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ऐसे कर सकती है भारत सरकार आपकी नागरिकता को बर्खास्त

नागरिकता अधिनियम, 1955  संविधान लागू होने के बाद भारतीय नागरिकता हासिल करने, इसके निर्धारण और रद्द करने के सम्बन्ध में एक विस्तृत क़ानून है. यह अधिनियम भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान करता है यानि भारत का नागरिक किसी और देश का नागरिक नहीं हो सकता. इसमें बताया गया है कि किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता कैसे दी जा सकती है और भारतीय नागरिक होने के लिए ज़रूरी शर्तें क्या हैं. वर्ष २०१९ से पहले इसे पांच बार (1986, 1992, 2003, 2005 और 2015) संशोधित किया जा चुका है.
भारतीय नागरिकता अधिनियम १९५५, के अनुसार कुछ प्रावधानों के अंतर्गत भारत की नागरिकता ली जा सकती है.
१- भारत का संविधान लागू होने यानि २६ जनवरी, १९५० के बाद भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति जन्म से भारत का नागरिक है. इसके एक और प्रावधान के अंतर्गत १ जुलाई १९८७ के बाद भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक है. यदि उसके जन्म के समय उसके माता-पिता या दोनों में से कोई एक भारत का नागरिक था.

२- यदि किसी व्यक्ति का जन्म अगर भारत के बाहर हुआ हो तो उसके जन्म के समय उसके माता या पिता में से कोई एक भारत का नागरिक होना चाहिए. दूसरी शर्त यह है कि विदेश में जन्में उस बच्चे का पंजीकरण भारतीय दूतावास में एक वर्ष के भीतर कराना अनिवार्य है. इस प्रावधान में मां की नागरिकता के आधार पर विदेश में जन्म लेने वाले व्यक्ति को नागरिकता देने का प्रावधान नागरिकता संशोधन अधिनियम १९९२ के जरिये किया गया था.
३- अवैध घुसपैठ करने वालों को छोड़कर अगर कोई अन्य व्यक्ति भारत सरकार को आवेदन कर नागरिकता मांगता है तो निम्न आधार पर उसे नागरिकता दी जा सकती है-
भारतीय मूल का वह शख्स जो देश में नागरिकता के लिए आवेदन देने के पहले भारत में कम से कम ७ साल से रह रहा हो या भारतीय मूल का वह शख्स जो अविभाजित भारत के बाहर किसी देश का नागरिक हो. मतलब ये कि यह शख्स पाकिस्तान और बांग्लादेश से बाहर किसी अन्य देश का नागरिक हो, और उस नागरिकता को छोडकर भारत की नागरिकता चाहता हो. या वह शख्स जिसकी शादी किसी भारतीय नागरिक से हुई हो और वो नागरिकता के आवेदन करने से पहले कम से कम सात साल तक भारत में रह चुका हो. या वह नाबालिग बच्चे जिनके माता-पिता भारतीय हों या राष्ट्र्मंडल के सदस्य देशों के नागरिक जो भारत में रहते हों अथवा भारत सरकार की नौकरी कर रहे हों.
४-भूमि विस्तार के जरिये नागरिकता देने का है. यदि किसी नए भू-भाग को भारत में शामिल किया जाता है, तो उस क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों को स्वतः भारत की नागरिकता मिल जाएगी.
५- नेचुरलाइजेशन के जरिये नागरिकता देने का प्रावधान है यानि भारत में रहने के आधार पर कोई व्यक्ति भारत में नागरिकता हासिल कर सकता है.



नागरिकता की बर्खास्तगी-




नागरिकता अधिनियम १९५५ की धारा-९ में किसी व्यक्ति की नागरिकता खत्म करने का भी जिक्र किया गया है.
१-यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी और देश की नागरिकता ग्रहण कर ले तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वयं ही समाप्त हो जाएगी अथवा कोई नागरिक स्वेच्छा से अपनी नागरिकता का त्याग कर दे तो उसकी नागरिकता स्वतः ही समाप्त हो जाएगी.
२.
भारत सरकार को भी यह अधिकार है कि वह निम्न शर्तों के आधार पर अपने नागरिकों की नागरिकता समाप्त कर सकती है-
--नागरिक ७ वर्षों से लगातार भारत से बाहर रह रहा हो.
--यदि यह साबित हो जाये कि व्यक्ति ने अवैध तरीके से भारतीय नागरिकता प्राप्त की हो.
--यदि कोंई व्यक्ति देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो.
--यदि कोई व्यक्ति भारतीय संविधान का अनादर करे.


विशेष- जनहित के लिए इस लेख में नागरिकता कानून की कुछ खास विषयों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है. नागरिकता अधिनियम १९५५ की विस्तृत जानकारी के लिए आपको किसी संविधान विशेषज्ञ से इस कानून की पूरी जानकारी लेना अनिवार्य है. 

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