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विश्व को आतंकवाद से मुक्ति के लिये विश्व धर्म संसद की आवश्यकता है-यति नरसिंहानन्द सरस्वती

धर्मसंसद में गुस्ताखे रसूल घोषित करके जिबह किये गए अमर बलिदानी पंडित कमलेश तिवारी जी को सनातन धर्म का गौरव घोषित किया गया।
 श्री ब्राह्मण महासभा तथा सारस्वत ब्राह्मण महासभा के सहयोग से धर्म संसद में उनकी पत्नी का भव्य अभिनदंन किया और ढाई लाख रूपये धर्म संसद की ओर से दिए गए।
आज गोविंदपुरम स्थित प्रीतम फार्म में सांस्कृतिक गौरव संस्थान और राष्ट्रीय सैनिक संस्था के संयुक्त तत्वाधान में सनातन धर्म और भारत राष्ट्र के भविष्य की चिंताओं को लेकर संतो,सैनिको, बुद्धिजीवियों,किसानों और युवाओं की दो दिवसीय धर्म संसद के दूसरे दिन भारत सहित सम्पूर्ण विश्व मे मजहब या सम्प्रदाय के नाम पर बढ़ रहे आतंकवाद और हिंसा पर गहन चिंतन किया गया।आज की धर्म संसद की अध्यक्षता   
भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ जी महाराज ने की।आज धर्म संसद में देश के प्रमुख संतो ने अपने विचार रखे।
धर्म संसद की प्रस्तावना संतो के समक्ष रखते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा की ये बहुत दुख की बात है की आज के विज्ञान और ज्ञान के युग मे भी मजहब और संप्रदाय के नाम पर हिंसा और आतंकवाद फैलाया जाता है।मजहब और संप्रदाय के नाम पर आतंकवाद और हिंसा ईश्वरीय विधान के विरुद्ध है।अतः दुनिया के सभी धर्मों के धर्माचार्यो को ऐसी शक्तियों और विचारधाराओ से संघर्ष करना ही चाहिये जो अपने मजहब या सम्प्रदाय के नाम पर निर्दोष लोगों का कत्ल करते हैं।आज से पांच हजार से भी ज्यादा पहले भगवान श्रीकृष्ण जी सम्पूर्ण मानवता को श्रीमद्भगवद गीता के माध्यम से बता चुके हैं की कोई भी व्यक्ति किसी भी विधान से ईश्वर या दैवीय शक्तियों की उपासना करें,वो उपासना अन्तोगत्वा ईश्वर तक ही जाती है।ऐसे में किसी पर जबरदस्ती अपनी पूजा उपासना पद्दति थोपना बहुत ही निकृष्ट प्रवृत्ति है जिसे समाप्त किया जाना चाहिये।वर्तमान युग मे सनातन धर्म के धर्माचार्यो का दायित्व बहुत बढ़ गया है क्योंकि विश्व शांति का रास्ता जब भी निकलेगा,श्रीकृष्ण की श्रीमद्भगवद गीता से ही निकलेगा और दुनिया को गीता समझाना सनातन के धर्मगुरुओ की जिम्मेदारी है।
धर्म संसद को संबोधित करते हुए यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा की आज भारत को मानवता और विश्व की रक्षा के लिये आध्यात्मिक रूप से विश्व का नेतृत्व करना चाहिये।यदि भारत के नागरिक अपने राष्ट्र को विश्वगुरु के पद पर देखना चाहते हैं तो उन्हें अपने कर्तव्य का भी पालन करना पड़ेगा।आज भारत को पूरे विश्व के आध्यात्मिक धर्मगुरूओ को मजहब व संप्रदाय के आधार पर आतंकवाद का विरोध करने के लिये तैयार करना पड़ेगा।कोई करे या न करे,परंतु शिवशक्ति धाम डासना अपनी जिम्मेदारी से मुँह नहीँ मोड़ेगा और 2021में दिल्ली में विश्व धर्म संसद का आयोजन किया जायेगा।
धर्मसंसद को संबोधित करते हुए योगी ज्ञाननाथ जी महाराज ने कहा की आज सनातन धर्म के धर्माचार्यो को गहन चिंतन करके मानवता की रक्षा के लिये नीति तैयार करनी चाहिये।हम सारा दोष नेताओ और राजनीति पर थोप कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते।धर्म और मानवता को बचाने की जिम्मेदारी सबसे पहले धर्मगुरुओ की है।आज सभी सनातन धर्म के गुरुओं 
को शिवशक्ति धाम डासना और यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी का साथ देना चाहिये।
धर्म संसद में अखिल भारतीय अखाडा परिषद के पूर्व प्रवक्ता हठयोगी जी महाराज,अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष दिल्ली क्षेत्र के अध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी अनुभूतानंद गिरी जी, दिल्ली संत महामण्डल के महामंत्री महामण्डलेश्वर नवल किशोर दास जी महाराज,महामण्डलेश्वर स्वामी सर्वानन्द सरस्वती जी,महामण्डलेश्वर स्वामी हरिओम गिरी जी महाराज,महामंडलेश्वर स्वामी भैयादास जी महाराज,स्वामी भोला गिरी जी महाराज,स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज व श्रीब्रह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधीर कौशिक के साथ अनेक गणमान्य लोगों ने अपने विचार रखे।
सांस्कृतिक गौरव संस्थान के अध्यक्ष ब्रिगेडियर राजबहादुर शर्मा, महामंत्री दिनेश चंद त्यागी, राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीर चक्र विजेता कर्नल टी पी एस त्यागी तथा अन्य लगभग सौ संस्थाओं के प्रतिनिधि धर्म संसद में उपस्थित थे।

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