मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने माता सीता का परित्याग कर जनता के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत किया था ताकि जनता यह समझ सके कि किसी भी प्रकार से राजा और प्रजा के बीच कोई भी नियम भिन्न नहीं होता, एक राजा पर भी वही नियम-कानून लागू होते हैं जो कि आम जनता के लिए बनाए गए हैं। इसीलिए प्रभु श्रीराम ने एक धोबी के द्वारा कटाक्ष किये जाने को गम्भीरता से लेते हुए माता सीता को वनवास दिया था।
आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री परम् आदरणीय श्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने भी एक ऐसा ही सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया जब उन्होंने कोरोना महामारी आपदा के पूर्ण निस्तारण की रणनीति के चलते और लॉकडाउन के कर्तव्यों का पालन करते हुए एक पुत्र के कर्तव्यों का परित्याग कर दिया। उन्होंने जनहित में यह फैसला किया कि वह अपने पूज्य पिताश्री के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे।
यह वास्तव में बेहद भावुक किंतु प्रेरणादायक उदाहरण है जो इस साधारण सी घटना को न केवल ऐतिहासिक बनाता है अपितु समस्त संसार के समक्ष एक महान राजा के दायित्वों का उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।
आज कलियुग में ऐसे महान संत वास्तव में पूजने योग्य हैं, हम सबको आदरणीय श्री योगी आदित्यनाथ से प्रेरणा लेनी चाहिए और एक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपने पूज्य योगी जी के मार्गदर्शन में कोरोना जैसी मानवता की दुश्मन बीमारी को समूल नष्ट करने का बीड़ा उठाना चाहिए।
ईश्वर आदरणीय श्री योगी जी के पूज्य पिताजी की आत्मा को परम शांति प्रदान करें, कोटि-कोटि नमन है उन माता-पिता को जिन्होंने योगी आदित्यनाथ जैसे पुत्र को न केवल जन्म दिया अपितु अपने पुत्र को ऐसे महान संस्कार भी दिए। आज उत्तर प्रदेश की जनता सदा-सदा के लिए स्व. आनन्द सिंह का बिष्ट का ऋणी हो गया है।
ॐ शांति ॐ
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