यतीत हुए। यह विश्व के किसी भी लोकतांत्रिक संविधान निर्माण की सबसे लंबी और सबसे गहन बहस थी। संविधान सभा की बहसों में भारत का वास्तविक स्वरूप उभरकर आया। यहाँ केवल कानूनी धाराएँ नहीं लिखी गईं, बल्कि एक बहुलतावादी, धर्मनिरपेक्ष और समतामूलक समाज की कल्पना को मूर्त रूप दिया गया। इन बहसों में जो तर्क-वितर्क हुए, जो असहमतियाँ व्यक्त हुईं, और जो समझौते किए गए, वे आज भी भारतीय लोकतंत्र की समझ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। संविधान सभा की संरचना: प्रतिनिधित्व का गणित संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना 1946 के...

UGC विनियम 2026: उच्च शिक्षा में समानता का नया ढांचा (भाग-1)

UGC विनियम 2026 ऐतिहासिक संदर्भ और बदलाव का दौर भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना विनियम, 2026' न केवल एक प्रशासनिक सुधार है, बल्कि यह भारतीय समाज की सबसे गहरी जड़ों में छिपे भेदभाव और असमानता से निपटने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है। यह लेख श्रृंखला इन नए नियमों की गहन पड़ताल करती है - न केवल उनकी संरचना और प्रावधानों की, बल्कि उनके पीछे के सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ, संभावित परिणामों और विवादास्पद पहलुओं की भी। 2012 से 2026 तक का सफर: तीन चरणों में बदलाव भारतीय परिसरों में जातिगत और सामाजिक भेदभाव को रोकने के प्रयास कोई नई बात नहीं हैं। 2012 में UGC ने पहली बार 'SC/ST के छात्रों के खिलाफ भेदभाव की रोकथाम के लिए विनियम' जारी किए थे। उस समय का फोकस मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों तक सीमित था। 2024 में एक ड्राफ्ट सामने आया जिसमें पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया। लेकिन उस ड्...

हर शाख पे उल्लू बैठा है —अंजाम-ए-कांग्रेस क्या होगा?

'हर शाख पे उल्लू बैठा है' के परिप्रेक्ष्य में पार्टी के वैचारिक पतन की एक तीखी राष्ट्रवादी पड़ताल। राष्ट्रचिन्तन — अंजाम-ए-कांग्रेस राजनीतिक विश्लेषण · कांग्रेस का पतन · विशेष आलेख · अप्रैल 2026 ▶ अप्रैल 2026 · राष्ट्रीय राजनीति विशेषांक जो दल अपने बयानों से अपने शत्रु को संजीवनी देता रहे "हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा" — मिर्ज़ा ग़ालिब उसका भविष्य इतिहास पहले ही लिख चुका है म.च. शास्त्री मनोज चतुर्वेदी शास्त्री Rashtra-Chintan · राष्ट्रचिन्तन · अप्रैल 2026 'हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा?' मिर्ज़ा ग़ालिब का यह शेर जब लिखा गया था, तब शायद उन्हें यह नहीं पता था कि डेढ़ सौ वर्ष बाद यह भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी पर इतना सटीक बैठेगा। कांग्रेस का गुलिस्तां आज वह है, जहाँ हर शाख पर एक ऐसा नेता विराजमान है जो अपने ही दल की जड़ें काट रहा है — और भाजपा को घर बैठे संजीवनी दे रहा है। हा...