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क्या राजस्थान में कांग्रेस पूतना की भूमिका निभा रही है

सोनिया गाँधी को बाटला एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों पर रातभर रोना आता है. प्रियंका गाँधी वाड्रा उत्तर प्रदेश में आगजनी, हिंसा और पत्थरबाजी करने वालों के लिए विधवा विलाप करती हैं, लेकिन कोटा में मारे जा रहे सैंकड़ों बच्चों की मौत पर उन्हें तरस नहीं आता. कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं “अस्पतालों में तो मौत होती ही रहती हैं”. कांग्रेस के नेता पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान के मुसलमानों को भारत की नागरिकता दिलवाने के लिए छाती फाड़कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन गरीबों के बच्चों की मौत पर उनका कलेजा बाहर क्यों नहीं आ रहा है? उनकी छाती क्यों नहीं फट रही है. अरे, सोनिया जी और प्रियंका जी आप भी तो मां हैं. आपके हृदय में भी तो ममता छुपी होगी, क्या राजनीति के लिए आपने अपनी ममता का गला घोंट दिया है. आप महिला हैं, किसी औरत के दर्द और एक मां की टीस को आपसे बेहतर कौन समझ सकता है. क्या गरीबों के बच्चे और गाँधी परिवार के बच्चों के खून में फर्क है? क्या गरीब के बच्चों के शरीर में पानी बहता है. गरीब के हक के लिए रात-दिन हायतौबा की नौटंकी मचाने वाली कांग्रेस कोटा में गरीब बच्चों के लिए पूतना की भूमिका क्यों निभा रही है? आखिर क्यों अशोक गहलौत कंस की भूमिका में आ गए हैं?
कांग्रेस की सहयोगी शिवसेना के मुखिया और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे साहब ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया की घटना को “जलियांवाला बाग़ हत्याकांड” की संज्ञा दे दी, लेकिन उन्होंने कांग्रेस शासित कोटा (राजस्थान) में सैंकड़ों “निर्दोष और मासूम” बच्चों की मौत को लेकर एक शब्द भी नहीं बोला, क्यों नहीं उन्होंने उसको “कोटा बाल हत्याकांड” की संज्ञा दी. समाजवादी पार्टी के मुखिया पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में फंसे हमारे हिन्दू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बौध भाइयों के भारत आगमन पर तो खूब परेशानी हो रही है लेकिन कोटा बाल हत्याकांड पर उनकी आँखें क्यों बंद हो गई हैं. केजरीवाल सरकार जनता की गाढ़ी कमाई को उपद्रवियों और दंगाइयों पर तो खूब लुटा रही है लेकिन उन्हें कोटा में दम तोड़ रहे अबोध बच्चों की मौत पर कोई रहम नहीं आ रहा.
ममता बनर्जी की भी ममता केवल रोहिंग्या और बंगलादेशी दंगाइयों के लिए जाग रही है लेकिन भगवान का रूप माने जाने वाले निर्दोष बच्चों की मौत पर उन्हें जरा भी तरस नहीं आ रहा, उनकी ममता नहीं जाग रही.
अरे, कांग्रेसियों और उनके चेले-चपाटों डूब कर मर जाओ चुल्लू भर पानी में, क्या तुम्हारे नाम की शर्म और गैरत मर चुकी है.

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