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आखिर हम कब तक इन अहसान फरामोश पत्थरबाजों के लिए अपने जांबाजों के प्राणों की आहुति देते रहेंगे

मैं #Indian Govt. से पूछना चाहता हूं कि
आखिर हम कब तक "अहसान फरामोश पत्थरबाजों" को बचाने के लिए अपने जाबांजों के प्राणों की आहुति देते रहेंगे? हम कब तक हुतात्माओं को श्रद्धांजलियां अर्पित करते रहेंगे, मातम का ढोंग-ढकोसला करते रहेंगे? हम क्यों खाड़ी देशों सहित तमाम मुस्लिम देशों के समक्ष आत्मसमर्पण की मुद्रा में हाथ उठाकर खड़े हो जाते हैं? हम इज़रायल और यहूदियों से क्यों नहीं सीखना चाहते? हम पाकिस्तान और विपक्ष की आड़ लेकर कब तक अपनी कायरता और नपुंसकता को  छिपाते रहेंगे?
इजरायल हमसे हर मामले में छोटा है, परन्तु विश्वभर के अरेबियन टट्टू उसके सामने घुटनों पर आ जाते हैं, क्यों? सारे मानवाधिकारों का ठेका क्या हमने ही ले रखा है? बहुत हो चुका फल-फूल चढ़ाना, विधवा विलाप, अहिंसा-शांति का ढोल बहुत पीट लिया, अब सीधे रण में उतरने का समय है।

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