कॉलम संभल की हिंसा के बाद अब कानूनी फाइलों के पन्ने पलट रहे हैं। पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर का आदेश आते ही समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बीजेपी पर तंज कसा कि " भाजपाई किसी के सगे नहीं होते "। यह जुमला सुनते ही उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में ठहाके गूंज उठे, क्योंकि "वफादारी" और 'सगे' होने की नसीहत उस तरफ से आई है, जहाँ इतिहास ने रिश्तों के व्याकरण को ही बदल दिया था। क्या अखिलेश यादव को 2017 याद है? जब अखिलेश यादव 'सगे' होने की बात करते हैं, तो बरबस ही साल 2017 का वह दौर याद आता है। समाजवादी कुनबे की रार जब लखनऊ की सड़कों पर उतरी थी, तब बीजेपी और उनके विरोधियों ने एक वाक्य को मंत्र की तरह जपा था: > " जो अपने बाप का नहीं हुआ, वह किसी और का क्या होगा। " यह जुमला मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान (विशेषकर कन्नौज की रैली में) उछाला था। उन्होंने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश के बीच की 'तख्तापलट' वाली जंग पर चुटकी लेते हुए कहा था कि जो राजनीति के लिए अपने पिता को अध्यक्ष...
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