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CAA-NRC से तीन को दिक़्क़त : पप्पूभक्त, बाबरभक्त और जिन्नाभक्त

इस देश में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो यह समझता है कि उसने हिंदुस्तान पर हुक़ूमत की है। इस वर्ग में पप्पूभक्त, बाबरभक्त और जिन्नाभक्त हैं। 

यहां "पप्पूभक्त" से हमारा आशय उन लोगों से है जो यह मानते हैं कि इस देश की राजगद्दी पर केवल गांधी परिवार का जन्मसिद्ध अधिकार है। क्योंकि कांग्रेस  यह मानती है कि सत्ता पर केवल "गोरों" (चाहे वह ब्रिटिश गोरे हों या इटैलियन गोरे) का ही अधिकार है।
वह अन्य भारतीयों को (मुग़लवंशियों के अलावा) काले रंग का असभ्य ग़ुलाम मानते हैं। यह हमेशा "पप्पू" को राजा बनाए जाने की वक़ालत करते हैं।

"बाबरभक्त" से हमारा आशय उन लोगों से है जो लोग यह मानते हैं कि एक न एक दिन इस देश में पुनः मुग़लवंशियों का राज स्थापित किया जाएगा और "बाबर" और "औरंगजेब" जैसे बादशाह बनेंगे। और हिंदुओं से जज़िया कर वसूला जाएगा।

"जिन्नाभक्त" से हमारा आशय हमेशा उन लोगों से होता है जिनका ताल्लुक़ उस मुस्लिम लीग से रहा है जिन्होंने मौलाना आज़ाद की दाढ़ी पर कीचड़ मल दिया था और जिनका हमेशा से एक ही नारा रहा "हंसकर लिया पाकिस्तान, लड़कर लेंगे हिंदुस्तान". जिन्होंने "भारत तेरे टुकड़े होंगे,इंशाअल्लाह-इंशाअल्लाह" के नारे लगाए। जिन्होंने अफ़ज़ल के मरने पर मातम मनाया था और हमारे वीर सैनिकों की शहादत पर दिवाली मनाई थी। जो पाकिस्तान की जीत पर पटाख़े फोड़ते हैं, और भारत की जीत पर टीवी तोड़ते हैं। यही लोग कश्मीर की आज़ादी की बात कर रहे हैं, यही लोग इस देश को खोखला कर रहे हैं। और इन्हीं लोगों को हम दीमक भी कह सकते हैं। इन जिन्नाभक्तों को आधुनिक भाषा में "वामपंथी" कहा जाता है। 

दरअसल, ये लोग हमेशा से इस मानसिकता के साथ जीते हैं कि इन्होंने इस देश में हुकूमत की है और हिन्दू, सिख, बौद्ध और जैन इनके ग़ुलाम हैं, और उनको कोई अधिकार नहीं कि वह सत्ता में रहें।

इन्हीं लोगों ने एक षडयंत्र के तहत अभी तक यह भ्रम बना रखा हुआ था कि इस देश के केवल 14 प्रतिशत अल्पसंख्यक "किंगमेकर" हैं जबकि बाकी 86 प्रतिशत लोग ग़ुलाम हैं और उन्हें यह अधिकार नहीं है कि वह इस देश के राजा को चुनें।

लेकिन इस मिथक को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री श्री अमित शाह की 'जय-वीरू' की जोड़ी ने पूरी तरह से ग़लत साबित कर दिया।


 उनके हौंसलों को मोदी-शाह की जोड़ी ने पूरी तरह से नेस्तानाबूत कर दिया। और एक के बाद एक वह सभी फैसले लागू करने प्रारंभ कर दिए जिनका सीधा ताल्लुक़ इन कट्टरपंथी कांग्रेसी राजशाही विचारधारा के जिन्नाभक्तों से था। चाहे वह धारा 370 हो, तीन तलाक़ का मसला हो, अयोध्या मसला हो या फिर CAA हो।

आज जो लोग CAA-NRC का विरोध कर रहे हैं, दरअसल वह लोग मोदी-शाह से बेइंतहा नफ़रत करते हैं और सत्ता से बेइंतहा मौहब्बत। लेकिन जनता इनके इस सत्ताप्रेम को बख़ूबी समझ रही है और सेक्युलिरिज्म के नक़ाब के पीछे छुपे कट्टरपंथी चेहरे को हर शख़्स भलीभांति देख चुका है।

-मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"

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