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शायद पप्पू की शादी का ख़्याल दिल में आया है

बचपन में हम एक गाना सुना करते थे- "शायद मेरी शादी का ख़्याल दिल में आया है, इसीलिए मम्मी ने मेरी तुम्हें चाय पे बुलाया है।" ठीक ऐसे ही आजकल श्रीमती सोनिया गांधी विपक्षियों को चाय पर आमंत्रित कर रही हैं। लेकिन यहां मसला उनकी बेटी की शादी का नहीं बल्कि उनके सुपुत्र की ताजपोशी का है। 

श्रीमति सोनिया गांधी के जीवन का एक सपना है जिसे वह किसी भी कीमत पर पूरा करना चाहती हैं। और वह है कि उनका लाडला बेटा जिसे प्यार से "पप्पू" कहा जाता है, वह इस देश का प्रधानमंत्री बन जाये। 
इसी के चलते उन्होंने हाल ही में समस्त विपक्षी दलों को एकजुट करने के इरादे से चाय पर आमंत्रित किया था। सबके लिए "साइकिल" भी गिफ्ट में मंगाई थी, खुद पप्पू भैया भी ट्रैक्टर से उतरकर साइकिल पर सवार हो गए। इसका सबसे बड़ा फायदा हुआ पप्पू भैया के परम मित्र "टीपू भैया" को, क्योंकि उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह साइकिल है। पप्पू तो केवल घण्टी बजाने और चाय पीने-पिलाने में ही आनन्द लूटते रह गए, इसीलिए तो बेचारे पप्पू हैं।

बचपन में हमने एक कहानी पढ़ी थी कि एक बार चूहों की मीटिंग हुई जिसमें बिल्ली के गले में घण्टी बांधने का प्रस्ताव पारित हुआ, लेकिन समस्या यह आ खड़ी हुई कि बिल्ली के गले में घण्टी बांधेगा कौन? 
यहाँ भी समस्या कुछ ऐसी ही है, दरअसल विपक्ष के एकजुट होने का तब तक कोई नतीजा नहीं निकलेगा जब तक कि सम्पूर्ण विपक्ष एकराय होकर किसी एक को अपना सर्वमान्य नेता न चुन ले। क्योंकि प्रश्न एकजुटता का बिल्कुल नहीं है बल्कि प्रश्न है मोदी का विकल्प कौन है? जनता को मोदी जैसा नेता देना ही एकमात्र समाधान है, और इस प्रश्न का विपक्ष के पास कोई संतोषजनक उत्तर नहीं है। 
कांग्रेस जो कि सबको दिशा दिखाने और उनका नेतृत्व करने का असफल प्रयास कर रही है, वह तो स्वयं ही दिशाहीन और नेतृत्वविहीन है। राहुल गांधी पूरी तरह से अपने आपको एक "अयोग्य नेता" सिद्ध कर चुके हैं। यहां तक कि खुद कांग्रेसी भी दबे स्वरों में इस सच्चाई को स्वीकार करने लगे हैं कि राहुल गांधी किसी भी दृष्टिकोण से प्रधानमंत्री जैसे गरिमामयी पद हेतु योग्य नहीं हैं। परन्तु उनकी माता जी  "लेडी धृष्टराष्ट्र" बनी हुई हैं और उन्हें अपने "पप्पू" के अतिरिक्त कोई भी अन्य व्यक्ति योग्य नज़र नहीं आता। और सही पूछिये तो यही समस्त समस्यायों का मूल है। कांग्रेस "पप्पूमोह" को कभी नहीं छोड़ सकती क्योंकि कांग्रेस को सत्ता चाहिए और सत्ता के शिखर तक पहुँचने के लिए "गांधी परिवार" की बैसाखी अत्यंत आवश्यक है और "पप्पू" गांधी परिवार के इकलौते चश्मेचिराग हैं। उधर बाकी का विपक्ष भी जानता है कि बिना कांग्रेस का साथ लिए भाजपा को हराना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है। 

कुल मिलाकर चाय पियो, नाश्ता खाओ और घर जाकर सो जाओ। 

🖋️ *मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
समाचार सम्पादक- उगता भारत हिंदी समाचार-
(नोएडा से प्रकाशित एक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र)

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