कांग्रेस ने हरसंभव यह प्रयास किया था कि अंबेडकर को उस उच्च सदन की सदस्यता न मिल सके, जो भारत का संविधान बनाने वाला था. संविधान सभा में 296 सदस्य थे, जिनमें से 31 दलित थे. ये सभी प्रांतीय विधानमंडलों द्वारा चुने गए थे. अंबेडकर के गृह प्रदेश बॉम्बे प्रेसिडेन्सी ने उन्हें नहीं चुना था, वे चुनाव हार गए थे. इसके बावजूद, अंबेडकर ने हार नहीं मानी और उन्होंने कलकत्ता जाकर बंगाल विधान परिषद के सदस्यों का समर्थन हासिल करने का प्रयास किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. नतीजन, वे दिल्ली वापस लौट गए. जोगेंद्र नाथ मंडल पहले से ही अंबेडकर की लेखनी, उनकी विद्वता और दलितों के लिए कार्यों को लेकर उनके प्रशंसक थे. जब उन्हें अंबेडकर की तत्कालीन स्थिति की भनक लगी तो उन्होंने तुरंत अंबेडकर को बंगाल के जैसोर-खुलना चुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित किया. जोगेंद्र नाथ मंडल, डॉ. अंबेडकर की उम्मीदवारी के प्रस्तावक बने, कांग्रेस एम.एल.सी. गयानाथ बिस्वास समर्थक और मुस्लिम लीग ने इस चुनाव में अम्बेडकर को नैतिक समर्थन दिया. फिर चुनाव हुए, नतीजे आये और डॉ. अंबेडकर के संविधान सभा में जाने का रास्ता साफ हो गया.
विशेष नोट- इस लेख के कुछ अंश "हिंदी.द आर्टिकल" में प्रकाशित लेख https://hindi.thearticle.in/hindustan/jogendra-nath-mandal-pakistan/
लेखक अभिषेक सिंह रावत, से साभार ली गई हैं.



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