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रविवार, 12 जुलाई 2020

इतिहास साक्षी है कि अहंकार ने हमेशा सत्ताओं की बलि ली है

क्षत्रिय का परम कर्तव्य है कि वह ब्राह्मण और ब्राह्मणत्व की रक्षा करे, क्षत्रिय के लिए ब्रह्महत्या मानो गऊ हत्या समान है।
एक बार महाराज धृष्टर्राष्ट्र के दरबार में चार अपराधी आये, जिसमें एक ब्राह्मण, दूसरा क्षत्रिय, तीसरा वैश्य और चौथा शुद्र था, चारों ही एक हत्या के अपराधी थे। जब न्याय की बात आई तो पहले दुर्योधन को अवसर दिया गया, अहंकारी और सत्ता के मद में चूर दुर्योधन ने चारों अपराधियों को मृत्युदंड का निर्णय सुना दिया। परन्तु जब धर्मराज युधिष्ठिर से पूछा गया तो उन्होंने ब्राह्मण को सबसे कठोर दंड दिया परन्तु मृत्युदंड देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि ब्राह्मण की हत्या नहीं की जा सकती है।
नन्दवंशी राजा घनानंद को अपनी सत्ता और सम्पदा पर बहुत अहंकार था, उसने कभी ब्राह्मणों का सम्मान नहीं किया, और उसी अहंकार के चलते उसने आचार्य चाणक्य का भी भरे दरबार में अपमान किया था, क्योंकि उसे लगता था कि निहत्थे, कमज़ोर और हमेशा पठन-पाठन में लगे रहने वाले ब्राह्मण भला उसका क्या बिगाड़ सकते हैं। परन्तु परिमाण उसकी सोच के ठीक विपरीत आया जो कि सर्वविदित है।

अहंकार तो महाराज रावण, कंस, हिरण्यकश्यप और स्वयं महाराज इंद्र का भी नहीं रहा था। सत्ता तो आनी-जानी है। कल किसी और के पास थी, आज आपके पास है और कल किसी और के पास होगी। 
इतिहास साक्षी है कि अहंकार की वेदी पर सदैव सत्ताओं की बलि चढ़ी है। 

उत्तरप्रदेश में जो कुछ भी हो रहा है उससे समस्त ब्राह्मण समाज में बेहद आक्रोश है, और वह स्वभाविक भी है। यदि समय रहते उसे शांत नहीं किया गया तो उत्तरप्रदेश में भाजपा पुनः 14 वर्ष का वनवास भोगेगी। यह बात भाजपा के सभी जिम्मेदार नेताओं विशेषतः ब्राह्मण नेताओं को समझनी होगी। अन्यथा सत्ताएं बदलते देर नहीं लगती। 

यद्यपि विकास दूबे को नायक बनाये जाना भी निश्चित रुप से अनुचित जान पड़ता है, तथापि एक के बाद एक ब्रह्महत्याओं का होना भविष्य में किसी अनिष्ट का संकेत अवश्य है।

*-मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*
स्वतंत्र टिप्पणीकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता

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गुरुवार, 9 जुलाई 2020

स्वंयभू गांधीवादियों ज़रा हमारी भी सुन लो

जो लोग हमें गोड़सेवादी कहते हैं और अपने आपको  गांधीवादी, मैं उन समस्त स्वयम्भू गांधीवादियों से पूछना चाहता हूं कि-

👉🏽 गाँधीजी अहिंसावादी थे, लेकिन आप तो आतंकियों के लिए छाती पीटते हैं, उन्हें क्रांतिकारी बताते हैं, खुलेआम सड़कों पर पत्थरबाजी और आगज़नी करते हैं, अफ़ज़ल गुरु और कसाब आपके आदर्श हैं, ऐसा क्यों?

👉🏽 गांधीजी राष्ट्रपिता थे, और आप सीधे-सीधे राष्ट्रविरोध करते हैं, आप अपने राष्ट्र का ही सम्मान नहीं करते, तो राष्ट्रपिता का क्या सम्मान करेंगे?

👉🏽 आप कहते हैं कि हमें गाँधीजी ने इस देश में रोका था, मतलब अगर गाँधीजी आपको न रोकते तो आप सीधे पाकिस्तान चले जाते, मतलब आपको इस देश से कोई मौहब्बत नहीं थी, केवल गाँधीजी के कहने मात्र से आप इस देश में रुक गए, तब आप देशभक्त कैसे हुए?

👉🏽 गाँधीजी ने हमेशा सत्य का साथ दिया और आप तो झूठ और फरेब की चलती-फिरती दुकान हैं, तब आप गांधीवादी कैसे हुए?

👉🏽 गांधी जी हमेशा रघुपति राघव राजा राम.....अर्थात रामधुन गाते थे, और उनके अंतिम शब्द भी "हे राम" थे, लेकिन आपने तो श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आपने तो श्रीराम मंदिर को बनने से रोकने के लिए एडी-चोटी का ज़ोर लगा दिया। तब आप गांधीवादी कैसे हुए?

👉🏽 गांधीजी शुद्ध शाकाहारी  वैष्णव भोजन लेते थे, आप मांस के बिना रोटी नहीं तोड़ते। आप कैसे गांधीवादी हैं?

👉🏽 गाँधीजी गाय को माता मानते थे और आप गाय को  काटना अपना धर्म बताते हैं, तब आप गांधीवादी कैसे हुए?

👉🏽 गाँधीजी एक आदर्शवादी इंसान थे, आप आदर्शहीन है, गाँधीजी ने कभी कोई अहिंसक आंदोलन नहीं किया और आप हिंसा के बिना कोई आंदोलन कर ही नहीं सकते। आप कैसे गांधीवादी हैं?

👉🏽 गाँधीजी तो कांग्रेस को एक राजनीतिक दल के रूप में कभी देखना ही नहीं चाहते थे, जबकि आपने कांग्रेस को राजनीति का एक दलदल बना दिया है।

 आप गांधीवादी नहीं बल्कि जिन्नावादी और जिहादी मानसिकता के "बौद्धिक आतंकी" हैं, आप वैचारिक आतंक की उपज हैं, आपका एक ही मकसद है-गजवा-ए-हिन्द। आपके लिए इस्लामिक राष्ट्र ही आपका राष्ट्र है। 

दरअसल गांधीवाद तो वह भेड़ की खाल है जिसे ओढ़कर आप जैसे भेड़िये इस देश में बेरोकटोक घूम रहे हैं, सेक्युलरिज्म की आड़ में इस देश को सांप्रदायिक हिंसा की आग में निरन्तर झोंक रहे हैं। 

वीर सावरकर, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, सरदार वल्लभभाई पटेल, गुरु गोलवलकर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और तमाम आदर्शवादी और राष्ट्रभक्तों से आपको नफरत क्यों है?

*-मनोज चतुर्वेदी "शास्त्री"*